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सरकारी दावों को ध्वस्त कर दिया किसानों ने आठ को चक्का जाम

  • आंकड़ों में ज्यादा मजबूत थे किसान नेता

  • सरकार के हर तर्क को आंकड़ों से काट दिया

  • आठ घंटे तक बैठक चली लेकिन नतीजा सिफर

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सरकारी दावों को नकारने में किसान नेताओं को पल भर भी देर नहीं लगी। 

नतीजा था कि आज की वार्ता भी एक बार फिर से विफल हो गयी है।  इसी वजह से सरकार

की तरफ से एक के बाद एक तर्क दिये गये और किसान नेता अलग अलग तरीके से उनका

खंडन करते चले गये। विज्ञान भवन में आयोजित इस बैठक में सिर्फ तर्क और प्रति तर्क

का माहौल रहा। इस बीच अंदरखाने से यह बात भी बाहर निकली कि दरअसल इस बैठक

के माध्यम से सरकार सिर्फ किसान आंदोलन के तेवर को भांपना चाहती थी। सरकारी पक्ष

के लोगों को यह बात समझ में आ गयी है कि इस बैठक उनके सामने जो किसान नेता

मौजूद हैं, वे कृषि संबंधित आंकड़ों में पूरी जानकारी रखते हैं। साथ ही जमीन से जुड़े होने

की वजह से सरकार से दो टूक बात करने वालों के पास वास्तविकता से जुड़े हुए तथ्य भी

हैं। इसी वजह से फिर से यह बैठक कुल मिलाकर बेनतीजा रही। जिसमें सिर्फ सरकार

अच्छी तरह से इस बात को समझ पायी कि इस बार के किसान आंदोलन को हल्के में लेने

का नुकसान उसे हो चुका है। किसान पूरी तैयारी के साथ सरकार से सीधी वार्ता करने के

लिए तथ्यात्मक तौर पर अधिक मजबूत स्थिति में है। सरकार द्वारा इस मुद्दे पर फिर से

चर्चा करने के एलान के बीच ही किसानों ने अपने प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत आंदोलन

को और गति देने का भी एलान कर दिया है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि पूर्व

निर्धारित कार्यक्रम के तहत आठ दिसंबर को पूरे भारत में चक्का जाम किया जाएगा।

आंदोलन के नौंवे दिन इस एलान के बाद इस आंदोलन को समर्थन देने वालों की तादाद

और बढ़ी है।

सरकारी दावों को नकारने के बाद आगे की रणनीति का एलान

विज्ञान भवन में सरकार और किसान नेताओं की गुरुवार को बैठक हुई। चौथे दौर की इस

बैठक में करीब 40 किसान नेता शामिल थे। इन किसान नेताओं के बीच कविता कुरुगन्ती

अकेली महिला रहीं। कविता एक सोशल एक्टिविस्ट हैं और किसान आंदोलन की सेंट्रल

कोऑर्डिनेशन कमिटी की मेंबर भी हैं। इस चर्चा में किसान नेताओं का प्रतिनिधित्व करते

हुए कविता ने जबरदस्त दलीलें दी हैं। कविता कुरुगन्ती ऑल इंडिया किसान संयुक्त

समिति की भी सदस्य हैं।

इस बैठक में किसान नेताओं ने शिकायत की कि जब हम बैठक के लिए आते हैं तो दिल्ली

पुलिस जगह-जगह हमें रोक कर पूछताछ करती है, कहां जा रहे हैं ? क्यों जा रहे हैं ?

आधा-आधा घंटा रोका जाता है। इस पर पीयूष गोयल ने कहा कि आप चिंता ना करे,

अगली बार से दिल्ली पुलिस की गाड़ी आपके वाहन के आगे-आगे चलेगी।

नवजोत सिद्धू के आने से बदल गया माहौल

पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे नेता नवजोत सिंह सिद्धू के

किसान आंदोलन के मैदान में उतरते ही पूरा माहौल बदलता हुआ नजर आया। उन्हें भी

पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी लेकिन उनकी तीखे सवालों का उत्तर नहीं दे पायी

पुलिस अंततः पीछे हट गयी। किसानों के बीच आते ही सिद्धू ने अपने ही अंदाज में माहौल

को जोश से भर दिया। वैसे समझा जाता है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ बैठक के बाद

ही वह मैदान में उतरे हैं और मैदान में आते ही मैदान मार लिया है। उन्होंने किसानों को

संबोधित करने के साथ साथ केंद्र सरकार पर जोरदार हमला भी किया। ट्विट कर उन्होंने

देश में धन/संपदा के असमान वितरण पर असंतोष जताया। सिद्धू ने एक ट्वीट करके

कहा, ‘भारत के एक फीसदी सबसे धनवानों के पास, नीचे के 70 फीसदी की तुलना में

ज्यादा संपत्ति है। गरीब कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन धनवानों की संपत्ति में इजाफा होता

है। किसान श्रम करते हैं लेकिन पूंजीवादी कमाते हैं। पिछले छह माह में अंबानी ने हर घंटे

अपनी संपत्ति में 90 करोड़ रु. जोड़े हैं जबकि अडानी की संपत्ति 61 फीसदी बढ़ी है।

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