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अमर बाउरी ने कहा दलित विरोधी है हेमंत सरकार,दोषियों का कर रही संरक्षण

  • कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री संज्ञान नहीं लेते हैं

  • भूखल घासी का मामला दबाने की कोशिश

  • दुमका में रंजीत तुरी का मामला भी दबाया गया

  • राज्य भर में भूख से हुई मौत की न्यायिक जांच हो

रांचीः अमर बाउरी ने आज झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं। उन्होंने राज्य में

हो रहे भूख से मौत और दलितों के ऊपर हो रहे अत्याचार मामले को लेकर रविवार को

रांची के भाजपा कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश

अध्यक्ष सह चंदनकियारी विधायक की हैसियत से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित

किया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं जो मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद

भी उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। 6 मार्च को बोकारो जिला के कसमार में भूखल घासी

की मौत भूख के कारण हो जाती है। जिसका प्रमाण अखबारों और मीडिया में आई खबरों

से मिलता है। मामले को लेकर उस वक्त चल रहे विधानसभा सत्र में भी मुख्यमंत्री का

ध्यान इस ओर आकृष्ट करवाया गया था। बावजूद इसके अधिकारियों का दबाव लगातार

भूखल घासी के परिजनों पर बनाया जा रहा था। उन्हें कहा जा रहा था कि वे अखबारों और

मीडिया में कहे कि भूखल घासी की मौत का कारण बीमारी है। बाउरी ने कहा कि इसके

ठीक दो महीने के बाद भूखल घासी के बेटे की मौत बीमारी के दौरान हो जाती है और फिर

अगस्त महीने में उसकी बेटी की भी मौत भी हो जाती है। तीन मौतों के बाद भूखल घासी

के परिवार को तीन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। अब स्थिति यह है कि बाकी के

बचे परिवार को डर है कि अगर उनके साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना होती है तो

सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी।

अमर बाउरी ने कहा विधानसभा में मामला उठने से डरती है सरकार

अमर कुमार बाउरी ने बताया कि वर्तमान में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और

सरकार को इस बात का डर है कि कहीं भूखल घासी का मामला विधानसभा में फिर से ना

आ जाये इसलिए भूखल घासी के परिवार को बोकारो परिसदन में अतिथि के तौर पर रखा

गया है। अब यह तो सरकार ही जाने कि उन्हें बतौर अतिथि रखा गया है या फिर उन्हें

हाईजैक करके सरकारी संरक्षण में रखा गया है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश

अध्यक्ष ने कहा कि यह भूख से मौत का इकलौता मामला नहीं है। इसके अलावा रामगढ़,

गढ़वा, देवघर, लातेहार में भी भूख से मौत का मामला सामने आया है। सरकार को इन

सभी मौत पर अपना पक्ष रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुमका में रंजीत तुरी ने एससी एसटी एक्ट में केस दर्ज किया। जिसे दबाने

के लिए राज्य के मुखिया के भाई जिला के अधिकारियों पर दबाव बनाते नजर आए। और

कोई कार्रवाई नही होने दिया। वहीं झरिया की लीलू बाउरी ने जब एक अधिकारी पर गाली

गलौज का मामला एससी एसटी एक्ट में दर्ज करवाया तो उसके बाद भी उसके इस केस

पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।मीडिया के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित

जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से मांग किया कि भूखल घासी के मौत की

न्यायिक जांच हो, दोषी अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई हो, मृतक के परिजनों को

2500000 की आर्थिक सहायता दी जाए, वही भूखल घासी के बेटे को सरकारी नौकरी दी

जाए और उस क्षेत्र के अन्य घासी परिवारों के लिए सरकार वहां आवास और रोजगार की

उचित व्यवस्था करें। संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नीरज पासवान एवं

अनुसूचित जाति मोर्चा के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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