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एडीआर की रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव के संदर्भ में कई रोचक तथ्यों का खुलासा

  • रिपोर्ट कहती हैं अधिक अपराधी भाजपा खेमा के

  • इस बार भी कई बाहुबली भी चुनाव मैदान में

  • 63 फीसदी भाजपा एम और एमएलए दागदार

  • कांग्रेस खेमा में करोड़पति सबसे अधिक दिखे

राष्ट्रीय खबर

पटनाः एडीआर की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आपराधिक छवि वाले

उम्मीदवारों को टिकट देने की बात आती है, तो आम तौर पर लोगों के जेहन में क्षेत्रीय दलों

का नाम उभरता है। लेकिन एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 2005 के बाद से सबसे

ज्यादा बीजेपी ने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं।बिहार में तमाम

राजनीतिक दल बाहुबलियों को टिकट देने को लेकर एक-दूसरे को घेरते रही है। 2020 में

भी कई दिग्गज बाहुबली मैदान में हैं। अगर उन्हें टिकट नहीं मिला है, तो उन्होंने अपने के

लोगों को उतारा है। दरअसल, एडीआर ने बिहार में 2005 से संसदीय और राज्य

विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 10785 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया है। इस दौरान

बिहार से 2005 से अभी तक जीतने वाले 820 सांसदों और विधायकों का विश्लेषण किया

गया है। 10785 में 3230 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

इनमें 2204 उम्मीदवारों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 2005 से बिहार से

जीतने वाले 820 सांसदों और विधायकों में 57 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एडीआर की रिपोर्ट में आपराधिक छवि वालों का खुलासा

इनमें से 36 फीसदी पर गंभीर मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही इनकी संपत्तियों का भी

विश्लेषण किया गया है। साफ-सुथरी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी ने बीते 15

साल में सबसे ज्यादा आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया है। 2005 से

बीजेपी से चुनाव लड़ने वाले 426 में से 252 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले

घोषित किय है। यानी 59 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। दूसरे नंबर

पर आरजेडी है। आरजेडी ने बीते 15 सालों में 502 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया है। इनमें

से 280 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यानी 52 फीसदी ऐसे लोगों को आरजेडी ने टिकट

दिया था। वहीं, जेडीयू ने इस दौरान 454 को चुनाव लड़ाया, जिनमें 234 पर आपराधिक

केस दर्ज है। इसके बाद कांग्रेस का नंबर आता है। कांग्रेस के 394 उम्मीदवारों का विश्लेषण

किया गया है। 394 उम्मीदवारों में से 170 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।

इसके साथ ही एलजेपी के 330 में 155 उम्मीदवारों पर केस दर्ज हैं। यानी 47 फीसदी

एलजेपी के उम्मीदवार आपराधिक छवि वाले थे। सर्वे में बाकी उम्मीदवार निर्दलीय और

बीएसपी के थे।

प्रत्याशियों के हलफनामा से निकाला है नतीजा

2005 से जीत कर आए बीजेपी के 246 सांसद और विधायकों का बिहार में विश्लेषण किया

गया, तो उसमें 154 पर केस दर्ज थे। यानी कुल 63 फीसदी सांसदों और विधायकों पर

आपराधिक केस हैं। इनमें से 84 पर गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। वहीं, कांग्रेस के 46

जीते हुए सांसदों और विधायकों का सर्वे किया गया है। इनमें 25 पर आपराधिक मामले

दर्ज थे। वहीं, गंभीर अपराध के मामले 17 पर थे। आरजेडी के 158 में से 89 पर गंभीर

आपराधिक मामले हैं। जबकि गंभीर अपराध के मामले 62 पर दर्ज थे। जेडीयू के 296 में से

149 सांसदों और विधायक पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से 101 पर गंभीर अपराध

के केस हैं। इसके साथ ही एलजेपी के 27 में से 19 पर आपराधिक केस दर्ज रहे हैं। इनमें से

11 पर गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं।

चुनाव में करोड़पति प्रत्याशियों की संख्या कम नहीं

वहीं, एडीआर ने उम्मीदवारों हलफनामे के अनुसार 2005 से उनकी संपत्तियों का भी

विश्लेषण किया है। 2005 से बिहार में कांग्रेस ने 394 ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया है,

जिनकी औसत संपत्ति 3.44 करोड़ रुपए रही है। वहीं, बीजेपी के 426 उम्मीदवारों की

औसतन संपत्ति 2.93 करोड़, जेडीयू के 454 उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 3.68 करोड़

रुपये और आरजेडी के 502 उम्मीदवारों की औसन संपत्ति 1.70 करोड़ रुपये रही है।

वहीं, जीतने के बाद भी कांग्रेस से सांसद और विधायक औसतन सबसे ज्यादा अमीर रहे

हैं। 2005 से कांग्रेस से जीते 46 सांसदों और विधायकों की औसतन संपत्ति 4.04 करोड़ हैं,

जबकि बीजेपी के 246 सांसदों और विधायकों की औसतन संपत्ति 2.92 करोड़, जेडीयू के

296 सांसदों और विधायकों की संपत्ति .142 करोड़ और आरजेडी के 158 सांसदों और

विधायकों की औसतन संपत्ति 2.14 करोड़ रही है।


 

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