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सामाजिक दायित्व निर्वहन की अनूठी मिसाल दे गया एक जनजातीय दंपति

  • बेटी की लाश लेकर नेत्रदान करने आये थे अभिभावक

  • दो वंशों को रोशनी दे गयी वंशिका

  • खेलते हुए बॉलकॉनी से गिरी थी बच्ची

  • दो नेत्रहीन अब देख पायेंगे उसकी रोशनी से

संवाददाता

रांचीः सामाजिक दायित्व निर्वहन की अनूठी मिसाल, जिनके दिलों में रोशनी होती है

उनके जीवन में कभी अंधेरा नहीं होता’ इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है गुमला जिले

के चंद्रप्रकाश पन्ना और उनकी धर्मपत्नी सुरेखा पन्ना ने। विगत गुरुवार को तो जैसे

उनके ऊपर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा। सुलेखा, जो एक बैंक में काम करती हैं अपने काम

पर गयी थीं और उनकी दो वर्षीय एकमात्र पुत्री  वंशिका शर्मा, अपने दोस्तों के साथ घर की

बालकनी पर खेल रही थी। अचानक वह किसी प्रकार गिर पड़ी और गंभीर रूप से घायल हो

गई। उसके पिता और माता ने आनन-फानन में एक कार किराए पर ली और 100

किलोमीटर यात्रा कर, उसके बेहतर इलाज के लिए उसे रानी चिल्ड्रन हॉस्पिटल राँची ले

आए। परन्तु दुर्भाग्य से डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तभी इस दंपति ने कुछ

निश्चय किया और बिना मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रतीक्षा किए वे तुरंत अपनी बच्ची को लेकर

कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने अपनी बच्ची की नेत्रों का दान करके उसे

अमर रखना चाहते थे। एक ओर उनकी आंखों में आंसू थे तो दूसरी ओर किसी की अंधी

दुनिया में रोशनी लाने का नायाब सपना भी था। कश्यप मेमोरियल आई बैंक की

निदेशिका डॉ भारती कश्यप, जो एक जानी मानी नेत्र चिकित्सक तथा लब्ध प्रतिष्ठित

और सम्मानित सामाजिक सरोकार सम्पन्न महिला हैं, के लिए यह एक अति विशिष्ट

घटना थी। उन्होंने बताया कि इसके पहले एक पिता ने जब अपनी पुत्री श्रेया का अंतिम

संस्कार करने श्मशान घाट गये थे तो अनायास ही उन्होंने वहीं नेत्रदान का निश्चय किया।

सामाजिक दायित्व निर्वहन की मिसाल विरले ही मिलता है

तब वो उसके नेत्र प्राप्त करने गयी थीं और दूसरी बार ट्रेन से दुर्घटनाग्रस्त हुई नव व्याहता

नेहा बजोरिया का नेत्र प्राप्त करते हुए भी अका मन कसक उठा था, किंतु इस घटना ने तो

उनके अंतस को ही झकझोर कर रख दिया। वाकई सामाजिक दायित्व कि इतनी गहरी

समझ और इतना समर्पण विरले ही देखने को मिलता है जो गुमला की इस आदिवासी

दम्पत्ति ने कर दिखाया। 

 

दंपत्ति की ईच्छा का सम्मान करते हुए कश्यप मेमोरियल आई बैंक की डॉ निधि गडकर

कश्यप ने वंशिका के दोनों नेत्र सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिये तथा इस क्रम में उसके चेहरे

पर कोई विकृति नहीं आने दी।कुछ ही दिनों में दो जरूरतमंद दृष्टिहीनता से ग्रसित मरीजों

को डॉ निधि गडकर कश्यप के द्वारा कॉर्निया का प्रत्यारोपण किया जाएगा। डॉ निधि

गडकर कश्यप नेत्र प्रत्यारोपण में अंतराष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त की हुई हैं और नेत्र

प्रत्यरोपण का विशिष्ट अनुभव रखती हैं।बताते चलें कि श्री चंद्रप्रकाश और सुलेखा पन्ना

को 40 वर्ष की उम्र में यह एकमात्र संतान प्राप्त हुई थी जो अब उनके बीच भले ही नहीं है

लेकिन उस वंशिका ने वंशों को रोशनी की वह सौगात दे दी है जो न सिर्फ उसे बल्कि इस

दंपति को भी हमेशा अमर रखेगी।


 

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