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कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद भी भाजपा की चिंता दूर नहीं हुई




  • हर नेता को किसानों को समझाने की जिम्मेदारी
  • पीएम मोदी और नड्डा ने दिया है निर्देश
  • किसानों के बतायेंगे इसके फायदे: तोमर
  • आगामी चुनावों पर कोई असर नहीं होगा
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : कृषि कानूनों के खिलाफ सफल आंदोलन ने किसानों को फिर राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कृषि कानून वापस लेने के बाद भी भाजपा की चिंता दूर नहीं हुई है । यूपी समेत उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में राज्यों में विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा दबाव में है जिसे किसान संगठन मुफीद मौका मान रहे हैं।




सभी नेताओं ने साफ किया है कि एमएसपी गारंटी कानून के साथ बिजली कानून, बैंकिंग, जमीन के मसलों और गन्ना भुगतान पर भी बात होनी चाहिए। किसान संगठन जानते हैं कि सरकार पर जो दबाव बना है और जिस तरह से किसान एकजुट हुए हैं, शायद ही आगे ऐसा मौका बने। इसलिए एक ही बार में अपनी ताकत लगा देना चाहते हैं।

आज पूर्वोत्तर के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सभी मंत्रियों और भाजपा नेताओं को निर्देश दिया है कि वे हर राज्य में किसानों से बात करें और सभी वर्ग के मजदूरों से बात कर केंद्र सरकार की सफलता को समझाने का प्रयास करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के सभी नेताओं को निर्देश दिया है कि वे केंद्र सरकार द्वारा भारतीय किसानों के लिए उठाए गए अच्छे कदमों से सभी किसानों को समझाने का प्रयास करें। इस अभियान की शुरूआत करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज मणिपुर में किसान मोर्चा की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सफलता के बारे में एक बहुत ही कहानी बताई।

कृषि कानूनों के फायदे अब भी गिना रहे कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज इंफाल में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कृषि कानूनों को निरस्त करने का निर्णय ऐतिहासिक है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता अब भी किसानों को रद्द किए गए कानूनों के लाभों के बारे में बताएंगे।




यहां भाजपा के किसान मोर्चा की बैठक में शामिल होने के बाद मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा, हमने हमेशा किसानों की भलाई के लिए काम किया है और उनके हित के बारे में बात की है।आगामी विधानसभा चुनावों पर किसानों के विरोध के प्रभाव पर, मंत्री ने दावा किया: देश भर में और यहां तक कि पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में भी पार्टी पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा, पार्टी इन राज्यों में जीत दर्ज करेगी।

इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होने हैं। तोमर ने कहा, पार्टी कार्यकर्ता अभी भी किसानों को कृषि कानूनों के लाभों के बारे में बताएंगे। उन्होंने कहा, मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार काम कर रही है।

पार्टी कृषि क्षेत्र की दिशा में काम कर रही है, जिसके लिए सरकार ने एमएसपी को लागत से 1.5 गुना बढ़ाया है, कृषि बुनियादी ढांचे के लिए 1 लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं। हालांकि, कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन से अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए चिंता बढ़ गई हैं।

चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में बीजेपी के लिए किसान आंदोलन एक बड़ी चुनौती बन गया हैं। पंजाब में अकाली दल कृषि कानून के चलते ही बीजेपी से गठबंधन तोड़कर अलग हो गई हैं। किसान आंदोलन के चेहरा बन चुके राकेश टिकैत खुलकर बीजेपी को वोट से चोट देने का एलान कर रहे हैं।



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