Press "Enter" to skip to content

वोटों की हिस्सेदारी बढ़ रही अखिलेश की तो योगी की चिंता भी




चुनावी चकल्लस

सर्वेक्षण क्षणों में अब भी भाजपा की बढ़त है कायम
एक प्रतिशत यानी सत्तर सीट होते हैं
खुद मोदी के हाथ में है चुनावी कमान
बसपा और कांग्रेस लगभग साइडलाइन में

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वोटों की हिस्सेदारी में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव धीरे धीरे आगे बढ़ते जा रहा हैं। चुनाव का एलान होने के पूर्व भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिस गति से कल्याणकारी योजनाओं का एलान और शिलान्यास किया जा रहा है, उससे वोटों की हिस्सेदारी का यह प्रतिशत अब तक घटता हुआ नजर नहीं आ रहा है।




चुनावी सर्वेक्षण क्षणों ने निश्चित तौर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चिंता बढ़ाने का ही काम किया है। औपचारिक तौर पर एलान नहीं होने के बाद भी यह लगभग स्पष्ट हो चुका है कि मुख्य मुकाबला भाजपा वनाम सपा ही होना है।

अब इस दंगल में इत्र कारोबारियों पर हुई छापामारी से कोई राजनीतिक बदलाव होता हुआ अगर दिख रहा है तो वह अखिलेश यादव के पक्ष में जाता दिख रहा है। वोटों की हिस्सेदारी का निष्कर्ष यह बताता है कि पिछले पंद्रह दिनों में अखिलेश यादव के वोटों की हिस्सेदारी में साढ़े बारह प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गयी है।

वैसे इन तमाम सर्वेक्षण क्षणों का निष्कर्ष यही है कि अब भी मुकाबला योगी आदित्यनाथ ही जीतते दिख रहे हैं। लेकिन वोटों की हिस्सेदारी का तेजी से बदलना निश्चित तौर पर भाजपा की सीटों की संख्या को कम करता जा रहा है। भाजपा ने जो दावे किये थे, वह किसी भी स्तर पर पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि यहां की चुनावी कमान सीधे नरेंद्र मोदी ने संभाल रखी है।

वोटों की हिस्सेदारी की ताजी रिपोर्ट सर्वेक्षण में

ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक भाजपा को इस बार 2017 के विधानसभा चुनावों की तुलना में करीब एक प्रतिशत वोट कम मिलेंगे, लेकिन इसके चलते उसे 70 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है। कुछ इलाकों में एसपी और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत का फासला एक फीसदी से भी कम है।

इससे योगी आदित्यनाथ की चिंता का कारण भी समझ में आ जाता है। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि उसे आसानी से बहुमत मिलता दिख रहा है। 403 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा+ को 239 सीटें मिलने का अनुमान है वहीं, एसपी और उसकी सहयोगी पार्टियों को 144 और बीएसपी को केवल 12 सीटें मिलने की संभावना है।




प्रियंका गांधी की तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस की किस्मत में खास बदलाव की संभावना नहीं दिख रही। सर्वेक्षण के नतीजों में कांग्रेस की सीटों की संख्या छह तक सीमित रह सकती है। भाजपा के लिए चिंता की वजह सीटों की संख्या में होने वाली संभावित कमी है।

सर्वेक्षण के मुताबिक भाजपा को विधानसभा चुनावों में 38.6 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। 2017 के चुनाव में पार्टी को 39.67 फीसदी वोट मिले थे और 312 सीटों पर उसे जीत मिली थी। 2022 के चुनाव में वोटों के प्रतिशत में एक प्रतिशत की कमी के चलते भाजपा को करीब 70 सीटों का नुकसान हो सकता है।

पूर्वांचल जैसे इलाके में तो दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद नजदीकी दिख रहा है। दोनों को मिलने वाले वोट प्रतिशत के संभावित आंकड़े में एक फीसदी से भी कम का अंतर है।

एसपी के वोट शेयर में हो सकता है बड़ा इजाफा

भाजपा के लिए इससे भी बड़ा चिंता का कारण एसपी को मिलने वाले वोटों में संभावित इजाफा है। एसपी को इस बार करीब 34.4 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है जो 2017 की तुलना में करीब 12.6 फीसदी ज्यादा है। चुनावी मुकाबले का एक रोचक पहलू सीन से बीएसपी का करीब-करीब गायब हो जाना है।

2017 में बीएसपी को एसपी से ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन सीटों की संख्या आधी से भी कम थी। मायावती की पार्टी को 22.23 प्रतिशत वोट मिलने के बावजूद केवल 19 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, एसपी 21.8 प्रतिशत वोट पाकर 47 सीटें जीतने में सफल रही थी।

सर्वेक्षण के अनुसार बीएसपी का वोट प्रतिशत इस बार कम होकर 14.1 फीसदी रह जाएगा यानी उसे आठ फीसदी से ज्यादा वोंटों का नुकसान हो सकता है। इसका सीधा फायदा एसपी को होता दिख रहा है और चुनावी मुकाबला फिलहाल स्पष्ट रूप से दोतरफा दिख रहा है। वैसे महिलाओं को जोड़कर प्रियंका गांधी अगर वाकई कुछ कमाल कर गयी तो यह किसके वोट का हिस्सा होगा, इस पर संदेह की गुंजाइश है क्योंकि कांग्रेस के परंपरागत वोटर अब वोटों की हिस्सेदारी में पूरी तरह बिखर चुके हैं।



More from HomeMore posts in Home »
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

One Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.