बेरमो प्रखंड में हर तरफ उड़ रही है ओडीएफ की धज्जियां

बेरमो में उड़ रही ओडीएफ के दावों की धज्जियां
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एम एस अंसारी

बेरमो : बेरमो प्रखंड आज भी ओडीएफ के दावों की धज्जियां उड़ाता ही नजर आ रहा है।

झारखंड के एक्का दुक्का पंचायतो को छोड़ लगभग प्रखंडों के पंचायत पूरी तरह से स्वच्छ घोषित कर दिया गया है

और आनन फानन में उन पंचायतों को ओडीएफ का प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।

इसी श्रेणी में बेरमो प्रखंड भी शूमार है।

इस प्रखंड के भी सभी पंचायत ओडीएफ घोषित है

मगर दृश्य देख यही लगता है कि ओडीएफ का तमगा कम से कम बेरमो प्रखंड को तो कतई नहीं मिलना चाहिए।

दृश्य साफ बयां कर रहा है कि बेरमो प्रखंड के लगभग पंचायत सिर्फ कागजों तक ही स्वच्छ है वास्तविकता दिगर है।

हम आप झूठ बोल सकते हैं मगर कैमरे की नजर कभी झूठ नहीं बोलती

और अगर कुछ समय के लिए उसे भी झूठा साबित करने का प्रयास किया जाता है

तो आप स्वयं बेरमो प्रखंड के सीसीएल गोबिंदपुर कालोनी का एक बार भ्रमण कर ले सच्चाई आपके समझ में आ जायेगी

कि उपरोक्त बातें सत्य है या मिथ्या। उपरोक्त दृश्य तो महज एक बानगी भर है।

बेरमो प्रखंड के आप किसी भी पंचायत में चले जाये कमो बेशी आपको यही नजारा देखने को मिलेगा।

हालत यह है कि अगर इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी को पूछो तो

वे इसका सारा ठिकारा सीसीएल प्रबंधन पर फोड़ देते हैं

और सीसीएल के अधिकारी इस पर बात करने को ही तैयार नहीं।

कुल मिलाकर तस्वीर देख तो कम से कम बेरमो प्रखंड के पंचायतों को ओडीएफ बनाना

जल्दबाजी व दबाव में लिया गया निर्णय कहा जा सकता है

क्योंकि बेरमो के सभी पंचायतों में स्वच्छता को लेकर काफी काम व जागरूकता फैलाने की जरूरत लगती है।

इतना ही नहीं पंचायतों को जिस आधार पर ओडीएफ बनाया गया उसका मापदंड सौ फीसदी खुले में शौच से मुक्ति को रखा गया।

मगर आज भी बेरमो के किसी भी पंचायत में आप सुबह सुबह घूम ले

तो दर्जनों महिला पुरुष आपको खुले में शौच को आते जाते नजर आ जायेंगे।

बेरमो की निगरानी कमेटी भी ढाक के तीन पात

इस पर निगरानी रखने के लिए सरकार ने निगरानी कमिटी भी बनाई पर यह भी ढाक के तीन पात ही साबित हुए।

बेरमो प्रखंड में सैकड़ों नहीं हजारों हजार शौचालय का निर्माण करवाया गया

जो शौचालय बन गये लोग उसका उपयोग नहीं कर उसे कबाड़ घर बना दिया है

कितने तो आज तक आधे अधूरे है ,कुछ तो बने ही नहीं पैसे का निकासी भी होने की सूचना मिली

सिर्फ जारंगडीह दक्षिणी पंचायत व बोड़िया दक्षिणी पंचायत को ही अगर ले लिया जाए

तो पिछले लंबे समय से यहां बनने वाले समुदायिक शौचालय का कार्य आज तक अधर में लटका हुआ है।

बहरहाल उपरोक्त बड़ी बड़ी बातो को अगर दरकिनार कर भी दिया जाए तो

बेरमो प्रखंड के लगभग पंचायतों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और देश के प्रधानमंत्री के सपनो की योजना को मुंह चिढ़ा रहा है।

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