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एक ही रास्ते पर हों वाराणसी के सारे 108 तीर्थस्थलः तिवारी

लखनऊः एक ही रास्ते पर अगर वाराणसी के सारे 108 तीर्थस्थल हों तो इससे श्रद्धालुओं

को काफी फायदा होगा। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा0 नीलकंठ तिवारी ने

कहा है कि वाराणसी आने वाले तीर्थ यात्रियों को एक साथ एक ही पथ पर सभी तीर्थ स्थलों

के दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी जाए। डा0 तिवारी ने कहा कि

वाराणसी के 108 धार्मिक/तीर्थ स्थलों के विकास की डिजाइन में एक ऐसा पावन पथ

विकसित किया जाये जिसमें सभी तीर्थ स्थल जुडे हों। उन्होंने कहा कि नवभौरी, मानस

ज्योर्तिलिंग, नवदुर्गा आदि 108 धार्मिक स्थलों का एक-दूसरे से कनेक्ट करने की योजना

बनायी जायें। उन्होंने कहा कि वाराणसी आने वाले पर्यटकों/ तीर्थ यात्रियों को एक साथ

एक ही पथ पर सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी

जायें। पर्यटन विभाग ने बुधवार को यहां पर्यटन भवन गोमती नगर के सभागार में

चन्दौली, सीतापुर, दुधवा एवं वाराणसी के तीर्थ स्थलों के विकास एवं सौन्द्रयीकरण का

प्रस्तुतिकरण किया गया। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने कहा कि चन्दौली के पर्यटन

स्थल राजदरी, देवदरी वाटरफाल ,की कमियों दूर किया जायें। उन्होंने कहा कि पर्यटन

स्थल पर सुविधाओं को बढ़ाया जायें। आने वाले पर्यटकों के ठहरने खाने एवं घूमने के लिए

अच्छी सुविधाओं को बढ़ाने का काम किया जायें ताकि भविष्य पुन: पर्यटक आने के लिए

आकर्षित हों।

एक ही रास्ते पर इन्हें लाने के लिए आवश्यक निर्देश दिये गये

डा0 तिवारी ने दुधवा नेशनल पार्क की बनायी गयी डिजाइन को और अधिक सुधारने के

निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अब जो डिजाइन तैयान की जाये उसे इको फ्रेंडली होना

चाहिये। पर्यटकों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि विभाग जितनी

अच्छी सुविधा पर्यटकों प्रदान करेगा, पर्यटक उतनी ही अधिक संख्या में आयेगें। पर्यटन

मंत्री ने नैमिषनरायण सीतापुर की तैयार की गयी डिजाइन की सराहना करतें हुये कहा कि

इसमें नैमिष के धार्मिक महत्व की कहानियों को भी जोड़ा जायें। उन्होंने कहा कि इसमें

व्यास की गद्दी, काक भुशंडी संवाद को दर्शाया जायें। किसी भी ऋषि की तप/साधना नैमिष

साधना आने पर ही पूरी तरह ही पूरी होती है इसका वर्णन भी डिजाइन में दर्शायी जाए।

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