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ईरान के साथ तनाव के मुद्दे पर सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा अमेरिका: पोम्पियो




वाशिंगटनः ईरान के साथ किसी भी प्रकार के संघर्ष से बचने और

होरमुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अमेरिका विश्व

के अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री

माइक पोम्पियो ने मंगलवार को सेंट्रल कमान के मुख्यालय में यह बात कही।

श्री पोम्पियो ने कहा, ‘‘ हम विश्वभर के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर

काम करना जारी रखेंगे। चीन होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ऊर्जा के

स्रोतों पर निर्भर रहता है। दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और जापान समेत सभी

देश चाहते हैं कि इस जलीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आवागमन होता रहे।

’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका अपना कर्त्तव्य निभायेगा लेकिन वह चाहता है

कि दुनिया का प्रत्येक देश उसके हितों को लेकर उपजे खतरों को समझने का

प्रयास करे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने ऐसे समय में सेंट्रल कमान का दौरा किया है

जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हुए

हमले के मद्देनजर पश्चिम एशिया में अपने एक हजार अतिरिक्त सैनिक तैनात

करने का फैसला किया है। अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शानाहन ने

सोमवार को एक वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी थी।

ईरान के साथ तनाव के बीच तेल टैंकरों पर हुआ है हमला

ओमान की खाड़ी में पिछले गुरुवार को होरमुज जलडमरूमध्य के नजदीक दो

तेल टैंकरों अल्टेयर और कोकुका करेजियस में विस्फोट किया गया था।

ईरान और अरब के खाड़ी देशों के जल क्षेत्र में हुए इस हादसे के कारणों का

अभी तक पता नहीं चल सका है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने

इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। श्री पोम्पियो के मुताबिक अमेरिका ने

खुफिया जानकारी के आधार पर ये आरोप लगाए हैं। अमेरिकी सेना ने अपने

दावे के पक्ष में एक वीडियो जारी किया है जिसमें ईरानी सुरक्षाबल एक टैंकर

से विस्फोटक हटाते हुए दिख रहे हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने ईरानी सेना के

रिवोल्यूशनरी गार्ड दल को ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हमले के लिए

जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने कहा है कि

अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब उसके खिलाफ अभियान चलाकर

तेल टैंकरों पर हुए हमलों के झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

रूस के उपविदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने जांच से पूर्व ईरान पर आरोप

लगाने वाले देशों को चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने

गत वर्ष मई में ईरान परमाणु समझौते से अपने देश के अलग होने की

घोषणा की थी। इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बहुत ही तल्ख हो

गये हैं। इस परमाणु समझौते के प्रावधानों को लागू करने को लेकर भी

संशय की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने

अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते

पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक

प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जतायी थी।



Rashtriya Khabar


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