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बाघिन की मौत के बाद चार नन्हे शावकों को खोजने का कार्य जारी

पन्ना: बाघिन की मृत्यु के बाद वन विभाग के अमले के साथ ही वन्यजीव प्रेमियों को

उसके चार नन्हे शावकों की ंिचता सताने लगी है, जिनके बारे में बाघिन की मृत्यु के

पता नहीं चला है। बाघों के लिए मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में हाल ही में एक

बाघिन का शव गहरीघाट वन परिक्षेत्र की कोनी बीट से गुजरने वाले नाले में दो दिन पहले

मिला था। लेकिन इस बाघिन के छह से आठ माह तक के चारों नन्हें शावकों का सुराग अब

तक नहीं लग पाया है। वे कहां हैं और किस स्थिति में हैं, इसके बारे में पता करने लिए वन

विभाग का अमला दिन रात एक किए हुए है। विभाग के सूत्रों के अनुसार पिछले दो दिनों

से एक सैकड़ा से भी अधिक वन कर्मचारी और प्रशिक्षित हाथियों का दल इलाके के जंगल

का चप्पा चप्पा छान रहा है, फिर भी शावक सोमवार की दोपहर तक कहीं नजर नहीं आये।

कोनी बीट के इस इलाके का जंगल अत्यधिक जटिल है। मैदानी क्षेत्र जैसी स्थितियां यहां

नहीं हैं, जहां सुगमता से पहुंचा जा सके। यहां के जंगल में गहरी और जटिल पहाड़ी

संरचनाएं हैं, जहां प्रशिक्षित हाथी भी नहीं पहुंच सकते। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि

चारों शावक किसी पहाड़ी की ओट में छुपे होंगे। यही वजह है कि सघन सर्चिंग के बावजूद

अभी तक उनका सुराग नहीं मिल सका। जानकारों का यह भी कहना है कि बाघों के बच्चों

में अत्याधिक अनुशासन होता है।

बाघिन इन शावकों को जिस जगह पर छुपाकर गई होगी

शावक वहां तब तक बने रहेंगे, जब तक उनकी मां नहीं आ जाती। बाघिन अपने शावकों

को इस तरह का प्रशिक्षण शुरू से देती है। कई दिनों तक बच्चों से नहीं मिलती। आमतौर

पर वह शावकों को प्रतिदिन दूध पिलाने की बजाय 3 से 5 दिन के अंतर में दूध पिलाती है।

जाहिर है कि बाघ शावकों में बिना खाए पिए मां की गैरमौजूदगी में रहने की नैसर्गिक

क्षमता होती है। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि

बाघिन की मौत के बाद अब हमारी प्राथमिकता चारों शावकों को खोजना है। इसके लिए

हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। शावकों की आवाज सुनने की कोशिश के अलावा जल

स्त्रोतों पर भी चौकस नजर रखी जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्दी ही शावकों

को खोजने में सफलता मिलेगी। दूसरी ओर युवा बाघिन की मौत से जहां उसके चार नन्हें

शावक अनाथ हो गए हैं, वहीं इस बाघिन का जीवनसाथी बाघ भी अत्यधिक उदास और

तनाव में है।

क्षेत्र संचालक श्री शर्मा ने बताया कि

नर बाघ इलाके में असहज देखा गया है। निश्चित ही बाघिन की मौत से वह आहत हुआ

है। शावकों की बाघ द्वारा परवरिश की संभावना से जुड़े सवाल के जवाब में श्री शर्मा ने

कहा कि इसकी संभावना बहुत ही कम है। बाघ कुछ समय तो शावकों को देख सकता है,

लेकिन दूसरी कोई बाघिन मिलने पर वह उसके साथ जोड़ा बनाकर चलता बनेगा। जबकि

अभी कम से कम एक वर्ष का होने तक शावकों को परवरिश की जरूरत पड़ेगी। क्षेत्र में दो

दिन पहले बाघिन की मौत कैसे हुयी, इस रहस्य पर अभी भी पर्दा पड़ा हुआ है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ऐसे कोई चिन्ह व प्रमाण नहीं मिले, जिससे मौत की वजह का

अनुमान लगाया जा सके। बाघिन के सभी अंगों के सैंपल जांच हेतु लिए गए हैं, जिन्हें

संबंधित प्रयोगशालाओं में रवाना किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने पर ही मौत के कारणों

की असल वजह का खुलासा हो पाएगा। कोनी नाले में जिस जगह पर बाघिन का शव

मिला है, वहां ग्रामीणों की भी आवाजाही रहती है। इस कारण अनेक तरह के सवाल उठ रहे

हैं।

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