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56 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद चिलाबाड़ी हल्दीबाड़ी ट्रैक पर रेल चली, देखें वीडियो


  • बांग्लादेश के साथ भारतीय रेल का संपर्क हुआ बहाल

  • कोरोना की वजह से कार्यक्रम स्थगित हुआ था

  • इस मार्ग से दूरी करीब 150 किलोमीटर कम

  • स्वजनों से मिलने को लेकर लोग उत्साहित

अमीनूल हक

ढाकाः 56 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस ट्रेन रूट पर फिर से ट्रेन यातायात प्रारंभ की

गयी है। रविवार का दिन होने के दौरान ही व्यापारिक इस्तेमाल के सामान लेकर पहली

ट्रेन इस रेल पथ पर चली। चिलाबाड़ी और हल्दीबाड़ी के बीच के इस रेलखंड पर 56 वर्षों

पूर्व रेल परिवहन बंद कर दिया गया था। अब प्रधानमंत्री शेख हसीना की पहल पर भारत

और बांग्लादेश के बीच हो रहे संबंधों में सुधार के तहत यह नया अध्याय जुड़ गया है।

देखें इस रेलपथ पर जाती पहली गाड़ी का वीडियो

बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही चार रेल पथ पहले से ही चालू हो चुके

हैं। यह उस प्रयास की पांचवी कड़ी हैं, जिसे 56 वर्षों बाद फिर से जिंदा किया गया है। वर्ष

1965 तक यह रेल पथ चालू था और उस वक्त बांग्लादेश के जन्म नहीं हुआ था। पूर्वी

पाकिस्तान के नाम से परिचित इस इलाके के में रेलगाड़ियों के चलने का सिलसिला युद्ध

के दौरान रोक दिया गया था। उसके बाद यह लगातार बंद ही था। कई अन्य रेल पथों को

चालू किये जाने के बाद भी इस रेलखंड को चालू नहीं किया गया था। भारत ने अपनी तरफ

से इस रेल पथ पर कांटे के तारो का बेड़ा भी लगा दिया था। रविवार की शाम साढ़े पांच बजे

39 बॉगी के साथ पहली ट्रेन चिलाहाटी स्टेशन पर आकर रूकी। रविवार का दिन और

कोरोना गाइड लाइन की कड़ाई होने के बाद भी फिर से इस रूट पर व्यापारिक रेल सेवा

चालू होने की घटना को देखने के लिए भी अनेक उत्साही लोग पहले से वहां मौजूद थे।

बांग्लादेश रेलवे की तरफ से वाणिज्य अधिकारी नसीरुद्दीन एवं अनवर हसन ने वहां

भारतीय ट्रेन के चालक एवं गार्डों का स्वागत किया। इस ट्रेन को भारत से लेकर आने वाले

चालक मनोजित पाल चौधरी, गार्ड निर्मल गोड़ामी, नरत पोद्दार और मुकेश कुमार सिंह हैं।

भारत से आने वाली यह व्यापारिक ट्रेन वहां पर सामान लदे बॉगियों को छोड़ने के बाद

अपनी ईंजन के साथ वापस लौट गये। वहां से बांग्लादेश रेलवे की तरफ से ट्रेन चालक

शहीदूर और राणा के साथ साथ गार्ड शहजहां और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों की निगरानी

में ट्रेन को आगे बढ़ाने का काम किया है।

56 वर्षों के बाद सामान लदा ट्रेन पहुंचाकर ईंजन लौट गया

सूचना के मुताबिक इस मालवाही ट्रेन पर लदे माल को सैयदपुर और जशोर के नोआपाड़ा

में उतारा जाएगा। उसके बाद यह खाली बागियों वहां से भारत जाने वाले सामान लोड

करेंगी। रेलवे के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि हल्दीबाड़ी स्टेशन पर कस्टम जांच की

प्रक्रिया पूरी कर यह ट्रेन चिलाहाटी पहुंची थी। इस रास्ते पर ट्रेन यातायात बहाल होने पर

करीब डेढ सौ किलोमीटर की दूरी की बचत भी होगी। चिलाहाटी स्टेशन पर रेलवे के

अलावा बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश और पुलिस के अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। इस रूट

पर ट्रेन का चलना प्रारंभ होते ही स्थानीय स्तर पर भी इसके लिए उत्साह को सभी ने

समझा है। दरअसल इन इलाकों में रहने वाले अनेक लोगों के रिश्तेदार भारतीय सीमा में

रहते हैं। दूसरे रास्ते से वहां तक पहुंचने में अधिक समय और पैसा खर्च होने की वजह

लोगों का आपस में मिलना जुलना नहीं होता था। लोगों को उम्मीद है कि यात्रीवाही ट्रेन

चालू होने पर यह परेशानी दूर होगी। बता दें कि प्रधानमंत्री शेख हसीना की पहल पर भारत

के साथ कुल सात मार्गों पर ट्रेन परिवहन प्रारंभ करने पर सहमति बनी है। इस मार्ग के

चालू होने के पहले से पेट्रोपोल- बेनापोल, गेदे दर्शना, रहनपुर सिंहाबाद, विरल राधिकापुर

रूट खोले जा चुके हैं। इस रूट पर ट्रेन यात्रा का उदघाटन शेख हसीना और भारतीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। अचानक से कोरोना की दूसरी लहर की वजह से सारा

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था। अब इस रेल मार्ग से भारत से बोल्डर, पत्थर,

अनाज, ताजा फल और उर्बरक, प्याज, गोलमिर्च, अदरख के अलावा फ्लाई एश और चूना

पत्थर के साथ साथ लकड़ी भी आयेगी। दूसरी तरफ बांग्लादेश से सभी माल को भारत

भेजने की पूर्व अनुमति प्रदान कर दी गयी है।

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