अंतरिक्ष से आ रहे 72 नये रेडियो तरंगों की पहचान हुई तीस करोड़ प्रकाश वर्ष दूर से संदेश

अंतरिक्ष से आ रहे 72 नये रेडियो तरंगों की पहचान हुई
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  • दूसरी वजह भी हो सकती है रेडियो संदेशों की

  • अत्यंत तीव्र गति के संदेशों में अलग अलग तरंग

  • नियमित और नियंत्रित अंतराल में आते हैं ऐसे संदेश

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः अंतरिक्ष से लगातार नये नये रेडियो संदेश पृथ्वी तक आ रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने इन रेडियो संदेशों को पकड़ने का तो काम किया है।

लेकिन इन संदेशों का मर्म उनकी समझ से बाहर है।

इसलिए अभी इन तमाम रेडियो संदेशों में अगर कोई संदेश छिपा है

तो उसे समझने के लिए कंप्यूटर की मदद भी ली जा रही है।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में यह काम तेज हुआ है।

यहां के एस्ट्रोनॉमी विभाग में एक नई परियोजना पर काम प्रारंभ किया गया है।

इस परियोजना का मुख्य काम हाल में अंतरिक्ष से आये नये 72 रेडियो संदेशों को पहचानने और समझना है।

अब तक सिर्फ यह पता चल पाया है कि यह रेडियो संदेश किसी अज्ञात स्थान से भेजे जा रहे हैं।

यह स्थान पहचान में नहीं होने के बाद भी पृथ्वी से करीब तीस करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

वैज्ञानिक इन रेडियो संदेशों के बारे में पक्के तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।

शोध से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतरिक्ष में अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय तरंगों के वहां के गैसों के बीच से गुजरने के दौरान भी ऐसे रेडियो संदेश उत्पन्न हो सकते हैं।

कई बार ब्लैक होल के अंदर प्रवेश करते तारे के विखंडित होने के दौरान भी ऐसा हो सकता है।

वैसे वैज्ञानिक इस संभावना से भी इंकार नहीं करते कि किसी बहुत दूर के इलाके में कोई अत्यंत विकसित प्रजाति इन रेडियो संदेशों को पृथ्वी तक भेज रही है।

इसी वजह से अब शक्तिशाली कंप्यूटरों की मदद से से इन संदेशों में छिपी किसी संकेत की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

अंतरिक्ष से ऐसे रेडियो संदेश नियमित पहुंच रहे हैं

अब तक सिर्फ इतना पता चल पाया है कि एक नियमित अंतराल में यह रेडियो संदेश पृथ्वी तक पहुंच रहे हैं।

इसकी अवधि नियमित और अंतराल नियंत्रित होने की वजह से ऐसे संदेशों को और गहराई से समझने की जरूरत महसूस की जा रही है।

जिस स्थान से यह रेडियो संदेश नियमित तौर पर आ रहा है, उसे एफआरबी121102 बताया गया है।

अत्यंत तीव्र गति के इन रेडियो संदेशों की वजह से ही वैज्ञानिकों का ध्यान इसकी तरफ ज्यादा आकृष्ट हुआ है।

इस शोध से जुड़े विशाल गज्जर ने बताया कि 26 अगस्त 2017 को एक साथ 21 ऐसे संदेश रिकार्ड किये गये थे।

कंप्यूटर पर इन रेडियो संदेशों को संरक्षित करने में 400 टेराबाइट डाटा लगा था।

अत्यंत तीव्र गति से रेडियो संदेशों को कंप्यूटर आकार इतना अधिक होने की वजह से भी इसकी गहराई में जाने की जरूरत महसूस की गयी है।

पांच घंटे में उस एक स्थान से लगातार एक ही किस्म के 21 संदेश भेजे गये थे।

प्रारंभिक विश्लेषण से यह पता चला है कि इन रेडियो संदेशों में अलग अलग ध्वनि तरंग हैं,

जिनका विश्लेषण करने की कोशिशें जारी है।

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