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एसीबी की छापामारी झारखंड के लोगों की शिकायत पर हुई

संवाददाता

रांचीः एसीबी की राज्य के कई इलाकों में छापामारी से राजनीति गरमायी हुई है। पहली

बार यह जानकारी मिली है कि दरअसल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने यह छापामारी लोगों

से मिली शिकायतों के आधार पर की है। विभागीय प्रमुख डीजी नीरज सिन्हा ने इस बारे में

बताया है कि कई विभागों के बारे में लोगों की शिकायत थी कि इन विभागों में सामान्य

कामकाज भी सही तरीके से नहीं होते हैं। इसी वजह से लोक सेवा कानून के तहत नियमों

का पालन हो रहा है अथवा नहीं, उसकी जांच के लिए एसीबी की छापामारी हुई है।

शिकायत थी कि रांची और धनबाद नगर निगम में सब कुछ सही होने के बाद भी भवनों के

नक्शे पास नहीं किये जाते हैं। इसके तहत अनेक बड़े प्रोजेक्ट भी बाधित हो रहे थे। इन्हीं

शिकायतों के आधार पर दो नगर निगमों के अलावा डोरंडा में भी दस्तावेजों की जांच की

गयी है। इसी तरह रजिस्ट्री ऑफिस में भी दस्तावेजी जांच हुई है।

एसीबी की कार्रवाई का महापौर ने किया था विरोध

एसीबी की तरफ से हुई कार्रवाई की एक विस्तृत रिपोर्ट अब सरकार को सौंपी जाएगी। इसी

रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे का फैसला करेगी। विभागीय एसपी द्वारा पूर्व में जारी

विज्ञप्ति में ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि दरअसल सरकार से अनुमति प्राप्त होने

के बाद ही एसीबी ने यह अभियान प्रारंभ किया था। इसी अभियान के तहत छापामार दल

को रांची नगर निगम में महापौर का विरोध झेलना पड़ा था। वैसे विभाग ने स्पष्ट कर

दिया है कि निगम महापौर को यह आपत्ति करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। इसी

वजह से बाद में नगर विकास विभाग से नोडल अफसर को साथ लेकर दस्तावेजों को

खंगाला गया है। इस बारे में महापौर श्रीमती आशा लकड़ा का बयान है कि अगर विभाग ने

उन्हें पत्र भेजकर इसकी अनुमति मांगी होती तो शायद मैं उनकी मदद करती। लेकिन मेरी

अनुमति के बिना मेरे ही कार्यालय में कार्यालय की अनुमति नहीं दिये जाने से ब्यूरो के

अधिकारियों को रोका गया। दूसरी तरफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कहता है कि वहां

कार्रवाई के दौरान मामूली गतिरोध हुआ था। जिसे शीघ्र ही सुलझा लिया गया और

छापामारी की कार्रवाई पूरी कर ली गयी है। इस कार्रवाई में मिले दस्तावेजों की जांच की

जा रही है। इसी आधार पर सरकार को विभाग की तरफ से रिपोर्ट भेजी जाएगी


 

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