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जनता की नजरों में गिर गये हैं पूजा कमेटी का पदाधिकारी

  • काम के न धाम के बस नेता बने हैं नाम के
  •  माइक बंद क्यों रहेगा जनता पूछ रही है सवाल
  •  अफसरों से करीबी बनाने में जनता नाराज हो गयी
  •  दुर्गा पूजा पर प्रतिबंधों की वजह पर समाज में चर्चा
राष्ट्रीय खबर

रांचीः जनता की नजरों में पहली बार दुर्गा पूजा समिति के सारे पदाधिकारी गिर रहे हैं।

अंदर ही अंदर जो आग लगी हुई है वह कभी भी विस्फोट भी कर सकता है। दरअसल यह

सारी नाराजगी दुर्गा पूजा के गाइड लाइनों को लेकर हैं। इसमें चुपचाप सहमति देने की

वजह से पूजा कमेटी के पदाधिकारी जनता के रोष के निशाने पर हैं।

सोशल मीडिया के विस्तार की वजह से चौक चौराहों पर यह चर्चा आम हो चली है कि

पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में खुद मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी इसमें शामिल हो रही

हैं। वहां कोरोना का प्रभाव झारखंड से अधिक रहा है। उन्होंने कोरोना संकट को देखते हुए

तमाम पूजा कमेटियों को पचास पचास हजार रुपये की सरकारी मदद भी दी है। इस मदद

की वजह से अदालत ने उनकी सरकार से सवाल तक पूछा है। देवी के चक्षुदान के मौके पर

खुद मुख्यमंत्री समारोह में शामिल हुई थी। (देखें फोटो) इधर रांची में दुर्गा पूजा के

आयोजक श्रद्धालुओं की इच्छा छोड़कर सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों की जी हुजूरी में क्यों

लगे हैं। अंदरखाने से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक विवाद के नहीं सुलझने की स्थिति

में अचानक ही नई समितियों का गठन कर इन तमाम समितियों के नेताओं को समाज से

दरकिनार करने की पहल भी हो सकती हैं।

जनता की नाराजगी पूजा के दौरान माइक बंद होने से हुआ 

दरअसल नाराजगी की पहली शुरुआत पूजा के दौरान माइक बंद होने के एलान से हुआ

था। अनेक उम्र दराज श्रद्धालु अथवा किसी कारण से पंडाल जाने में असमर्थ लोग माइक से

मंत्रोच्चारण के साथ साथ घर में बैठकर पूजा करते हैं। इस बार के आदेश से वह सुविधा

नहीं मिल पायेगी। यह खास तौर पर दुर्गा पूजा से जुड़े अनेक श्रद्धालुओं की नाराजगी का

मूल कारण है। इस नाराजगी की वजह से ही हिंदू समाज के अंदर से दुर्गा पूजा समिति के

पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों से मेल

जोल बढ़ाने के लिए इन पदों का दुरुपयोग कर रहे है। इसी वजह से कई प्रमुख इलाकों में

यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि अगर पूजा समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन और

सरकार को साफ साफ जनभावना से अवगत नहीं कराया तो उन्हें हिंदू समाज दरकिनार

कर अलग से अपना इंतजाम कर सकता है।

सोशल मीडिया के विस्तार की वजह से लोगों को बांग्लादेश से भी पूजा के आयोजन की

सूचनाएं मिल रही है। वहां भी कोरोना का संकट है लेकिन न तो प्रतिमाओं का आकार

घटाने की कोई आदेश जारी हुआ है और न ही पूजा के नियमों पर कोई प्रतिबंध लगाया

गया है। इसके बीच ही सिमडेगा में पूजा समिति के आक्रामक होने का वीडियो भी वायरल

होकर रांची में लोगों के मोबाइलों में घूमने लगा है। ऐसे में रांची के दुर्गा पूजा कमेटियों के

पदाधिकारियों के धार्मिक ज्ञान और हिंदू जनमानस से उनके जुड़ाव पर भी अब संदेह

उत्पन्न हो गया है।


 

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