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किसने चिलमन से मारा नजारा मुझे हाय.. .. ..

किसने चिलमन से मारा कहें तो बीते कल और आने वाले कल का इंतजार करिये। जो

बीत गया उसमें एक भइया, अरे यार अपने अरविंद केजरीवाल ने तीर निशाने पर लगाया।

वहां से फुर्सत हो लिये तो अपने पीके भइया (अपने प्रशांत किशोर) बिहार मैदान में कूद पड़े

हैं। बिहार में भी अब चुनावी तुरतुरी बजाने की तैयारी चल रही है। नीतीश कुमार थोड़ी

राहत में इसलिए हैं क्योंकि लालू प्रसाद जेल में हैं और खास बात यह है कि वह बीमार चल

रहे हैं। वरना तय था कि हाल के दिनों में लालू के लिए पूरे देश में इतना पॉलिटिकल

मसाला बना हुआ है कि वह इस मसाले में नीतीश के साथ साथ पता नहीं कितनों का भर्ता

बना देते। उधर तीसरी बात कुर्सी पकड़ते ही अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के पैसों की

अदायगी के लिए केंद्र के दरवाजे पर तगादा शुरु कर दिया है। पहले खुद ही अमित शाह से

मिल आये और बाद में मनीष सिसौदिया को निर्मला सीतारमण ने मिलने भेज दिया।

जाहिर है कि अन्य राज्यों की तरह अब दिल्ली भी केंद्र से अपने पैसे के लिए दबाव बढ़ा

रही है। पहली बार तो यह बात जानकारी में आयी है कि वर्ष 2001 से अब तक दिल्ली को

केंद्र सरकार से एक पैसा नहीं मिला है।

किसने किसको मारा छोड़कर बंगाल पर नजर रखिये

अब बंगाल पर भी नजर बनाये रखिये। वहां भी किस ने चिलमन से मारा का शोर होने ही

वाला है। लेकिन वहां के माहौल में चिलमन से मारने के बदले चिलम से मारने की घटनाएं

शायद ज्यादा होंगी। वैसे भी उत्तर बंगाल के अनेक इलाकों में आये दिन नशे के सामानों

की बरामदगी एक आम बात हो चुकी है। बंगाल की सरकार भी बार बार दिल्ली से अपना

पैसा मांग रही है। दिल्ली के पास अगर राज्यों का इतना सारा पैसा पड़ा है तो इन पैसों को

देने के बाद केंद्र सरकार के पास बचेगा क्या, यही सोचकर चिंता बढ़ रही है। आखिर इतना

पैसा खर्च कहां हुआ। बार बार लोग बोल रहे थे कि जीएसटी का कर संग्रह बढ़ा है और अन्य

तरीके से भी सरकार को लाभ होने के दावे किये जा रहे थे। जहां जहां घाटा हो रहा था, वहां

पहले भी कीमत बढ़ रही थी और अब भी बढ़ायी जा रही है। फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि

काम के बदले सारा पैसा सिर्फ वेतन और फालतू के दिखावे में जा रहा है। इसी वजह से

एक काफी पुरानी फिल्म का गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था मजरूह

सुलतानपुरी ने और उसे संगीत में ढाला था सचिन देव वर्मन ने। इसे स्वर दिया था महान

क्लासिकल गायक मन्ना डे ने। यह भी जान लीजिए कि ब्लैक एंड ह्वाइट के जमाने की

इस फिल्म में यह गीत जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया था और उनके साथ नृत्य में उस

वक्त की प्रमुख अदाकारा सविता चटर्जी थीं।

गीत के बोल कुछ इस तरह हैं

किस ने चिलमन से मारा, हाय …

किसने चिलमन से मारा
अरे, नज़ारा मुझे किसने चिलमन से मारा
नज़ारा मुझे किस न चिलमन से मारा
बिखेरे बाल जब वो, बिखेरे बाल जब वो
बिखेरे बा … ल, जब वो
आसमानों पर घटा झूमे
चले जब चले जब, हाय

चले जब नासूत-ए-ज़ालिम
क़यामत भी क़दम चूमे, क़यामत भी क़दम चूमे
हा, पग में पायल ढालके
घूँघट नयन झुकाए
बिन बादल की दामिनी, बिन बादल की दामिनी
चमकत लटकत जाये चमकत लटकत जाये
चमकत लटकत जाये

फिर ना देखा हाय
फिर ना देखा, ना देखा, ना देखा, ना देखा
अरे फिर ना देखा पलटके
दुबारा मुझे फिर ना देखा पलटके
दुबारा मुझे किस न चिलमन से हाय

किस न चिलमन से मारा
सीने में दिल है, दिल में दाग़
दाग़ों में सो सोज़ सादह-ए-इश्क़

सीने में दिल है
अरे वाह! सीने में दिल है
दिल में दाग़
दाग़ों में सो सोज़ सादह-ए-इश्क़
पर्दा वो पर्दा है दिन्ह पर्दा
नशीं का राज़-ए-इश्क़

परदा वो परदा

अर्रे वाह! पर्दा वो पर्दा
वाह वाह! परदा वो परदा
अर्रे मौलाह! पर्दा वो पर्दा
परदा वो परदा है दिन्ह
पर्दा नशीं का राज़-ए-इश्क़
जतन मिलन का जब करो
नाम पता जब हो
एक झलक बस
एक झलक दिखलायके कर गई पागल मोय

कर गई पागल मोय!
कर गई पागल मोय!!
मेरे दिल, मेरे दिल, मेरे दिल
अर्रे!!

कुल मिलाकर कौन कब बाजी मार ले जाए, यह कहना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। जब

झारखंड में चुनाव हुआ तो बाजी जीतने के बाद हेमंत सोरेन खुद जाकर बाबूलाल जी से

आशीर्वाद ले आये। अब समय आगे निकला तो बाबूलाल जी फिर से भाजपा के हो चुके हैं।

जाहिर है कि आने वाले दिनों में वह फिर से हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालेंगे। ऐसे

में याद आयेगा ही कि किसने चिलमन से मारा, हाय।

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