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कृषि संबंधित कानूनों से देश की अस्सी प्रतिशत आबादी प्रभावित होगीः डॉ उरांव

रांचीः कृषि संबंधित कानूनों के बारे में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य

के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा है कि इन कानूनों में जो

संशोधन किये गये हैं, उससे सिर्फ किसान ही नहीं प्रभावित होंगे, बल्कि इससे देश की 80

प्रतिशत से अधिक आबादी प्रभावित होंगी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल के

पश्चात देश-दुनिया की आर्थिक गतिविधियों में जो बदलाव आ रहा है, उससे देश का एक

बड़ा औद्योगिक घराना खुदरा व्यापार पर भी अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश

करने में लग गया है और इस काम में केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार उन्हें फायदा

पहुंचाने के लिए नियमों में संशोधन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में खुदरा बाजार का

व्यापार 12 हजार अरब से अधिक का है, इस खुदरा बाजार पर कब्जा जमाने के लिए देश

की बड़ी कंपनियों के अलावा कुछ विदेशी कंपनियां भी आगे आयी है। इसी क्रम में अंबानी

की कंपनी के साथ वाट्सअप के मालिक मार्क्स जुगरबर्क्स ने 55 हजार करोड़ निवेश को

लेकर समझौता किया, जबकि गूगल कंपनी भी रिटेल बाजार में उतरने की तैयारी में हैं।

प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कृषि कानून में संशोधन के पहले तक कृषि

उत्पाद को लेकर राज्यों में अलग-अलग कानून थे, लेकिन केंद्र सरकार ने अपने पूंजीपति

मित्रों के सहयोग को लेकर को लेकर इस कानून में संशोधन कर यह प्रावधान कर दिया कि

अब बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से कहीं से भी कृषि उपज की खरीद कर

सकेंगे और राज्य की सीमा के बाहर ले जा सकेंगे।

कृषि संबंधित कानूनों में अब बहुत पेचिदगी है

प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि इससे पहले भी राज्य की सीमा के अंदर

कृषि उपज की खरीद-बिक्री को लेकर कोई रोक नहीं थी, लेकिन भ्रम की स्थिति उत्पन्न

कर किसानों को गुमराह करने का काम किया गया है और अब ऐसे नियम बना दिये गये

कि पूंजीपतियों के लिए कृषि उपज को लेकर अलग-अलग राज्यों में किसी तरह के

लाईसेंस लेने की जरुरत नहीं होगी। प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि नये कृषि

कानून की आड़ में आवश्यक वस्तुओं को जमा करने की क्षमता को भी असीमित कर दिया

गया, पूंजीपति अपनी इच्छा के अनुरूप जितना भी संभव हो पाएगा, कृषि उपज को जमा

कर रख सकेंगे , ऐसे में उनके खिलाफ जमाखोरी पर अंकुश को लेकर प्रभावी कानून के

तहत कार्रवाई नहीं हो सकेगी, इससे कीमतों में बेहताशा बढ़ोत्तरी होगी और किसानों के

साथ ही आम आदमी की भी मुश्किलें बढ़ेगी।

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