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लॉक डाउन के दौरान ही ऊंची कीमत पर बेच डाला था सारा स्टॉक

  • शराब दुकानों में नहीं लग रही भीड़
  • सोशल डिस्टेंसिंग की चिंता बेकार साबित हुई
  • बैच नंबर की जांच से उजागर होगा सारा घोटाला
  • बंदी के दौरान मिलावटी शराब का कारोबार भी चला
संवाददाता

रांचीः लॉक डाउन के दौरान गरीबों को मुफ्त भोजन के साथ साथ ऊंची कीमत पर शराब

भी सहजता के साथ उपलब्ध रही। इस आरोप की पुष्टि शराब के दुकानों के खुलने से हो

गयी। इतने दिनों बाद शराब दुकानों के खुलने से यह आशंका जतायी गयी थी कि वहां

सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन होगा। यह अंदेशा भी था कि शराब की खरीद के

लिए भागमभाग की नौबत भी आ सकती है। इन्हीं आशंकाओं के मद्देनजर सभी शराब

दुकानों के पास अलग से पुलिस का प्रबंध किया गया था। लगातार दूसरे दिन भी यह

आशंका गलत साबित हुई। अधिकांश दुकानों में कोई कतार ही नहीं लगी। इससे स्पष्ट हो

गया कि नियमित शराब का सेवन करने वालों के पास दूसरे माध्यमों से लॉक डाउन के

दौरान भी शराब पहुंचती रही है। अब दुकान खुल जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि

कुछ खास इलाकों की दुकानों से दुकान के पीछे से सारा स्टॉक इसी दौरान निकाला गया

था। इस पूरे माल को बंदी के दौरान ही खपाया जाता रहा है। इस क्रम में मिलावट के जरिए

दो बोतल से चार बोतल शराब बनाने का कारोबार भी हुआ है। सूत्रों की मानें तो इस दौरान

बाहर के कुछ चर्चित इलाकों से भी शराब की खेप नियमित पहुंचायी गयी है।

लॉक डाउन के दौरान अवैध शराब की जानकारी विभाग को थी

इन सारे गोरखधंधों की जानकारी आबकारी विभाग के अधिकारियों की थी। लेकिन वे भी

लॉक डाउन के दौरान इस गोरखधंधे को निजी लाभ के लिए संरक्षण प्रदान करते रहे हैं।

जानकार मानते हैं कि बेवरेज कॉरपोरेशन से जारी शराब के स्टॉक के बैच नंबर और

दुकानों के पूर्व स्टॉक के मिलान से यह पता किया जा सकता है कि प्रतिबंध की अवधि में

किस दुकान ने कितनी गड़बड़ी की है। इसके पहले भी यह आरोप लगा था कि अभियान के

दौरान जब्त होने वाली शराब की अधिक मात्रा भी बिना जब्ती सूची में दर्ज किये इन्हीं

दुकानों से दोबारा बेच दी जाती थी।

अब शराब दुकानों में भीड़ नहीं होने से ही यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दरअसल

शराब का पर्याप्त स्टॉक पहले ही लोगों तक बेचा जा चुका है। इसलिए अधिकांश शराब

दुकानें खाली हैं। वहां विधि व्यवस्था बहाल करने के लिए तैनात किये गये अधिकांश

पुलिसकर्मी अपने अपने मोबाइल से टाईम काट रहे हैं।


 

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