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इस हमाम में सभी नंगे हैं जब अकलियतों की बात आती है




  • रालोसपा प्रत्याशी के समर्थन में असदुद्दीन ओबैसी की सभा

  • जनता को ऊर्जा से भर कर सभी को एक तराजू पर तौला

दीपक नौरंगी

भागलपुरः इस हमाम में सभी नंगे हैं। कांग्रेस और भाजपा कोई अलग है, यह समझने की

गलती मत कर लेना। यह बयान है असदुद्दीन ओबैसी का, जो आज भागलपुर में रालोसपा

प्रत्याशी सैयद शाह अली सज्जाद के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे।

इस रैली में मौजूद भीड़ और भीड़ के उत्साह को देखकर यह माना जा सकता है कि

भागलपुर में चुनावी बयार में श्री शाह की उपस्थिति बड़ा गुल खिला सकती है।

इस आधा घंटा के वीडियो में देखिये उन्होंने क्या कुछ कहा

सभी राजनीतिक दलों को एक तराजू पर तौलते हुए श्री ओबैसी ने कहा कि इनमें सबसे

अधिक निकम्मी कोई है तो वह कांग्रेस पार्टी है। यह कांग्रेस पार्टी का ही निकम्मापन है कि

आज दिल्ली की गद्दी पर नरेंद्र मोदी बैठा हुआ है। कांग्रेस दरअसल किसी का नहीं हो

सकता। उसे सिर्फ खुद के फायदे से मतलब होता है। इसलिए लोगों को और खास कर

अल्पसंख्यकों को इस झांसे में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह खुद अनेक वर्षों

तक यूपीए में कांग्रेस के साथ रहे हैं। इसलिए उन्हें अच्छी तरह इस बात का अनुभव है कि

कांग्रेस एक खुदगर्ज पार्टी है।

इस हमाम मे किसी को अलग मत समझ लेना

राजद को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि इस हमाम में किसी को अलग समझने की

गलती मत करना। उन्होंने साफ साफ कहा कि राजद को अल्पसंख्यकों का समर्थन

कांग्रेस से मोहभंग होने के बाद ही मिला था। नतीजा हुआ कि बिहार में एम वाई यानी

मुसलमान और यादव समीकरण की बात की गयी। लेकिन जब भागलपुर में दंगा हुए,

बेकसूर मारे गये तो यह समीकरण कहां था। राजद ने इस पर कार्रवाई इसलिए नहीं की

क्योंकि दंगे में उनके लोग शामिल थे।

जनता और खासकर अकलियत के लोगों ने इसके बाद नीतीश कुमार को समर्थन दिया।

लेकिन नीतीश कुमार की कारगुजारियों को भी याद कीजिए कि जो अफसर भागलपुर दंगे

का दोषी था, उसे ही नीतीश की सरकार ने डीजीपी बना दिया। इसलिए यह पक्का मान

लीजिए कि राजनीति के इस हमाम में सभी नंगे एक जैसे ही है।

भाजपा की चाल को समझना चाहिए

श्री ओबैसी ने कहा कि भाजपा अभी दो घोड़ों की सवारी कर रही है। एक तरफ नीतीश

कुमार हैं तो दूसरी तरफ चिराग पासवान है। लेकिन दरअसल भाजपा की कोशिश इस

लड़ाई के बीच अपने किसी आरएसएस के नेता को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना ही है।

इसलिए सभी को इस मुद्दे पर एकजुट होना जाना चाहिए। अगर यह एकजुटता कायम रही

तो कोई वजह नहीं कि भागलपुर से सैयद अली शाह सज्जाद की जीत पक्की नहीं हो।

जनसभा के बीच भीड़ में माना कि रैली असरदार रही

इस जनसभा के समाप्त होने के बाद कई लोगों ने औपचारिक और अनौपचारिक तौर पर

इस बात को स्वीकार किया कि असदुद्दीन ओबैसी की इस जनसभा का असर कमसे कम

भागलपुर विधानसभा की सीट पर तो पड़ने जा रहा है। लोगों ने माना कि यह भीड़

निर्णायक मतदाता है। रैली में बोली गयी बातों के सुनकर भीड़ में जिस तरीके से उत्साह

और समर्थन जाहिर किया है उससे साफ है कि सैयद अली शाह सज्जाद के पक्ष में

मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मजबूती से खड़ा है।


 



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