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सुदूर अंतरिक्ष में नजर आया है एक अजीब सा नया ग्रह




  • इस सौर मंडल की तरफ आगे बढ़ रहा है यह पिंड

  • वर्तमान मानव जाति के लिए पहला अवसर होगा

  • छह लाख वर्षों में एक बार यहां से गुजरता होगा

  • सूर्य के करीब आकर धुरी तिरछी हो जाएगी इसकी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सुदूर अंतरिक्ष में घटित होने वाली घटनाओं पर खगोल वैज्ञानिकों की लगातार नजर




रहती है। इसी क्रम में एक छोटे आकार का ग्रह नजर आया है, जो हमारे सौरमंडल की

तरफ तेजी से बढ़ता हुआ आ रहा है। वैसे यह प्रमाणित तथ्य है कि कई ऐसे ग्रह और

उल्कापिंड हैं जो इस सौरमंडल से दूसरे सौरमंडल तक का चक्कर लगाते रहते हैं। इसी

वजह से उनकी गतिविधियों पर खास तौर पर नजर रखी जाती है। इसका असली मकसद

करीब आते उल्कापिंड अथवा ग्रह की धुरी को समझना होता है। कई सौरमंडलों में घूमने

वाले ऐसे पिंडों की धुरी भी अपने हिसाब से बदलती रहती है। इसी क्रम में यह नन्हा ग्रह

आगे बढ़ता हुआ नजर आया है। सुदूर अंतरिक्ष की तरफ से उसके आगे बढ़ने की दिशा का

पता लगने के बाद ही यह माना गया है कि यह हमारी सौरमंडल की तरफ आ रहा है।

लेकिन खगोल वैज्ञानिक इस बात की गणना नहीं कर पाये हैं कि सुदूर अंतरिक्ष से हमारी

सौरमंडल में यह किस धुरी की तरफ आयेगा और कहां से फिर बाहर निकल जाएगा। सुदूर

अंतरिक्ष से इसी तरह अनेक धूमकेतु भी हमारे सौरमंडल में आते रहते हैं। इनमें से कुछ का

समय भी तय है। जिनका नामकरण भी किया गया है। ऐसे पिंडों के गुजरने के बाद

आसमान पर झाड़ू की तरह रोशनी फैलती जाती है। इसी वजह से खुली आंखों से भी उन्हें

देखा जा सकता है। इस रोशनी की भी वैज्ञानिक व्याख्या हो चुकी है। अत्यंत तेज गति से

गुजरने की वजह से वह आस पास मौजूद सौर धुल कणों को आवेशित कर देते हैं। इसी

वजह से यह सारे धूलकण चमकने लगते हैं। लेकिन हर उल्कापिंड ऐसी रोशनी नहीं

फैलाता।

सुदूर अंतरिक्ष से आते ग्रह को मृत ग्रह माना जा रहा है

 

 

सुदूर अंतरिक्ष से इस बार हमारी तरफ आते इस ग्रह के बारे में अब तक जो अनुमान

लगाया गया है, उसके मुताबिक यह छोटा ग्रह शायद छह लाख वर्ष में एक बार इस परिधि

से गुजरता है। यानी सौरमंडलों के बीच से गुजरने की उसकी यही काल सीमा है। वैसे यह

पहले गुजरा था अथवा पहली बार ही इस तरफ आ रहा है, इस बारे में अब तक कोई




जानकारी नहीं है क्योंकि पूर्व के खगोल विज्ञान में इसका कोई उल्लेख नहीं है। अब तक

की जानकारी के मुताबिक इस छोटे से ग्रह के हमारे सौरमंडल की तरफ आने से पृथ्वी को

कोई खतरा नहीं है लेकिन खगोल वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरिक्ष की दूरी

के लिहाज से यह काफी करीब से गुजरेगा। इसके आने जाने के बारे में जो गणना बतायी

गयी है, उसके मुताबिक इससे पहले जब यह क्षुद्र ग्रह इधर से गुजरा होगा उस वक्त धरती

पर मानव जाति का विकास हो रहा था और हमारे पूर्वज नियांडरथॉल्स यहां मौजूद थे।

वर्तमान मानव प्रजाति का विकास ही उसके काफी समय बाद हुआ है। यह हमारे सौरमंडल

के केंद्र में बने सूर्य के 11 अंतरिक्ष मील की दूरी से गुजरेगा, इसी वजह से अंतरिक्ष के

लिहाज से यह काफी कम दूरी होगी। पृथ्वी से सूर्य की दूरी को एक अंतरिक्ष मील माना

जाता है। इसे वैज्ञानिकों ने 2014 यूएन 271 नाम दिया है। इसके आकार के बारे में

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका व्यास 62 से 230 मील के बीच है। अब तक उसके

आगे बढ़ने के आधार पर इसकी दिशा और गति के आधार पर ही सारी गणनाएं की गयी

हैं। उसके आधार पर ही यह माना जा रहा है कि अंतरिक्ष विज्ञान के लिहाज से सुदूर

अंतरिक्ष से आने वाला यह मृत ग्रह काफी करीब से गुजरने वाला है।

सूर्य के करीब आने के बाद तिरछा होकर मुड़ जाएगा

 

इसके गुजरने के दौरान भी हम शायद धूमकेतु की तरह इसका पूछल्ला देख पायेंगे। कई

अन्य धूमकेतुओं के गुजरने में रोशनी का यह खेल हम पहले से भी देखते आये हैं। सुदूर

अंतरिक्ष से आने वाले इस ग्रह के वर्ष 2031 में सूर्य के सबसे करीब होने का अनुमान

लगाया गया है। हैली के धूमकेतु के गुजरने का दृश्य हमारे पास पहले से ही मौजूद है। इस

आने वाले ग्रह के बारे में भी वैज्ञानिक नियमित तौर पर लोगों को जानकारी देने की बात

कह चुके हैं। सबसे अजीब बात यह है कि सूर्य के करीब आने के बाद उसकी धुरी अचानक

से बदल जाएगी और वह तिरछा होते हुए आगे की तरफ हमारे सौरमंडल से बाहर की तरफ

निकल जाएगा।



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