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6.7 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग से 72 किलोमीटर की दूरी घटी




ओबुरावारीपल्लीः 6.7 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग ने रेलवे परिवहन की दूरी कम की है।

इससे परिवहन का खर्च भी कम होने की उम्मीद है।

दक्षिण मध्य रेलवे के गुंटकल रेल डिविजन पर बनी नयी ओबुरावारीपल्ली-वेंकटचलम् रेल लाइन से

ओबुरावारापल्ली और कृष्णपत्तनम् बंदरगाह के बीच की दूरी 72 किलोमीटर घट गयी है

जिससे निर्यात बढ़ने तथा सीमेंट और उर्वरकों के सस्ता होने की उम्मीद है।

चेरलोपल्ली और रापुर स्टेशनों के बीच कुल 437 करोड़ रुपये की लागत से तैयार

6660 मीटर लंबी सुरंग के कारण इस नयी रेल लाइन का निर्माण संभव हो सका है।

यह देश की सबसे लंबी विद्युतिकृत सुरंग है।

इसके पास ही 980 मीटर लंबी एक और सुरंग है जिसे बनाने में 60 करोड़ रुपये की लागत आयी है।

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने गत 01 सितंबर को वेंकटचलम्-ओबुरावारीपल्ली रेल लाइन का उद्घाटन किया था।

गुंटकल डिविजन के डिविजनल प्रबंधक आलोक तिवारी ने बताया कि

नयी रेल लाइन के बनने से कृष्णपत्तनम् बंदरगाह से ओबुरावारीपल्ली की दूरी 72 किलोमीटर कम हो गयी है।

दूरी कम होने से माल ढुलाई पर कंपनियों की लागत कम हुई है जिसका लाभ आम लोगों को मिलने के साथ ही भारतीय निर्यात भी प्रतिस्पर्धी होगा।

कृष्णपत्तनम् बंदरगाह से आयातित माल जिनकी ओबुरावारीपल्ली के रास्ते ढुलाई की जाती है,

उनमें लौह अयस्क, कोयला और चूना पत्थर जैसे कच्चे माल तथा उर्वरक प्रमुख हैं।

वहीं, इस रास्ते निर्यात के लिए जाने वाले उत्पादों में सीमेंट, ग्रेनाइट और क्रैंकर मुख्य हैं।

कृष्णपत्तनम् बंदरगाह की वेबसाइट से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, आयात-निर्यात के लिए बंदरगाह पर

रेल मार्ग से माल की आवाजाही वित्त वर्ष 2018-19 में 57.55 प्रतिशत बढ़कर 198.2 लाख टन पर पहुँच गयी।

वृद्धि की इस रफ्तार को देखते हुये बढ़ती माँग पूरी करने के लिए अलग रेल मार्ग बेहद जरूरी था।

6.7 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग से पहले घूमकर जाना पड़ता था

श्री तिवारी ने बताया कि पहले ओबुरावारीपल्ली से कृष्णपत्तनम् जाने के लिए रेनिगुंटा और वेंकटचलम् होकर जाना पड़ता था।

अब ओबुरावारीपल्ली से वेंकटचलम् तक सीधी रेल लाइन बन जाने से समय के साथ धन की भी बचत होगी।

कृष्णपत्तनम् बंदरगाह से आने वाली रेल लाइन वेंकटचलम् पर हावड़ा-चेन्नई रेल मार्ग से जुड़ती है।

उन्होंने बताया कि ओबुरावारीपल्ली और वेंकटचलम् के बीच सभी मालगाड़यिों को अब नये मार्ग से भेजा जा रहा है।

इससे दोनों स्टेशनों के बीच आवागमन के लिए लगने वाला समय 10 घंटे से कम होकर पाँच घंटे रह गया है।

कंपनियों को माल ढुलाई पर प्रति रैक औसतन 7.5 लाख रुपये की बचत हो रही है।

उम्मीद है कि कंपनियाँ इसका लाभ अपने ग्राहकों को देंगी।

साथ ही निर्यातित उत्पादों की परिवहन लागत कम होने से वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।

ओबुरावारीपल्ली-वेंकटचलम् रेल लाइन का निर्माण करने वाली कंपनी रेल विकास निगम के मुख्य परियोजना अधिकारी वी.के. रेड्डी ने बताया कि पूरी लाइन के निर्माण पर 1993 करोड़ रुपये की लागत आयी है।

इसमें सुरंग का निर्माण सबसे बड़ी चुनौती थी।

कई जगह तो सुरंग जमीन से मात्र 4.9 मीटर नीचे बनाया जाना था जिससे पूरी जमीन धँसने का भी खतरा रहता है।

इसे घोड़े की नाल की शक्ल में बनाया गया है जो सबसे मजबूत ढाँचा माना जाता है।

इसमें चौबीसो घंटे बिजली की व्यवस्था के लिए ओवरहेड तार से कनेक्शन लिया गया है।

हर 10 मीटर पर एलईडी लाइट लगायी गयी है।

जनवरी 2016 में इसका काम शुरू किया गया और तय समय से पहले 43 महीने में पूरा कर लिया गया है।

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