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भाजपा से तालमेल के सवाल पर आजसू के अंदर बगावत की हालत







  • कई नेता दूसरे दरवाजों पर दे चुके हैं दस्तक
  • मांडू से कद्दावर नेता तिवारी महतो पार्टी से खफा
  • चंदनकियारी से उमाकांत को विकल्प की तलाश
  • तमाड़ में बालकिशन मुंडा भी सुदेश से हतप्रभ
संवाददाता

रांचीः भाजपा से तालमेल के नाम पर हो रहे विलंब से आजसू के अंदर घमासान की स्थिति बन चुकी है।

पार्टी के कई नेता इस तरीके से पांच साल मेहनत करने के बाद भाजपा के आगे हथियार डालने को पचा नहीं पा रहे हैं।

अंदर की इस किस्म की गतिविधियों से परेशान नेता अब दूसरे ठिकानों पर अपना ठौर तलाशने में जुट गये हैं।

समझा जाता है कि आने वाले कुछ दिनों में यह तस्वीर भी और साफ हो जाएगी।

आजसू के इन नेताओं ने लगातार जमीन पर इसी उम्मीद से काम किया था कि उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा।

शिकायत करने वालों का कहना है कि उन्हें बार बार प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर इसका आश्वासन भी दिया जाता रहा है।

उनके समर्थकों को भी नेतृत्व ने इसी बहाने खुद से जोड़े रखा है।

कई स्थान ऐसे हैं, जहां निश्चित तौर पर युवाओं की पार्टी होने की वजह से आजसू की राजनीतिक हैसियत किसी अन्य राजनीतिक दल से अधिक है।

अब सीटों के ताल मेल में जो गड़बड़ी हो रही है, उससे ऐसे नेता पार्टी से खार खाये हुए हैं।

हटिया सीट पर नवीन जयसवाल के नाम की घोषणा को सुदेश महतो की व्यक्तिगत हार के तौर पर पूरे आजसू में आंका गया है।

इसी वजह से पार्टी में जुड़ने वाले भरत काशी अपने समर्थकों से विचार विमर्श करने में व्यस्त हैं।

उनके समर्थकों का दावा है कि वह अपनी संगठन की ताकत के बल पर निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं।

भाजपा से तालमेल जमीनी नेताओं के लिए संकट

इस बीच मांडू के क्षेत्र से आजसू के लिए काम करने वाले नेता तिवारी महतो भी

हाल के घटनाक्रमों के बाद न सिर्फ हतप्रभ हैं बल्कि वह भी राजनीतिक भविष्य

के विकल्प की तलाश कर रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में उनका फैसला भी सबके सामने आ

जाएगा। जबकि उनके सवाल पर सुदेश और चंद्रप्रकाश दोनों चिंतित हैं।

उधर चंदनकियारी से उमाकांत रजक की नाराजगी अब किसी से छिपी नहीं है।

इस नेता ने भी पार्टी को वहां आगे बढ़ाने में काफी परिश्रम किया था।

अब सीटों के ताल मेल के नाम पर उनके जनाधार को भाजपा के हित में इस्तेमाल करने को रजक के समर्थक बरदास्त नहीं कर पा रहे हैं।

वैसे भी पार्टी के नेताओं का दावा है कि अमर कुमार बाउरी यहां झारखंड विकास मोर्च की टिकट पर जीते थे।

इसलिए यह सीट भाजपा के लिए छोड़ने का कोई औचित्य नहीं है।

तमाड़ विधानसभा सीट पर वर्तमान विधायक विकास सिंह मुंडा के साथ सुदेश के रिश्ते बिगड़ गये थे।

इसी वजह से खुद को कुछ दिनों तक पार्टी की मुख्य धारा से अलग रखने के बाद अंततः विकास ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया।

उनके नाराज होने के समय से ही सुदेश वहां विकल्प के तौर पर बालकिशन मुंडा को आगे बढ़ा रहे थे।

अब हाल के घटनाक्रमों को देखकर खुद बालकिशन भी हैरान हैं और किसी विकल्प की तलाश कर रहे हैं।



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