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अबूगंज इलाके में पूरे कोरोना काल में कोई अफसर झांकने तक नहीं आया

  • गांव के लोगों का शायद सरकार से मोहभंग

  • दबी जुबान से लालू प्रसाद को याद करने लगे

  • सरकारी योजनाओं का कोई लाभ यहां नहीं आया

  • सुलतानगंज के करीब के गांव के लोग सरकार से खफा

दीपक नौरंगी

भागलपुरः अबूगंज एक सामान्य गांव के जैसा ही है। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सुलतानगंज के

करीब है। आज पहली बार इसी अबूगंज के लोगों ने इस बात का खुलासा कर दिया कि पूरे

कोरोना काल में उनके गांव कोई सरकारी मुलाजिम झांकने तक नहीं आया था।

वीडियो में देखिये गांव वालों ने क्या कहा

बिहार विधानसभा चुनाव के करीब आने की वजह से हर इलाके के राजनीतिक समीकरण

को समझ लेना बेहतर होता है। भागलपुर के इलाके में मंडल बहुल गांवों का समर्थन

पिछले पंद्रह वर्षों से नीतीश कुमार के प्रत्याशी की तरफ ही रहा है। इलाके की राजनीति की

समझ रखने वाले भी यह मानते हैं कि यहां का मंडल समुदाय नीतीश कुमार का जबर्दस्त

वोट बैंक है। लेकिन अबूगंज का दौरा करने के बाद यह बात अच्छी तरह समझ में आयी

कि इस वोट बैंक में कोरोना की वजह से बहुत बड़ी टूट हुई है। इस गांव के लोगों से हुई

बात-चीत से ही इस बात का अंदाजा हो सकता है कि आसन्न विधानसभा चुनाव में मंडल

वोट बैंक के भरोसे रहना नीतीश कुमार अथवा उनके प्रत्याशी के लिए खतरे की घंटी बन

चुकी है।

वहां के ग्रामीणों की बहुमत की राय थी कि यहां सरकारी सुविधाओँ के नाम पर एलान तो

सब कुछ होता है लेकिन वास्तव में कुछ भी फायदा लोगों को नहीं मिल पाया है। सबसे

बड़ी बात यह समझ में आयी की पूरे कोरोना काल में कोई भी सरकारी मुलाजिम इस गांव

में झांकने तक नहीं आया था।

अबूगंज और आस पास के इलाकों के ग्रामीण उपेक्षा से नाराज

नीतीश कुमार के पीछे खड़े रहने वाला यह समुदाय अब दबी जुबान से लालू यादव को याद

करने लगा है। गांव में सामान्य समस्या के अलावा भी लोगों को राशन नहीं मिलने की

शिकायत आम है। पूरे कोरोना काल में उन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।

सरकार की तरफ से जो कुछ एलान किया गया था, उसका कुछ भी इस अबूगंज गांव तक

नहीं पहुंचा है। इसी क्रम में आम समस्याओं से अलग हटते हुए एक व्यक्ति के अपना

मकान नहीं होने की तरफ ध्यान आकृष्ट किया जबकि एक बूढ़ी महिला ने नीतीश कुमार

से मुखातिब होते हुए कहा कि गरीबों के लिए सरकारी अफसर कुछ नहीं कर रहे हैं। इसके

अलावा गांव में नाली, सड़क जैसी सामान्य सुविधाओं की भीषण कमी और बार बार आग्रह

के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होने से भी जो नाराजगी उपजी है, उसका नुकसान नीतीश

कुमार के प्रत्याशी को अगले चुनाव में उठाना पड़ सकता है।

इससे पहले आज तक कोई पत्रकार भी नहीं आया

लोगों से बात करने और उनकी परेशानी समझने के दौरान यह बिल्कुल नई जानकारी

सामने आयी कि आज के पहले कोई पत्रकार भी उनकी परेशानी जानने इस इलाके तक

नहीं पहुंचा था। ग्रामीण इस बात को लेकर भी दुखी थे कि कमसे कम पत्रकारों को भी यहां

का दुख दर्द समझने के लिए आना चाहिए था। अगर पत्रकार आते तो प्रशासन तक भी

गांव की परेशानियां की सूचना पहुंच जाती। आज पहली बार वह खुद भी किसी पत्रकार से

मिलकर हैरान थे।


 

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