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नतिनी का फीस जमा कराने के बाद मंत्री ने दिया जांच का आदेश

बोकारो: नतिनी का फीस जमा करने के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने पूरे

मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं। उल्लेखनीय है कि झारखंड के स्कूली शिक्षा मंत्री

जगरनाथ महतो ने अपनी नतिनी का शिक्षण शुल्क जमा करने चास स्थित डीपीएस

स्कूल पहुंचे थे। शिक्षा मंत्री ने काउंटर पर खड़े हो कर अपने नतिनी का फीस जमा किया।

मालूम हो कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को इस बात की सूचना मिली कि उनकी नतिनी

रिया जो कि चास डीपीएस की छात्रा है उसका नाम ऑनलाइन से ऑफ लाइन कर दिया है।

सूचना मिलने पर शनिवार को जगरनाथ महतो डीपीएस चास पहुंचे। उन्होंने स्कूल के

काउंटर पर खड़ा होकर नतिनी का अप्रैल से सितंबर 2020 तक प्रत्येक महीने के 3, 800

रुपए के हिसाब से 22, 800 रुपए शिक्षण शुल्क जमा किया। इसके बाद उन्होंने स्कूल की

प्रभारी प्राचार्य शैलजा जय कुमार से नतिनी के नाम काटने से संबंधित जानकारी हासिल

की। हालांकि प्रभारी प्राचार्य ने उनकी नतिनी का नाम काटने से इनकार किया। मंत्री

जगरनाथ महतो ने जानकारी देते हुए कहा कि उनकी बेटी रीना बोकारो इस्पात नगर में

रहती हैं। नतिनी रिया डीपीएस चास में कक्षा 4 में पढ़ती है। बेटी ने दूरभाष पर दो दिन पूर्व

 शिक्षण शुल्क नहीं जमा करने पर नाम काटने से संबंधित जानकारी दी थी। इस

पर उन्होंने स्कूल प्रबंधन से दूरभाष पर बातचीत की और कहा कि वे कुछ दिद्यालयों के

विरोध में कई प्रकार की शिकायतें भी मिल रही हैं। इसलिए भी इस संबंध में भी जानकारी

हासिल की। अभिभावकों को किस प्रकार की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, इसका

भी अनुभव करने फीस जमा करने न बाद शिक्षण शुल्क जमा कर देंगे।

नतिनी की फीस की वजह से नाम काटा गया था

बाद में बेटी ने दूरभाष पर जानकारी दी कि स्कूल प्रबंधन ने ऑनलाइन कक्षा से नतिनी का

नाम काट दिया है। इसलिए वे स्कूल पहुंचे और नतिनी का शिक्षण शुल्क जमा कर दिया।

मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वे मंत्री नहीं अपितु अभिभावक के रुप में स्कूल

गए थे। उन्होंने कहा कि निजी विके लिए स्वयं स्कूल पहुंचे। मंत्री जगरनाथ ने कहा कि

स्कूल प्रबंधन ने केवल शिक्षण शुल्क ही लिया है। इसके अलावा अन्य किसी प्रकार के

शुल्क की वसूली नहीं की गई है। स्कूल ने नतिनी का नाम हटाया है या नहीं यह तो जांच से

ही पता चलेगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी इसकी जांच करेंगी। इसके अलावा इन्हें जिले के

सभी निजी विद्यालयों के फीस से संबंधित जांच की रिपोर्ट भी सरकार को सौंपना है।

उन्होंने कहा कि स्कूल एक शिक्षा का मंदिर है इसमें किसी प्रकार की राजनीति नही होनी

चाहिए।

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