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प्रशासनिक महकमा भी मान रहा है कि बिहार सरकार अस्थिरता में है




  • कई प्रमुख फैसलों को नीतीश कुमार ने रोक रखा है

  • लालू की चालों से गरमायी है प्रदेश की राजनीति

  • मांझी और मुकेश सहनी पर निर्भर है फैसला

दीपक नौरंगी

भागलपुरः प्रशासनिक महकमा मान रहा है कि नीतीश कुमार की सरकार फिलहाल संकट

के दौर में है। सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि नीतीश कुमार

राजनीति के एक धाकड़ खिलाड़ी है। इसी वजह से अगर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की

तरफ से चालें चली गयी तो उसकी कुछ न कुछ काट नीतीश कुमार खोज लेंगे।

वीडियो में जान लीजिए यह पूरी रिपोर्ट

प्रशासनिक महकमा में यह माना जा रहा है कि अधिकारियों का तबादला रोके जाने से इस

बात के राजनीतिक संकेत मिल जाते हैं। फिर भी नीतीश कुमार भी कोई कच्ची गोलियां

खेलने वाले खिलाड़ी नहीं है। वैसे यह सत्ता संतुलन फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम

मांझी और बिहार सरकार के मंत्री मुकेश सहनी पर निर्भर होता नजर आ रहा है। यह दोनों

ही नेता राजद प्रमुख लालू प्रसाद से बात कर चुके हैं, ऐसी चर्चा है। लेकिन बिहार के

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का चुप रहना भी एक गंभीर संकेत है, ऐसा प्रशासनिक महकमा

मान रहा है। एक पूर्व अधिकारी ने अपने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर कहा कि

नीतीश कुमार को राजनीति का कच्चा खिलाड़ी नहीं समझा जाना चाहिए। अगर उन्हें इस

बात का एहसास है कि जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी लालू के पक्ष में जा सकते है तो

खुद श्री कुमार ने भी उसकी काट के लिए कुछ न कुछ इंतजाम अवश्य कर रखा होगा।

लेकिन प्रशासनिक महकमा यह भी मान रहा है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव

के बाद जदयू की प्राथमिकताएं भी बदली हैं। इसी वजह से जदयू ने संभावित मंत्रिमंडल

विस्तार में अपनी हिस्सेदारी खुलकर मांगी है।

प्रशासनिक महकमा में रूके पड़े हैं कई बड़े फैसले

चर्चा है कि कई अधिकारियों का तबादला करने का फैसला लगभग अंतिम चरण में था।

इस बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की वजह से यह काम तथा कुछ और जरूरी

काम भी स्थगित हो गया है। इस वजह से भी सरकार के अस्थिर होने के संकेत मिल जाते

हैं। वैसे इसका अंतिम परिणाम क्या  होगा, इस बारे में प्रशासनिक महकमा से जुड़े लोग

कोई भविष्यवाणी करना नहीं चाहते हैं। उनके मुताबिक जो कुछ नजर आ रहा है, उसके

उलट भी बहुत कुछ हो सकता है क्योंकि यह बिहार की राजनीति है। हो सकता है कि लालू

से अपनी निकटता दर्शाकर मांझी और सहनी अधिक महत्व हासिल करना चाहते हैं।

दूसरी तरफ भाजपा भी इतनी आसानी से हार मान लेगी, ऐसी सोच गलत होगी। हो सकता

है कि उनकी तरफ से भी अन्य राज्यों की तरह यहां भी अंदरखाने में दूसरे दलों के

विधायकों को मैनेज करने का खेल चल रहा होगा। दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमा यह

संकेत भी दे रहा है कि कांग्रेस के भी कुछ विधायक सीधे नीतीश कुमार के संपर्क में हैं।

इसलिए सब कुछ अस्पष्ट होने के बाद भी बिहार में राजनीतिक गर्मी है, ऐसा माना जा

सकता है।



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