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तपोवन मंदिर के महंत के निधन के पश्चात बढ़ गयी है कई लोगों की सक्रियता

  • तपोवन ट्रस्ट की जमीन पर फिर बिल्डरों की गिद्धदृष्टि

  •  धार्मिक संगठन का कोई सदस्य नहीं ट्रस्ट में

  •  अधिकांश बिल्डर और उनके सहयोगी सदस्य

  •  पहले बेची जमीन का मामला सुप्रीम कोर्ट में

संवाददाता

रांचीः तपोवन मंदिर के ट्रस्ट की जमीन पर फिर से बिल्डरों की गिद्धदृष्टि लग चुकी है।

हाल ही में इस मंदिर के महंत के निधन के पश्चात शहर के कई प्रमुख बिल्डर इस ट्रस्ट में

अपनी पसंद के किसी महंत को बैठाना चाहते थे। अपने चहेते महंत को बैठाने की

सक्रियता की भनक दूसरे माध्यमों से मिलने के बाद मंशा का भी खुलासा हो रहा है।

तपोवन ट्रस्ट के पास काफी जमीन है। इससे पहले भी बिरसा चौक के पास इसी ट्रस्ट की

जमीन को साजिश के तहत बेच दिया गया था। स्थानीय नागरिकों को इस मामले की

भनक मिलने के बाद किसी तरह इस साजिश को अस्थायी तौर पर विफल किया गया है।

स्थानीय नागरिक इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। अजीब

स्थिति यह भी है कि इस धार्मिक ट्रस्ट में तपोवन मंदिर होने के बाद भी न तो महावीर

मंडल को इसमें पदेन सदस्य बनाया गया है। साथ ही स्थानीय तौर पर धार्मिक तौर पर

सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी ट्रस्ट में जगह नहीं दी गयी है। काफी पहले भी इस

मुद्दे पर कई बार सरकारी स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। स्थानीय लोगों ने ट्रस्ट के

सदस्यों की रूचि सिर्फ ट्रस्ट की जमीन बेचने पर अधिक होने की वजह से इस ट्रस्ट को

भंग कर उसे सरकार द्वारा अधिग्रहित करने का भी अनुरोध किया गया था।

तपोवन मंदिर की जमीन को फिर से हथियाने की साजिश

महंत के निधन के पश्चात बढ़ गयी है कई लोगों की सक्रियता

मामले का खुलासा होने के क्रम में यह बात भी सामने आयी है कि पास के ही तीस कट्टा

जमीन पर बहुमंजिली इमारत बनाने का नक्शा भी नगर निगम द्वारा पारित कर दिया

गया था। नगर निगम का यह फैसला भी गलत था लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अफसर

पर कोई कार्रवाई तक नहीं की गयी। उक्त अफसर के बारे में शिकायत है कि सीबीआई

और विजिलेंस की जांच के दायरे में आये भवन निर्माण के अधिकांश मामलों में उसकी

सहभागिता रही है। पूर्व मुख्यमंत्री के शासन काल में वह सत्ता के प्रियपात्र अधिकारियों में

से एक रहे हैं।

साजिश की जानकारी शहर के धार्मिक संगठनों तक भी पहुंची है। कई धार्मिक संगठन के

पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर सामूहिक चर्चा के बाद फैसला लेने की बात कही है। लेकिन

सभी इस विषय पर एकमत है कि रामनवमी पर्व के सबसे प्रमुख स्थल के इस ट्रस्ट पर

धार्मिक व्यक्तियों को स्थान दिया जाना चाहिए। बार बार जमीन बेचने की शिकायत

मिलने की वजह से ट्रस्ट से वैसे लोगों को हटाया भी जाना चाहिए, जो सिर्फ जमीन की

लालच में इस ट्रस्ट के सदस्य बने हुए हैं।


 

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