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कोरोना की आड़ में धर्म और नस्लीय टिप्पणी पर कार्रवाई हो

रांचीः कोरोना की आड़ में धर्म और नस्लीय टिप्पणी का दौर को पूरी ताकत के साथ रोका

जाना चाहिए। ऐसा महसूस किया गया है कि यह वैश्विक संकट भी कुछ लोगों के लिए

अपनी राजनीति साधने का हथियार बन चुका है। कोरोना से बचाव के लिए जारी

लोकडाउन के दौरान सामाजिक-शारीरिक दूरी के बजाय एक समुदाय विशेष के खिलाफ

फैलाई गई जो आज भी बैंकिंग, हॉस्पिटलों, चिकित्सकों, निर्माणाधीन, जनवितरण

दुकानों राशन दुकानों-मजदूरों सामाजिक विद्वेष और अफवाह के खिलाफ बैठक में यह

चर्चा सामने आई। बैठक में इंसाफ के लिए सामाजिक- राजनैतिक-सरकार-क़ानूनी रूप से

गंभीर पहल कर कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए सद्भावना हरहाल में बरकरार रहें इसी

पर कॉमरेड महेंद्र सिंह भवन “माले” कार्यालय में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में एक कमेटी

का गठन किया गया, रांची समेत झारखंड में जिसके साथ भी धर्म विशेष- नस्लीय

टिप्पणी-सांप्रदायिक मानसिकता-विद्वेष के शिकार हुए है उन सभी लोगों की मदद की

जाएगी। शहरी सरकार की महत्वपूर्ण पद पर विराजमान मेयर महोदया की पक्षपातपूर्ण

भूमिका की तीखी आलोचना करते हुए कहा गया की शहर की सद्भावना बिगड़ने की

कोशिश के लिए रांची की जनता से सार्वजानिक तौर पर माफ़ी मांगे, निर्णय लिया गया की

सभी मामलो के भुगतभोगियों से मिलकर सरकार और न्यायलय के स्तर पर भी मज़बूती

से लड़ाई लड़ी जायेगी ताकि भविष्य में कोई भी भेदभाव और अफवाह फलाने की दुःसाहस

ना करें।

कोरोना की आड़ में चल रहे खेल पर अगली बैठक माकपा कार्यालय में

चर्चा के दौरान ये बातें सामने आई की इसमें प्रतिष्ठित और जिम्मेदार बैकिंग, चिकित्सा,

जनवितरण व् राशन दुकान, निर्माण एजेंसियों जैसे संस्थानों भी अछूते नहीं हैं। इसकी

अगली बैठक कल यानि रविवार को सीपीएम कार्यालय, रांची में होगी। आज के बैठक की

अध्यक्षता कॉमरेड जनार्दन प्रसाद(राज्य सचिव, भाकपा माले झारखंड) एव नदीम

खान(एआइपीएफ झारखंड) ने संचालन किया। बैठक में प्रेमचंद मुर्मू(अध्यक्ष, आदिवासी

बुद्धिजीवी मंच झारखंड), सुखनाथ लोहरा(जिला सचिव, सीपीएम रांची)ज्योति सिंह मथारू

(कांग्रेस झारखंड), अनवर एज़ाज़ (जेएमएम झारखंड), भुनेश्वर केवट(जिला सचिव, माले

रांची) मनोहर यादव(पूर्व राज्य अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी झारखंड), यास्मीन लाल(आम

आदमी पार्टी झारखंड), अधिवक्ता फ़ादर महेंद्र पीटर तिग्गा (निदेशक, हॉफमैन लॉ

एसोसिएट) अधिवक्ता ए. के. रशीदी (झारखंड बार काउंसिल), अधिवक्ता रवि मुंडा,

अधिवक्ता इम्तेयाज़ अशरफ़, अजीत सोरेन, मो बब्बर, मो तबरेज़, साकिब जेया, असफ़र

खान आदि शामिल थे।


 

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