fbpx Press "Enter" to skip to content

अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का हमला भी चीन से आने की आशंका

  • कोरोना के साथ साथ मवेशियों के मरने का क्रम जारी

  • असम में 14 हजार से अधिक सूअरों की मौत

  • अब तक दस जिलों में फैल गया है प्रकोप

  • सरकारी तौर पर मामले की पुष्टि

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का कहर भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस संक्रमण से

बीते कुछ ही दिनों में 14 हजार से ज्यादा सूअरों की मौत हो गई है। असम सरकार ने

आज सुबह कहा कि राज्य में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का पहला मामला पाया गया है और

इससे 416 गांवों में 14,700 से अधिक सूअर मारे जा चुके हैं। असम के पशुपालन और पशु

चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने , ‘‘राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान

(एनआईएचएसएडी) भोपाल ने पुष्टि की है कि यह अफ्रीकी स्वाइन फ्लू (एएसएफ) है।

केंद्र सरकार ने हमें बताया है कि यह देश में इस बीमारी का पहला मामला है।’ उन्होंने कहा

कि विभाग द्वारा 2019 की गणना के अनुसार सुअरों की कुल संख्या करीब 21 लाख थी

लेकिन अब यह बढ़कर करीब 30 लाख हो गई है ।पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के

प्रवक्ताा ने बताया कि यह संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी असम में नौ

जिलों में फैल चुकी है जिससे इन इलाकों में सूअरों की मौत हो रही है। इस बीमारी ने

पशुपालक किसानों की आजीविका को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। अधिकारियों की

मानें तो संक्रमण असम के छह जिलों से तीन और जिलों माजुली, गोलाघाट और कामरूप

मेट्रोपॉलिटन में फैल गया है। असम में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की वजह से पिछले कुछ

दिनों में कुल 13,013 सूअरों की मौत हुई है। असम में पहली बार इस साल वर्ष फरवरी में

यह बीमारी सामने आई थी। शुरुआत में तो राज्य के छह जिलों डिब्रूगढ़, शिवसागर,

जोरहाट, धेमाजी, लखीमपुर और बिश्वनाथ में बीमारी फैलने की बात सामने आई थी

लेकिन अब यह तीन और जिलों में फैल गई है।

अफ्रीका स्वाइन फ्लू का मृत्युदर शत प्रतिशत होता है

यह वायरस इतना खतरनाक है कि इससे संक्रमित सूअरों की मृत्युदर 100 प्रतिशत है।

असम का दावा है कि वायरस भी नोवल कोरोना वायरस की तरह ही चीन से आया है।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पशु चिकित्सा और वन विभाग को अफ्रीकन स्वाइन

फीवर से राज्य के सूअरों को बचाने के लिए एक व्यापक रोडमैप बनाने के लिए इंडियन

काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चररल रिसर्च के नेशनल पिग रिसर्च सेंटर के साथ काम करने के

लिए कहा है। पशुपालन मंत्री बोरा ने कहा, स्थिति “चिंताजनक” है. राज्य ने तय किया है

कि यह संक्रमित सूअरों को नहीं मारेगा बल्कि “जैव सुरक्षा उपायों को लागू करेगा जो

लॉकडाउन के अनुरूप हैं।असम में इस नई बीमारी के फैलने के बीच पशुपालन एवं पशु

चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने आज काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया। इस दौरान

उन्हों ने जंगली सूअरों को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए उठाए गए कदमों की

जानकारी ली। जंगली सूअरों को बचाने के लिए अगोराटोली रेंज में छह फुट गहरी और दो

किलोमीटर लंबी नहर खोदी गई है ताकि आसपास के गांवों में जंगली सूअर वापस आ सके

जिससे उनका घरेलू सूअरों से संपर्क नहीं हो सके। अतुल बोरा ने बताया कि मौजूदा हालात

के बारे में केंद्र सरकार को भी जानकारी दे दी गई है। फिलहाल असम सरकार ने सूअरों को

तुरंत नहीं मारने का फैसला किया है। यही नहीं इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए

वैकल्पिक उपायों को आजमाने पर जोर दिया जा रहा है ।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from असमMore posts in असम »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

Be First to Comment

Leave a Reply

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: