fbpx Press "Enter" to skip to content

कुर्बानी की मूल भावना को समझे लोग और उसकी कद्र करें

  • भागलपुर के कई सामाजिक संगठनो से जुड़े हैं वर्दी खान

  • जो सक्षम नहीं हैं उनके लिए यह करना जरूरी नहीं है

  • अल्लाह को समर्पित भेंट है, यह हमेशा ध्यान भी रहे

दीपक नौरंगी

भागलपुरः कुर्बानी बकरीद त्योहार का एक अहम हिस्सा होता है। इस बार अन्य धार्मिक

आयोजनों की तरह इस बकरीद पर भी कोरोना का संकट मंडरा रहा है। इसी मुद्दे पर बात

हुई भागलपुर के वर्दी खान से।

वीडियो में देखिये उन्होंने इस बारे में क्या कहा

श्री खान भागलपुर के एक स्थापित सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनके सामाजिक जीवन को

इस बात से भी बेहतर तरीके से समझा जा सकता है कि वह अपने इलाके में पिछले बाइस

वर्षों से लगातार सदर बने हुए हैं। वह मुस्लिम स्कूल कमेटी के अलावा अनेक सामाजिक

संगठनों से न सिर्फ जुड़े हैं बल्कि समाज सेवा में पिछले दो दशकों से लगातार सक्रिय हैं। 

उनका नाम अग्रिम पंक्ति को कोरोना वॉरियर्स के तौर पर आता है। बकरीद की कुर्बानी के

मुद्दे पर उन्होंने बड़े विस्तार से पूरी बातों की जानकारी दी। उनके द्वारा दी गयी जानकारी

से यह स्पष्ट हो जाता है कि इस कुर्बानी से जुड़े लोगों के लिए कौन कौन सी जिम्मेदारियां

होती है।

वर्दी खान ने बताया कि कुर्बानी के जो नियम बनाये गये हैं, उनका पूरी तरह पालन होना

सबसे अहम बात है। दरअसल बकरीद के मौके पर जो कुर्बानी दी जाती है, वह अल्लाह को

समर्पित है। इसलिए इसमें जो नियम हैं, उनके जरा सा उल्लंघन से भी इस कुर्बानी के पीछे

की मूल भावना खत्म हो जाती है। जो भी लोग कुर्बानी देने जा रहे हैं, उन्हें इस कोरोना के

वैश्विक संकट के काल में इन बातों का पूरी गंभीरता के साथ ध्यान रखना ही चाहिए।

कुर्बानी के नियम में हेरफेर करना कतई जायज नहीं

श्री खान ने बताया कि दरअसल कुर्बानी में जो नियम स्थापित हैं, उसके मुताबिक कुर्बानी

को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसका पहला हिस्सा गरीबों को जाता है। दूसरा हिस्सा

अपने रिश्तेदारों के लिए होता है और तीसरा हिस्सा कुर्बानी देने वाले का होता है। लेकिन

इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि अल्लाह को समर्पित इस कुर्बानी का कोई हिस्सा

यानी गोश्त का टुकड़ा नष्ट नहीं होना चाहिए। इसलिए बार बार यह हिदायत दी गयी है कि

जितना आप खा सकते हैं, उतना ही लीजिए और बाकी गरीबों में बांट दीजिए। उन्होंने

बताया कि कुर्बानी के खून और हड्डी तक को जहां तहां फेंकने पर पाबंदी है। इन्हें ध्यान से

मिट्टी में दफन किया जाना चाहिए। उन्होंने इसी क्रम में कहा कि कोरोना के संकट काल में

यह कुर्बानी सिर्फ उनलोगों के लिए है, जिनकी आर्थिक हैसियत कुर्बानी देने की है। यानी

जो लोग कर्ज में डूबे हुए हैं, उनके लिए यह जरूरी नहीं है। इस बात को भी कुर्बानी देने वालों

को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

राजनीति के सवाल पर साफगोई से कहा अभी चुनाव नहीं

श्री खान अपनी बातों में वर्तमान नें कई स्तरों पर चल रही चुनावी तैयारियों की चर्चा से भी

नाखुश हैं। उन्होंने पूछे जाने पर दो टूक लहजे में कहा कि यह जान बचाने का समय है।

अभी चुनाव नहीं होना चाहिए। इस बात को भी समझने की जरूरत है कि अगर चुनाव

कराये जाते हैं तो कोरोना के इस संक्रमण काल में सोशल डिस्टेंसिंग का क्या होगा। यानी

मतदान के लिए आने वाले अपने ऊपर नये सिरे से संक्रमण का खतरा मोल लेंगे। इसलिए

जहां पूरी दुनिया को अभी जान बचाने की पड़ी है वहां चुनाव के बदले गरीब गुरबों की जान

कैसे बचे इस पर काम होना चाहिए।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from चुनावMore posts in चुनाव »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from धर्मMore posts in धर्म »
More from बयानMore posts in बयान »
More from भागलपुरMore posts in भागलपुर »
More from वीडियोMore posts in वीडियो »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!