आरुषि-हेमराज हत्याकांड में एक बार फिर राजेश और नूपुर तलवार की मुश्किलें बढ़ना तय, Supreme Court में CBI की याचिका पर हरी झंडी

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नई दिल्ली (जेएनएन) : बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में एक बार फिर राजेश और नूपुर तलवार की मुश्किलें बढ़ना तय हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शुक्रवार को हुई सुनवाई में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की याचिका स्वीकार कर ली है।



गौरतलब है, कि तलवार दंपती के घरेलू नौकर हेमराज की पत्नी खुुुमकला और जांच एजेंसी सीबीआइ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा पिछले साल तलवार दंपती को संदेह का लाभ देते हुए रिहा करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके अलावा एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने भी मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई शुरू की और आगे भी एक साथ ही सुनवाई करेगा।

शुक्रवार को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरुषि तलवार और नेपाली मूल के नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में दंत चिकित्सक डॉ. राजेश तलवार और उनकी पत्नी डॉ. नूपुर तलवार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इससे पहले गाजियाबाद की सीबीआइ कोर्ट ने नवंबर 2013 में तलवार दंपती को उनकी बेटी और नौकर की हत्या मामले में आरोपी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनवाई थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा तलवार दंपती को बरी किए जाने के बाद सबसे पहले जनवरी-2018 में नेपाल में रह रही हेमराज की पत्नी खुमकला बंजाडे की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने मामले में अपने पति हेमराज के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग करते हुए अपने लिए इंसाफ की मांग की है। खुमकला बंजाडे के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद सीबीआइ ने भी मार्च-2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट के आदेश पर जेल से रिहा होने के बाद तलवार दंपती नोएडा के सेक्टर-25 जलवायु विहार स्थित आरुषि के नाना के घर पहुंचे थे। यहां मीडिया से बात करते हुए राजेश तलवार ने कहा था कि उन्होंने इंसाफ की इस लड़ाई में बहुत दुख झेला है। इसके अलावा भी उनकी परिवार के लिए जिम्मेदारी है। लिहाजा वह अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे। मालूम हो कि इससे पहले तक तलवार दंपती हमेशा कहते रहे हैं कि वह बेटी आरुषि और हेमराज के हत्यारे को सजा दिलाने और इंसाफ पाने के लिए अंतिम दम तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

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