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असम के धुबरी जिला से 25 बांग्लादेशियों को अदालत ने रिहा कर दिया

  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने किया था अनुरोध

  • राजदूत के माध्यम से किया था अनुरोध

  • मोदी ने राज्य सरकार को दिया था निर्देश

  • पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के धुबरी जिले की एक अदालत ने 25 बांग्लादेशी नागरिकों को रिहा करने

का आदेश दिया है। यह सभी लोग गत मई महीने से जेल में बंद थे। वीजा की शर्तों को

तोड़ने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना

सरकार ने उन्हें घर लाने की पहल की और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें रिहा

करने का अनुरोध किया था। बांग्लादेश-इंडिया बॉर्डर विक्टिम रेस्क्यू कमेटी के संयोजक

अब्राहम लिंगकोन ने कहा कि इस मामले में प्रगति बांग्लादेश के एक अनुरोध के बाद

देखने को मिला है। उल्लेख करें कि, भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी से संदेश देने के लिए इस महीने के अंतिम सप्ताह में ढाका में बांग्लादेश की

प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की। इस समय में बांग्लादेश के प्रधान मंत्री ने भारत

से 25 बांग्लादेशी नागरिकों को रिहा करने का अनुरोध किया था, जो मई से जेल में बंद हैं।

उसके बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी असम सरकार को निर्देश दिया है कि असम पुलिस ने

वीजा उल्लंघन मामले में जो 25 बांग्लादेशियों की गिरफ्तार किया है, वह मामला वापस ले

लिया जाए । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्देश तथा बांग्लादेश सरकार के अनुरोध का

जवाब देते हुए, असम पुलिस ने 25 बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ मामला वापस लेने

का फैसला किया। दूसरी ओर, लिंगकोन ने गुवाहाटी में बांग्लादेश के सहायक उच्चायुक्त

तनवीर मंसूर के हवाले से कहा कि धुबरी की एक अदालत ने शनिवार को 25 बांग्लादेशी

नागरिकों के खिलाफ लगे आरोप हटा दिए और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।

असम के धुबरी जिला में वीजा उल्लंघन में पकड़े गये थे सभी

कुरीग्राम की चिलमारी उपजिला के रहने वाले ये नागरिक पर्यटक वीजा पर भारत गए थे,

लेकिन मछुआरों और कृषि श्रमिकों के रूप में काम कर रहे थे। भारतीय पुलिस ने 3 मई को

असम के धुबरी से 26 बांग्लादेशी नागरिकों को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे

अपने घर जा रहे थे। चंग्रबंधा पोस्ट के माध्यम से बांग्लादेश में प्रवेश करने का उनका

इरादा था। पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया और आरोप लगाया कि उन्होंने

वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया है, क्योंकि उनका वीजा उन्हें काम करने की अनुमति

नहीं देता है। तब से वे जेल में थे जबकि उनमें से एक की गत 1 जुलाई को मौत भी हो गई।

इस बीच,बार-बार बांग्लादेश के अधिकारियों ने उन्हें घर लाने की पहल की और भारत से

उन्हें रिहा करने का अनुरोध किया था।


 

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