महावीर हनुमान से भी उंची बनेगी भगवान बिरसा मुंडा की मूर्ति

उलिहातू में बनेगी बिरसा मुंडा की 150 फीट उंची मूर्ति

रांची : राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो ने भगवान बिरसा जयंती के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू में बिरसा जन पंचायत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवान बिरसा मुंडा की 150 फीट गगनचुंबी प्रतिमा स्टैच्यू आॅफ उलगुलान बनाने की घोषणा की है। बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के बीच उलगुलान के बीज डाले थे।



सुदेश महतो ने कहा कि भगवान बिरसा की गौरवगाथा को देश भर में अमर बनाए रखने के लिए स्टै्च्यू आॅफ उलगुलान बनाने का निर्णय इस पंचायत ने लिया है। वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा 135 फीट के हनुमान की है जो विजयवाड़ा में स्थित है। यदि यह प्रतिमा सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्टै्च्यू आॅफ यूनिटी से पूर्व बन गयी तो यह भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा होगी। ज्ञात हो कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान की शुरुआत की थी।

बिरसा जन पंचायत कार्यक्रम आजसू पार्टी द्वारा आयोजित की गई थी। इसमें झारखंड के महानायक अमर शहीद बिरसा मुंडा एवं शहीद सिदो – कान्हू के परिवार शामिल हुए। साथ ही बिरसा के अनुयायी बिरसाइत धर्म के लोगों ने भारी संख्या में पांपरिक वेशभूषा में शिरकत की।
पंचायत को संबोधित करते हुए सुदेश महतो ने कहा कि इतिहास के सारे महापुरुषों ने जमीन के लिए संघर्ष किया और शहादत दी। शहीद सिदो-कान्हू का परिवार पहली बार अपने सपनों का झारखंड देखने निकला है। उन्होंने भगवान बिरसा को एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि जब अंग्रेज आदिवासियों की सुरक्षा के लिए कानून बना सकते हैं तो फिर ऐसी क्या जरूरत है कि आपकी भावनाओं को छेड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सीएनटी-एसपीटी एक्ट के रहते झारखंड में सड़के बनी, एचइसी जैसी कंपनियां स्थापित हुई। फिर इसमें संशोधन की क्या आवश्यकता है। उन्होंने झारखंडी अस्मिता की सुरक्षा एवं विकास के लिए पंचायत के लोगों से निर्णय लेने को कहा।

हर घर, हर गांव से मांगा सहयोग

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स्टैच्यू आॅफ उलगुलान के निर्माण के लिए झारखंड के हर घर से सुदेश महतो ने सहयोग मांगा। साथ ही साथ हर गांव से पत्थर देने का भी आह्वान किया। सुदेश कुमार महतो ने स्टैच्यू के निर्माण के पीछे अपनी सोच बताते हुए कहा कि राज्य भर में बिरसा की सोच, संघर्ष मूल्यों को दबाने एवं खत्म करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में बिरसा मुंडा की सोच और संघर्ष की गाथा को हम इतना उंचा बना देना चाहते हैं कि उनकी सोच और संघर्ष सदा के लिए अमर हो जाए। हमारा इरादा भगवान बिरसा के गौरवशाली इतिहास को लेकर एक लंबी लकीर खींचने की है, ताकि आनेवाले वक्त में कोई भी बिरसा मुंडा और अमर शहीदों के बलिदानों को छोटा साबित करने की हिमाकत नहीं कर सके। पंचायत ने खड़े होकर बिरसा मुंडा की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया।
बिरसा जन पंचायत कार्यक्रम में शहीदों के परिवारों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित करते हुए कहा कि शहीद के परिवार अब इस राज्य के कर्णधार होंगे। हम कदमताल कर राज्य को एक नए सांचे में ढालेंगे जहां सामाजिक समरसता होगी और सब खुशहाल होंगे। प्रतिमा के निर्माण के लिए एक कमेटी बनायी गई है, जिसके संयोजक बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम सिंह मुंडा होंगे।
जन पंचायत को संबोधित करते हुए बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा ने कहा कि बिरसा मुंडा जिन अधिकारों के लिए बलिदान हुए सरकार उसे हमसे छिन रही है, यह हम नहीं होने देंगे। यदि हमें अपने अधिकारों के लिए दूसरी बार भी उलगुलान करना पड़े तो हम करेंगे। उन्होंने बिरसा जन पंचायत कार्यक्रम के आयोजन के लिए सुदेश महतो का आभार व्यक्त किया। रामदुर्लभ सिंह मुंडा द्वारा जमीन दान दिए जाने पर सुखराम मुंडा ने तहे दिल से धन्यवाद दिया।
विधायक विकास मुंडा ने कहा कि हुल क्रांति के पूर्वज हमारी धरती पर पधारे हैं यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। अब हम सब आत्मविश्वास के साथ मिलकर काम करेंगे। सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में संशोधन के विरुद्ध लड़ाई को बल मिला है।

जन की बात अभियान का समापन

स्थानीय नीति तथा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के मुद्दे को लेकर आठ अगस्त शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में आजसू पार्टी द्वारा जन की बात अभियान की शुरुआत की गयी थी। यह अभियान आज 15 नवम्बर बिरसा जयंती तक अलग-अलग चरणों में चला। इस अभियान में लाखों लोगों द्वारा पोस्टकार्ड एवं अन्य माध्यमों से मुख्यमंत्री से स्थानीय नीति में संशोधन की मांग की। कार्यक्रम में डॉ अजय मलकानी की मंडली द्वारा भगवान बिरसा पर आधारित नाटक का मंचन किया गया तथा मुकुंद नायक की मंडली द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई।
कार्यक्रम में डॉ देवशरण भगत, उमांकांत रजक, हसन अंसारी, डोमन सिंह मुंडा, मुनचुन राय, विजय साहू, मुकुंद मेहता, सुधा देवी, बनमाली मंडल, अनिल महतो सहित कई वरीय नेता उपस्थित थे।



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