हिमालय के क्षेत्र में कभी भी आ सकता है बहुत बड़ा भूकंप

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  • कई वैज्ञानिक दलों ने शोध के बाद जारी की पूर्व चेतावनी 

  • वहां बने डैम भी ध्वस्त हो जाएंगे 

  • जमीन के अंदर हो रही है टक्कर

  • छह सौ किलीमीटर का दायरा होगा

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः हिमालय के इलाके में एक बहुत बड़े भूकंप की स्थिति बनी हुई है।

वैसे भी इस इलाके में हमेशा ही भूकंप आते रहते हैं।

लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार जो भूकंप आयेगा उसकी क्षमता बहुत अधिक होगी।

इस बड़े भूकंप से हिमालय के क्षेत्र में भारत और चीन द्वारा बनाये गये बड़े डैम भी ध्वस्त हो सकते हैं।

भूकंप के अलावा इन डैमों के ध्वस्त होने से बहुत बड़े भूभाग तक तबाही का असर भी देखा जाएगा।

भारतीय वैज्ञानिकों के अलावा स्वीडेन एवं कई अन्य देशों के वैज्ञानिकों का कमोबेशी यह निष्कर्ष है।

इनलोगों के मुताबिक यहां बड़ा भूकंप जब आयेगा तो उसकी क्षमता 8.5 मैग्निच्यूट की होगी।

यानी यह एक बहुत बड़ी तबाही लाने वाला भूकंप साबित होगा।

मालूम हो कि वर्ष 2015 में नेपाल में आये भूकंप का स्केल 8.1 था, जिसमें करीब नौ हजार लोग मारे गये थे।

भारतीय वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय के गर्भ में टेक्नोनिक प्लेटों की हलचल लगातार जारी है।

इसी वजह से यह इलाका भूकंप के लिहाज से खतरनाक माना जाता है।

भारतीय उपग्रह कार्टोसेट -1 के आंकड़े भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रहे हैं।

हिमालय के बारे में भारतीय उपग्रह भी संकेत दे रहा है

अमेरिका के कोलाराडो विश्वविद्यालय के एक शोध दल ने पाया है कि नेपाल में वर्ष 2015 में आये भूकंप के बाद भी पृथ्वी के गर्भ में जमा लावा और ऊर्जा पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है।

इसके बार बार ऊपर आने की कोशिशों के क्रम में भी छोटे छोटे भूकंप आते रहते हैं।

वैसे हिमालय में बड़ा भूकंप आने का सीधा अर्थ है कि करीब छह सौ किलोमीटर के इलाके में

इसका प्रत्यक्ष और कई हजार किलोमीटर तक परोक्ष प्रभाव होना है।

ज्यूरिख के वैज्ञानिक मानते हैं कि इस हिमालय के क्षेत्र में जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर तेज होती जा रही है।

जिसका नतीजा होगा कि एक न एक दिन इसमें से कोई एक प्लेट नीचे और दूसरी ऊपर की तरफ आयेगी।

उसी क्रम में बहुत बड़ा भूकंप हमें देखने को मिलेगा।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि पृथ्वी के गर्भ में सात बड़े और कई छोटे छोटे टेक्नोनिक प्लेट हैं।

यह प्लेटें घूमती और आपस में टकराती रहती है।

इसी टकराव की वजह से भूकंप के अलावा ज्वालामुखी विस्फोट भी होता है।

हिमालय के नीचे भी कुछ वैसी ही स्थिति बनी हुई है।

जिस कारण हिमालय के ऊपर बसी आबादी दिनोंदिन खतरे के करीब पहुंच रही है।

इस भूकंप की समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकी है

लेकिन वैज्ञानिक इतना मानते हैं कि अंदर का दबाव इतना अधिक हो गया है कि यह शीघ्र ही ऊपर की तरफ आयेगा।

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