Press "Enter" to skip to content

चालीस चूहों का दल पहुंचा अंतरिक्ष में इंसानों की मदद करने

  • स्पेस एक्स का सात वर्षों में 19वां अंतरिक्ष दौरा
  • तीन टन वजन का माल पहुंचा स्पेस स्टेशन पर
  • इसमें चूहों के अलावा जीवाणु भी भेजे गये हैं
  • लंबी यात्रा के लिए भी सब्जी उगाने की तैयारी
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चालीस चूहों का एक दल अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर

पहुंच गया है। स्पेस एक्स की इस उड़ान में कई अजीब किस्म की

चीजों को भी अंतरिक्ष में भेजा गया है। अंतरिक्ष में स्थापित

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए यह सामान भेजे गये हैं। इनमें

खास तौर पर वहां भेजे गये चूहों की गतिविधियों पर वैज्ञानिकों की

नजर रहेगी। इन चालीस चूहों में जेनेटिक संशोधन किये गये हैं। उन्हें

इन जेनेटिक संशोधनों की वजह से अधिक शक्तिशाली मांसपेशियों

वाला बनाया गया है।

दरअसल अंतरिक्ष में मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़ने वाले प्रभाव के

शोध के लिए ही इन चालीस चूहों को वहां भेजा गया है।  वैसे इस स्पेस

एक्स रॉकेट की इस 19वीं यात्रा में इसमें चूहों के अलावा कीट मारने

वाले जीवाणु और एक स्मार्ट रोबोट भी भेजा गया है । इस स्मार्ट रोबोट

की विशेषता उसकी मजबूत बांह है। इसी बांह के सहारे इस रॉकेट से

अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन तक सारा सामान ढोने का काम भी किया गया

है। इस दौरान दोनों अंतरिक्ष यान पृथ्वी से 260 मील की ऊंचाई पर

साथ साथ उड़ रहे थे। दरअसल दोनों को इस स्मार्ट रोबोट की बांह ने

भी जोड़ रखा था। जो सामान वहां इस बार भेजे गये हैं, उनका कुल

वजन करीब तीन टन है। इसमें सबसे बड़ा दल तो चूहों का ही है। कुल

चालीस चूहे वहां भेजे गये हैं। जेनेटिक संशोधन की वजह से यह सभी

चूहे पृथ्वी पर पाये जाने वाले चूहों के दोगुनी ताकत रखते हैं। उनकी

मांसपेशियां बहुत मजबूत है। इनका उपयोग भी अंतरिक्ष में लंबे समय

तक रहने के दौरान मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़ने वाले प्रभावों की

जांच करना ही है।

चालीस चूहों के साथ साथ 1.20 लाख जीवाणु भी हैं

लेकिन अगर संख्याबल पर देखा जाए तो इस खेप में एक लाख बीस

हजार जीवाणु भी हैं। इन्हें अंतरिक्ष में खेती संबंधी अनुसंधान के लिए

भेजा गया है। वहां कीटनाशकों पर इसके असर को जांचा-परखा

जाएगा। इस स्पेस एक्स रॉकेट का वहां अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन तक

पहुंचना अपने आप में एक नया रिकार्ड है। पिछले सात वर्षों से स्पेस

एक्स रॉकेट का प्रयोग हो रहा है। इन सात वर्षों में वह 19 बार अंतरिक्ष

में भेजा जा चुका है।

एक ही रॉकेट को बार बार अंतरिक्ष में भेजने की तकनीक से वैज्ञानिक

अंतरिक्ष अनुसंधान में राकेट निर्माण और उसकी बाकी लागत को कम

करना चाहते हैं। स्पेस एक्स उस दिशा में कारगर कदम साबित हुआ

है। फॉल्कन 9 की मदद से उसे छोड़ा जा रहा है।

इससे बार बार अंतरिक्ष में नष्ट होने वाले रॉकेट के निर्माण का खर्च

कम होने के साथ साथ अंतरिक्ष में इसका कचड़ा भी कम किया जा रहा

है।

पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं की भी तलाश

चूहों पर वहां होने वाले शोध से जुड़े वैज्ञानिक यह मानते है कि वहां से

मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर पृथ्वी पर भी मांसपेशियों और हड्डी

के रोग के संबंध में नई जानकारी मिल पायेगी। वैसे इस बार की खेप

में पृथ्वी से मिट्टी, पत्थर, वनस्पति, बर्फ और इंसानों द्वारा निर्मित

कई अन्य चीजें भी वहां पहुंचायी गयी है।

इन सभी पर अंतरिक्ष के प्रभाव का असर देखा-परखा जाएगा। यानी

पृथ्वी पर होने वाली खेती, पर्यावरण, एवं जंगल संबंधी तमाम तथ्यों

के अंतरिक्ष में होने वाले विकास को भी परखा जा रहा है। इससे पृथ्वी

पर मौजूदा खामियों को दूर करन के साथ साथ भविष्य में पृथ्वी से

बाहर जीवन बसाने की तैयारियों के आंकड़े मिल पायेंगे। याद रहे कि

इससे पहले ही इजरायल की एक कंपनी की पहल पर अंतरिक्ष स्पेस

स्टेशन पर शाकाहारी मांस भी पैदा किया गया है।

जेनेटिक पद्धति से तैयार मांस की इस विधि को शाकाहारी मांस

इसलिए कहा गया है क्योंकि इसे तैयार करने में किसी प्राणी की हत्या

नहीं की गयी है। इस क्रम में वैज्ञानिक शून्य गुरुत्वाकर्षण की अवस्था

में किस चीज का कैसा विकास होता है, इसे जांच रहे हैं।

इसकी एक वजह लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा के लिए यात्रियों के लिए

भोजन का इंतजाम करना भी है। अगर यान पर ही अंतरिक्ष यात्रियों के

लिए भोजन का विकल्प तैयार किया जा सका तो उन्हें अपनी यात्रा के

लिए अतिरिक्त भोजन का वजन भी साथ नहीं ले जाना पड़ेगा।

Spread the love
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from विज्ञानMore posts in विज्ञान »

4 Comments

... ... ...
error: Content is protected !!
Exit mobile version