Press "Enter" to skip to content

किसानों को गालियां देने के बाद जवानों का सहारा ले रही भाजपा




चुनावी चकल्लस

  • जैसा खुद बोया था वैसा ही खुद काटेंगे
  • अधिकांश सैनिक इसी किसान परिवार के
  • सोशल मीडिया में भी कुप्रचार गलत हो गया
  • उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रभाव भी होगा
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसानों को किसान आंदोलन के दौरान पता नहीं क्या क्या कहा गया था। दरअसल जब किसान आंदोलन उम्मीद से अधिक समय तक टिक गया तो शाहीन बाग की तरह इस आंदोलन को भी ध्वस्त करने के लिए भाजपा के साइबर सेल के लोग सक्रिय हो गये।




खालिस्तानी, पाकिस्तानी, अरबन नक्सली और राष्ट्रविरोधी जैसे नामों से इन आंदोलनकारियों को नवाजा गया। अब इस मोर्चे पर अपने ही द्वारा बोये गये कांटों की टीस को समझते हुए भाजपा फिर से अपने प्रचंड राष्ट्रवाद को फार्मूले को आजमाने लगी है।

लेकिन इसमें भी भाजपा की परेशानी यह है कि अपनी तरफ से राष्ट्रभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने में जुटी पार्टी यह भूल गयी थी कि जिन जवानों के सहारे वे चुनावी वैतरणी पार करना चाहते हैं, उनमें से अधिकांश किसान परिवार से ही आते हैं।

किसान आंदोलन के दौरान जब भाजपा के लोगों द्वारा उन्हें गालियां दी जा रही थी तो सरहद पर जवान भी अपने परिवार के लोगों की राष्ट्रभक्ति पर उठ रहे सवालों से झल्ला रहा था। जाट किसान नेता और राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इस तरफ साफ साफ इशारा भी कर दिया था कि किसानों को इस तरीके से अपमानित किये जाने का गलत संदेश सेना के भीतर जा रहा है क्योंकि अपने ही परिवार की राष्ट्रभक्ति पर भाजपा द्वारा सवाल उठाये जाने को वह निजी अपमान भी समझ रहे है।

किसानों को गालियां देते वक्त भाजपा के सोशल मीडिया के लोग इस बारिक से सामाजिक संरचना को नजरअंदाज कर गये थे। दूसरी तरफ लगातार सोशल मीडिया में कुप्रचार से तंग आकर पहले किसानों ने और बाद में अन्य लोगों ने भी इस किस्म के दुष्प्रचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए उसी सोशल मीडिया को अपना हथियार बना लिया।

किसानों ने अपने खिलाफ प्रचार को ही हथियार बनाया

जनता को बात समझ में तो पहले से ही आने लगी थी लेकिन उनके पास अपनी राय जाहिर करने का कोई दूसरा मंच नहीं था। लिहाजा सोशल मीडिया पर भी कुप्रचार का असर खत्म होना भी भाजपा की समझ में आ गया। उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में किसानों का मुद्दा प्रमुख भूमिका निभायेगा, यह भाजपा जानती है।

इसलिए मौके देखकर चौका लगाने वालों ने जनरल विपिन रावत की शहादत को भी अपने पक्ष में भूनाने की कोशिश में वहां श्रद्धांजलि देने पहुंचे किसानों के नेता राकेश टिकैत के खिलाफ भी नारेबाजी कर दी। ऐसे अवसरों पर इस किस्म की राजनीति भी आम जनता को पसंद नहीं आयी है।




दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ गया कि तमाम सैन्य अधिकारियों की शहादत को चुनावी हथियार बनाने के लिए अगले ही दिन उत्तर प्रदेश में बलरामपुर की चुनावी सभा में इस अंदेशे को सही साबित कर दिया। इस मौक़े पर उन्होंने जनरल रावत की सेवाओं का ज़िक्र करते हुए श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कभी सेना को चुनावी राजनीति से अलग रखने की नैतिक एवं लोकतांत्रिक समझदारी नहीं दिखलाई, बल्कि उसका कैसे उपयोग किया जा सकता है वे इसी जुगत में लगे रहे। राष्ट्रोन्माद पैदा करने की कोशिशें पहले से ही जारी थी। यही वज़ह है कि मोदी कभी सरहद पर जाकर तो कभी सैन्य वेशभूषा पहनकर सेना को तुष्ट करने में लगे रहते हैं।

किसानों को नाराज कर चुकी भारतीय जनता पार्टी यह अच्छी तरह जानती है कि भारतीय सेना में सबसे ज़्यादा सैनिक उत्तर प्रदेश से ही जाते हैं। सेना में यूपी की हिस्सेदारी लगभग 14.5 फ़ीसदी है। इसलिए वे राष्ट्रवाद को उभारकर अपनी और योगी सरकार की नाकामियों को ढँकना भी चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने सैन्य प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को चुना।

सेना और कृषकों का रिश्ता भूल गये थे भाजपा वाले

सेना के चुनावी इस्तेमाल की दूसरी ख़तरनाक़ कोशिश 17-18 नवंबर को झाँसी में हुई। आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत राष्ट्रीय रक्षा समर्पण पर्व का आयोजन करके बहुत सारी रक्षा योजनाएँ देश को समर्पित की गईं। लोगों को याद दिला दें कि 2016 में भी मोदी सरकार ने एक सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

इसके ज़रिए मोदी ने अपने 56 इंच छाती वाली छवि को मज़बूत करने की कोशिश की थी और उस समय इसमें कामयाब भी रहे थे। बीजेपी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर पिछले प्रधानमंत्री से उनकी तुलना करके उनकी महानता को स्थापित करने की भरसक कोशिश की थी।

कहने का मतलब यह है कि सेना को सत्ता और चुनावी राजनीति का हथियार बनाया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों की मानसिक संरचना ऐसी होती है कि उसमें सैन्य राष्ट्रवाद के प्रति स्वाभाविक आकर्षण होता है। इसलिए अगर वे हिंदुत्ववादी विचारधारा की तरफ़ झुक जाएँ तो हैरत नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बार की गड़बड़ी यह है कि जिनकी आड़ में यह कोशिश हो रही है वे भी किसानों के परिवार के ही लोग हैं।



More from HomeMore posts in Home »
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

One Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: