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जाली हल्दी का कारोबार का भी खुलासा हुआ अनेक लोग बीमार




  • ग्रामीणों को पेट की बीमारी की शिकायत

  • मिल में पिसाई के नाम पर चल रहा धंधा

  • मिड डे मिल में इस्तेमाल रोकने की नोटिस

  • मालदा के कुछ इलाकों में पकड़ा गया धंधा

प्रतिनिधि

मालदाः जाली हल्दी भी अब बाजार में भेजा जा रहा है। इस बार चांचोल इलाका के

हरिशचंद्रपुर से इसकी प्रारंभिक सूचना मिली है। मामले की छान-बीन में इसके पूरे कारोबार के बारे में काफी जानकारी मिली है। दरअसल आम नागरिकों को जाली

हल्दी की आशंका तब हुई जब अनेक लोग पेट की गड़बड़ियों से पीड़ित होने लगे। एक नंबर

ब्लॉक में ऐसी शिकायत अधिक मिलने के बाद लोगों ने अपने अपने स्तर पर भी बाजार में

बिक रही हल्दी की जांच की। लोगों ने ही जब इसे ध्यान से देखा तो जाली हल्दी का पता

चला। इसके बाद इसके बारे में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर लोगों ने जांच की और

राज खुलता चला गया।

मिली जानकारी के मुताबिक हरिशचंद्रपुर थाना क्षेत्र के इस्लामपुर, तिलडांगी, रामपुर तथा मालिओर सहित कुछ और इलाकों में जाली हल्दी के कारोबार का खुलासा हो गया

है। इन तमाम इलाकों के लोगों को पेट की गड़बड़ी की वजह से अपने आप संदेह हुआ था।

मामले की छानबीन में जो तथ्य सामने आये, उसके मुताबिक कई छोटी मिलों में हल्दी

पिसने के नाम पर जाली हल्दी का यह कारोबार चल रहा है।

जाली हल्दी बनाने में घातक रसायन और रंगों का प्रयोग

इस कारोबार को संवाददाता ने अपनी आंखों से भी देखा है। जाली हल्दी बनाने के लिए

धान की भूसी, चावल का बारिक चूर्ण तथा कई किस्म के रसायन और रंग मिलाकर इसे

तैयार किया जा रहा है। इस किस्म की जाली हल्दी को अब गांव के बाजार हाट में भी काफी

खपाया जा रहा है । इलाके में लोगों को पेट की बीमारी की वजह से ही लोगों को इस

जालसाजी के कारोबार के बारे में अधिक संदेह उत्पन्न हुआ है। सामान्य हल्दी से कम

कीमत पर उपलब्ध होने की वजह से इसकी बिक्री भी अधिक हुई है। अब लोग इसे बीमार

होने के बाद खरीदे गये हल्दी पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं।

हरिशचंद्र पुर के हाट में आये एक विक्रेता मैनूल हक ने कहा कि वह अपने घर में हल्दी

पिसकर बेचा करते हैं। दूसरी तरफ हल्दी मिल के मालिक अतीश साहा का कहना है कि

वह अब भी शुद्ध हल्दी का ही कारोबार करते हैं। लेकिन दोनों लोगों को इनदिनों नकली

हल्दी की वजह से कारोबार कम होने का पता है।

मामले का खुलासा होने के बाद इस इलाके में मिड डे मिल में भी इस किस्म की हल्दी का

इस्तेमाल बंद करने का नोटिस जारी किया जा चुका है। अस्पताल के प्रभारी अधिकारी डॉ

अमल कृष्ण मंडल ने कहा कि जिस तरीके से लोग पेट की बीमारी की शिकायत लेकर आ

रहे हैं, उससे तो लगता है कि मिलावट का ही असर है। उन्होंने कहा कि इसमें रंग मिलाये

जाने की वजह से यह इंसानी शरीर पर और भी बुरा प्रभाव डालता है।



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