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एक सच्चे स्वयंसेवक और समर्पित कार सेवक खूंटी के स्व सन्तु गोप का हठयोग

  • श्री राम मंदिर के लिए किया था प्रण

  • खूंटी से कारसेवा की टोली में साथ गये थे

  • अटलजी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली चप्पल

  • अटल जी के अंतिम संस्कार के दिन देह त्यागा

अश्विनी कुमार मिश्र


खूंटी : एक सच्चे स्वयंसेवक को यहां के लोगों ने श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर

बहुत याद किया।दरअसल उस दौर में कारसेवा के लिए गये लोगों को जिस किस्म की

परेशानियों का सामना करना पड़ा था, वह भी लोगों को याद था। 

स्व इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाई गई इमरजेंसी का परिणाम था खूंटी में

भाजपा का प्रभुत्व बढ़ना, जो अब तक है। उस वक्त पार्टीयों के कार्यकर्ता निष्ठावान हुआ

करते थे। वैसे ही जनसंघ के एक निष्ठ कार्यकर्ता थे स्व सन्तु गोप,जो भगतसिंह चौक के

निकट आजीवन पान की दुकान चलाते रहे। इमरजेंसी के दमन चक्र ने ऐसा रौंदा उनके

मन को की वह एक अटल प्रतिज्ञा कर बैठे। जब तक अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री

नहीं बनेंगे तब तक मैं नंगे पांव रहूंगा।

एक सच्चे स्वयंसेवक का हठ था नंगे पांव रहना

इसी बीच सन 1992 में खूंटी से अयोध्या जाने वाले कार सेवकों की टोली में स्व सन्तु गोप

भी शामिल हुए। वे अयोध्या गए धुन के पक्के रामभक्त थे। एक हठ योगी, जिन्होंने में

अयोध्या से कार सेवा कर लौटने के बाद से जीवन पर्यंत खूंटी के भगत सिंह चौक स्थित

बजरंग बली मंदिर और गोलंबर में प्रत्येक 6 दिसंबर की शाम को दीप माला सजाते।

अपनी छोटी सी पान की दुकान से कमाए पैसों से लड्डू बांटते और बाबर की निशानी के

ध्वंस का विजयोत्सव मनाते थे। यह दौर वह था, जब देश और राज्य दोनों जगह

रामजन्मभूमि आंदोलन के विरोधियों की सरकार थी। पुलिस-प्रशासन के डर से हर कोई

यहां तक कि संगठन के लोग भी उनसे सहयोग करने से परहेज करते थे। कुछ लोग चोरी

छिपे या दूर रहते हुए कुछ सहयोग कर देते थे। फिर भी एकला चलो रे की तर्ज पर दिवंगत

संतु गोप ने इस सिलसिले को निस्वार्थ भावना से राम की भक्ति में डूबकर 2017 तक

जारी रखा। 1996 में जब अटल जी की सरकार बनी और वे प्रधानमंत्री बने तब शहर के

लोगों, पार्टी कार्यकर्ताओं ने मिलकर उन्हें अपने शपथ की याद दिलाई और उन्हें चप्पल

पहनाया था। इस तरह स्व गोप का एक प्रतिज्ञा पूर्ण हुई।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कड़िया मुंडा उनका सम्मान करते थे

खूंटी के तत्कालीन संसद माननीय कड़िया मुंडा जी उनसे जाकर मिले और शुभकामनाएं

दी थी। लेकिन धुन के पक्के रामभक्त ने एक और भीषण प्रतिज्ञा ले ली जब तक मन्दिर

का निर्माण या शिलान्यास नहीं होगा तब तक नँगे पांव रहूंगा, कहकर फिर से अपने

चप्पल उतार दिए। मैं जब भी उनकी दुकान की ओर जाता बहुत धीमी स्वर में कहते

पण्डित जी मेरे जीते जी मन्दिर बन जायेगा न। हमलोग उन्हें उत्साह वर्धन करते हुए

कहते आप जरूर दर्शन करेंगे राम लला के उनके मन्दिर में। अटल जी के प्रति निष्ठावान

कार्यकर्ता का देहावसान 17 अगस्त 2018 को (अटल की के अंतिम संस्कार के दिन) ही हो

गया। आज यदि वह जीवित होते, तो उनकी खुशी का क्या परवान होता।

जब मेरे मन मे यह स्पष्ट कल्पना आयी तो उनकी मंद मंद मुस्कराती छवि कौंध गयी

और 1975 से अनवरत पार्टी की निष्ठा में समर्पण और “एकला चलो रे” की उनकी नीति

याद आ गयी आज जनभूमि के शिलान्यास पर वह अदना सा कार्यकर्ता जिन्हें कालांतर में

लोग पागल भी समझने लगे। वह सबके ख्यालों से भले ही उतर गया हो, लेकिन निश्चित

रूप से संभवतः कैसा भी कोरोना संक्रमण का खतरा होता आज उस अख्खड़, मस्त मौला

और निस्वार्थ समर्पित अटल राम भक्त को अयोध्या पहुंचने से संभवतः कोई नहीं रोक

सकता था।

आज भूमि पूजन के शुभ अवसर पर श्री राम के परम भक्त और जनसंघ काल से लेकर

भाजपा काल तक के पार्टी के समर्पित निष्ठावान कार्यकर्ता रहे दिवंगत भक्त एवं कार

सेवक संतु गोप आज आपकी आत्मा जहां भी हो भूमिपूजन को देख अवश्य पुलकित हो

रही होगी।


 

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