Press "Enter" to skip to content

सड़क के किनारे , किस्मत के मारे , रह रहे अपने बाजुओ के सहारे

  • नहीं पड़ रही है अब तक जिम्मेदारों की नजर

  • नारकीय जीवन जीने को विवश हैं सैकड़ों परिवार

  • सरकारी सुविधाओं का बाट जोह रहे विस्थापित परिवार

कटिहारः सड़क के किनारे ही जिंदगी गुजर रही है। मजदिया रेलवे ढाला तथा रेलवे स्टेशन

जाने वाली सड़क के किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर विगत 30 वर्षों से रहने को विवश

विस्थापित परिवारों को बरसात के मौसम मे काफी कठिनाई से गुजरना पड़ता है। गंगा व

कोसी के भीषण कटाव से मलिनिया गांव वासी 30 वर्षो से झुगगी-झोपड़ी मे रहने को

विवश हैं। इनकी जिंदगी नारकीय बन चुकी है। वावजूद इसके इनके दयनीयता पर

आजतक किसी भी सक्षम पदाधिकारी या जनप्रतिनिधियों की नजर नहीं आई।

विस्थापित परिवार ने दुख-दर्द की कहानी बताते हुए उनकी आंखें नम हो गई। कहा कि

इस गांव मे भी सब कुछ था। हंसी-खुशी के साथ सभी रहते थे।सुंदर सड़कें , गांव की

चौपाल, त्योहारों की खुशियां व बच्चों के ठहाके सभी तो थे। लेकिन गंगा व कोसी के

भीषण कटाव ने ही सारी खुशियों पर पानी फेर डाला। जमीन, घर गांव, सब का विनाश हो

गया, और पुरा गांव ही सड़क पर आ गया। आज गांव के लोग पुराने दिनों की याद कर

सिहर उठते हैं। आशियाने की आस में इतने दिन गुजर गए। लेकिन शासन तथा प्रशासन

कटाव पीड़ितों को सरकारी छत मुहैया कराने में विफल रही। और कुर्सेला प्रखंड के

विस्थापित परिवार लगभग 30 वर्षों से रेलवे लाइन एवं सड़क के किनारे रहने को विवश

है। विस्थापित परिवारों ने बताया कि लगभग 30 वर्ष पहले गंगा के भीषण कटाव से पूरे

मलिनिया गांव व कोसी में समा गया था। तभी से उक्त गांव वासी सड़क के किनारे तथा

रेलवे लाइन के किनारे रहने को विवश है। शासन एवं प्रशासन से वर्षों से विस्थापित

परिवारों को बसने हेतु जमीन उपलब्ध कराने के लिए अनगिनत बार गुहार लगाई लेकिन

सब बेअसर रहा।

सड़क के किनारे रहने के बाद हर चुनाव में मिला झूठा दिलासा

हम लोग विस्थापित परिवार प्रखंड, जिला तथा पटना का कई बार चक्कर लगा चुके हैं।

सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। विस्थापित परिवार तेतर राम , हीना देवी , मोसमात

सुमित्रा , देवी मंडल , मूसाय यादव , बेचन राम , मिथुन कुमार ने बताया कि गंगा के

कटाव में हम लोगों का घर सहित उपजाऊ जमीन गंगा में समा गया है। और हम लोग

बेघर हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए किसी प्रकार का साधन नहीं है। जिसके

कारण हम लोग परिवार सहित खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। साथ ही केंद्र एवं राज्य

सरकार द्वारा संचालित किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इंदिरा आवास ,

राशन -किरासन , शौचालय , आदि सरकार द्वारा नही दी जा रही है लाभ।सरकार द्वारा

चलायी जा रही कल्यान कारी योजना से वंचित होना पड़ रहा है। चुनाव के वक्त पंचायत

जनप्रतिनिधि से लेकर विधायक, सांसद सिर्फ आश्वासन देते हैं कि समस्या का समाधान

चुनाव जीतने के बाद कर दिया जाएगा। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई भी

जनप्रतिनिधि हम विस्थापित परिवार की सुधि लेने के लिए भी नहीं आते है। वर्षों से हम

लोगो को बाढ़ , बरसात तथा ठंड तथा तपती धूप के समय जीवन एवं मौत से लड़ना पड़ता

है। बीरबल राम ने कहा कि 30 वर्ष से रेलवे के किनारे रहने को विवश है। लेकिन सरकार

द्वारा अभी तक हम लोगों को जमीन मुहैया नहीं करवा पाई है। जिसके चलते हम लोगों

को बरसात के मौसम जिन्दगी और मौत से जूझना पड़ता है।

आश्वासन के बीते 30 वर्ष हो गये कुछ नहीं हुआ

गीता देवी ने कहा कि आश्वासन से 30 वर्ष बीत गए। हम लोग आज भी रेलवे के किनारे

रहने को विवश हैं।धौलिया मोसमात ने कहा कि सड़क के किनारे रहने के कारण बच्चे

सड़क दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। जनप्रतिनिधि केवल वोट लेने तक ही हाल चाल

जानने आया करते हैं। किन्तु जितने के बाद कोई नहीं आता है। इस संदर्भ में बरारी

विधायक विजय सिंह ने बताया कि विस्थापितों को बताना तथा उन्हें मूलभूत सुविधा

उपलब्ध कराना मेरा मुख्य एजेंडा है। बरारी विधानसभा के सभी विस्थापित परिवारों की

समस्या से अवगत हूँ। इस समस्या के बारे में माननीय मुख्यमंत्री को लिखकर दिया गया

है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण कर विस्थापितों को बसाया जाएगा।

Spread the love
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from राज काजMore posts in राज काज »

Be First to Comment

... ... ...
error: Content is protected !!