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सीटों के तालमेल में फिर अखिलेश ने भाजपा को पीछे छोड़ा




  • भाजपा अब कोई रिस्क नहीं उठाना चाहती
  • राम के शरण में जायेंगे योगी आदित्यनाथ
  • अनेक विधायकों का टिकट काटने की तैयारी
  • सपा ने सहयोगी दलों के साथ बैठक कर ली
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सीटों के तालमेल में अब भारतीय जनता पार्टी पूरी गंभीरता के साथ एक एक सीट पर माथापच्ची करने पर मजबूर हो गयी है। दरअसल पार्टी को यह बात समझ में आ गयी है कि पार्टी के अंदर काफी नाराजगी है। टिकट नहीं मिलने की स्थिति में कई विधायक दूसरा दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।




कई बड़े नेताओं के अचानक से पार्टी छोड़ देने से भाजपा का जातिगत समीकरण बिगड़ा है, यह तो भाजपा के अब के तेवर से स्पष्ट हो जाता है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मौके का लाभ उठाकर अपना रन बटोरने का काम तेज कर दिया है।

उन्होंने बुधवार को गठबंधन के सहयोगियों के साथ बैठक कर विधानसभा सीटों पर अंतिम मुहर लगा दी है। पहले व दूसरे चरण के चुनाव के लिए अब प्रत्याशियों की घोषणा एक-दो दिनों में हो सकती है। इस बीच सपा प्रमुख ने शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में बुलंदशहर की अनूपशहर सीट से केके शर्मा को चुनाव लड़ाने की घोषणा की है।

इसमें प्रसपा प्रमुख और चाचा शिवपाल सिंह यादव और उनके बेटे आदित्य यादव, सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, महान दल के केशव देव मौर्य, अपना दल कमेरावादी की कृष्णा पटेल, जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के संजय चौहान, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डा. मसूद अहमद व एनसीपी के केके शर्मा भी मौजूद रहे।

सीटों को अंतिम रूप देने के साथ ही तय हुआ कि प्रत्याशियों की सूची चरणवार तरीके से जारी की जाएगी। हालांकि, बैठक के बाद अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास और भविष्य पर चर्चा के साथ चुनावी रणनीति पर गठबंधन के सहयोगियों के साथ विचार विमर्श हुआ है।




सीटों के तालमेल में भाजपा संभलकर चल रही है

दूसरी तरफ भाजपा में उत्तरप्रदेश विधानसभा के प्रत्याशी चयन को लेकर लगातार दूसरे दिन भी मेराथन मंथन चला। पार्टी सूत्रों की मानें तो तीन चरणों में शामिल सीटों को लेकर काफी हद तक सहमति बन चुकी है। कुछ सीटों को लेकर ही अभी कश्मकश बाकी है।

इधर, प्रदेश के राजनैतिक हालात को देखते हुए पार्टी फूंक-फूंककर कदम रख रही है। दिल्ली में पार्टी के मुख्यालय में गुरुवार तक करीब 300 सीटों को लेकर चर्चा पूरी होने की खबर है जबकि करीब पौने दो सौ सीटों पर चेहरे भी लगभग तय हो चुके हैं।

उन पर अंतिम मुहर गुरुवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे से प्रस्तावित पार्टी संसदीय दल की बैठक में लगने की उम्मीद है। हालांकि उन्हें एक साथ घोषित नहीं किया जाएगा। पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में हारी हुई सीटों पर बड़ी संख्या में चेहरे बदलने की तैयारी में है।

खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ विधायकों और मंत्रियों का या तो टिकट कटेगा या कुछ के क्षेत्र बदले जाने का संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ाने की तैयारी है। यदि योगी की सहमति से पार्टी संसदीय बोर्ड इस पर मुहर लगाता है तो उनका नाम पार्टी की पहली सूची में शामिल हो सकता है।

हालांकि योगी पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी जहां से कहेगी वे चुनाव लड़ने को तैयार हैं। भाजपा के सहयोगी दल अपना दल से भी सीटों को लेकर चर्चा की गई। अनुप्रिया पटेल गुरुवार को भाजपा मुख्यालय पहुंचीं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल को 11 सीटें दी थी, जिसमें से उसने नौ पर जीत दर्ज की थी। इस बार अपना दल पहले से ज्यादा सीटें चाहता है।



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