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23 साल बाद चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा




भिण्डः 23 साल बाद चंबल नदी ने यहां खतरे के निशान को पार कर लिया है।

मध्यप्रदेश के भिण्ड में कोटा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी से 23 साल बाद चंबल नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है।

नदी के किनारे बसे 19 गांव टापू बन गए हैं।23 साल बाद चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा

नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने की संभावना प्रबल हो गई है।

चंबल नदी के किनारे बसे भिण्ड जिले के अटेर क्षेत्र के 19 गांवों में बाढ के हालात हैं।

अटेर किला के पीछे बने शासकीय महाविद्यालय में चंबल का पानी पहुंच गया है।

अटेर से देवालय, खेराहट, मुकुटपुरा और चामुंडा मंदिर को जाने वाले रास्ते जलभराव के कारण बंद हो गए हैं।

इन रास्तों पर स्थित कई पुलियों और रपटों के ऊपर से पानी बह रहा है।

23 साल बाद चंबल नदी 124.31 मीटर पर बह रही है जबकि खतरे का निशान 119.80 है।

चंबल के साथ-साथ सिंध नदी में भी लगातार जलस्तर बढ रहा है।

कलेक्टर छोटे सिंह और एएसपी संजीव कंचन ने आज अटेर में चंबल और रौन में मेहदा घाट का दौरा किया।

बाढग्रस्त गांवों को जाने वाले रास्तों पर पतली रस्सी बांधकर होमगार्ड सैनिकों को तैनात कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि चंबल में कोटा बैराज से पानी छोडे जाने की सूचना मिलने पर अलर्ट जारी किया गया था।

शाम तक नदी का जलस्तर धीरे धीरे बढना शुरू हो गया था।

अटेर कॉलेज के समीप से गुजरने वाले गांव के रास्ते पर सात फीट से ज्यादा पानी भर गया था।

नीचे बने घरों में पानी भरने की संभावना बढ़ गई है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एच एस शर्मा ने

बताया कि सिंध नदी में मेहदा घाट का जलस्तर 3.70 मीटर पर पहुंच गया है, जो कि 24 घंटे पहले 1.80 मीटर पर चल रहा था।

यह अभी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। सिंध नदी के किनारे बसे 33 गांव डूब क्षेत्र में आ गए हैं।

जिले के ग्रामीणों ने बताया कि इस साल बाजरा की फसल अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन बाजरा की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई है।

ग्रामीणों ने बताया है कि प्रशासन ने बाढ़ राहत का पर्याप्त प्रबंध नहीं किये हैं।

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