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पटना के मौर्या मोटर्स का नया कारनामा बना लिया 42 फर्जी पास

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पटना : पटना के मौर्या मोटर्स ने लाकडाउन अवधि में जिला प्रशासन द्वारा निर्गत पास




का फार्म हासिल कर अपनी कंपनी के कर्मचारियों के दफ्तर आने जाने के लिए 42 पास

बना लिया और दफ्तर खोल कर कोरोना को दावत दे रहे हैं। सुत्र बताते हैं कि जिनके नाम

से पास है अगर वे दफ्तर नहीं आते हैं तो उसकी सैलरी भी कटेगी। गौरतलब है कि कोरोना

की दूसरी लहर को लेकर देश एक गंभीर हालात की चुनौती का सामना कर रहा है।

आक्सीजन, वेंटिलेटर के अभाव में हजारों की तादाद में लोगों की मौत हो चुकी है। अपनी

जिंदगी गंवाने वाले आम लोगों से लेकर कई नामचीन हस्तियाँ भी है। शमसानों में लम्बी

कतार में लाशें जलाने का मंजर पुरे देश ने देखा है। कोरोना की दुसरी लहर की आँच अभी

ठंडी भी नहीं हुई कि कोरोना के तीसरी लहर को लेकर सरकार और लोग अभी से आशंकित

है। कोरोना के केस कैसे कम हो इसको लेकर राज्य सरकारों ने अपने अपने हिसाब से

लाकडाउन लागू कर रखा है। बिहार सरकार ने भी लाकडाउन लागू कर रखा है जिसकी

अवधि 25 मई तक है। राज्य सरकार ने इसको लेकर गाईडलाईन जारी कर रखा है।

पटना के मौर्या मोटर्स ने पासों में क्रमांक संख्या 25 ही लिखा हुआ है

गाईडलाईन के अनुसार सरकारी और गैरसरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान पूर्णरुपेण बंद




रखने का फरमान जारी किया गया है और इसको सख्ती से पालन करने के लिए डीएम

और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की आंखों में

धुल झोंकते हुए टाटा मोटर्स के व्यवसायिक वाहनों के डीलरशिप पटना स्थित मौर्या

मोटर्स लिमिटेड के प्रवंधकों ने अपने कर्मचारियों को कार्यालय आने जाने के लिए

तकरीबन 42 पास निर्गत कर लिया। हैरानी की बात यह है कि सभी पासों में क्रमांक संख्या

25 ही लिखा हुआ है और कर्मचारियों के लिए सुबह 9 बजे से शाम के 7 बजे तक का समय

अंकित है। पास पर महाप्रबंधक का मुहर भी लगा है लेकिन कौन से विभाग के महाप्रबंधक

है। सुत्र बताते हैं कि मुहर इतना शातिराना अंदाज में मारा गया है कि यह स्पष्ट नहीं हो

रहा कि महाप्रबंधक का विभाग क्या है। सरकार ने किसी भी संस्थानों के लिए 8 घंटे काम

करने का प्रावधान है ऐसे में राजधानी पटना स्थित मौर्या मोटर्स को जारी पास में 11 घंटे

काम करने का समय लिखा है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि इन कंपनियों के

क्रियाकलापों से सरकार और प्रशासन को समय समय पर भारी फजीहत का सामना करना

पड़ता है और सरकार और प्रशासन की सारी मेहनत बेकार चली जाती है।



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