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चुनाव निपटा तो बकोरिया कांड की गाड़ी बढ़ने लगी आगे




  • डीजीपी सहित अनेक लोगों से होगी पूछ ताछ

  • सीबीआइ ने तैयार की 41 लोगों की सूची

  • प्रारंभ से ही इस घटना पर उठ रहे हैं सवाल

संवाददाता

रांची: चुनाव निपटा तो अपने आप ही बकोरिया कांड की गाड़ी आगे बढ़ती हुई नजर आने लगी है।

यह कांड झारखंड पुलिस के अनेक अफसरों के लिए सरदर्द साबित हो सकता है।

प्रारंभ से ही पुलिस द्वारा नक्सलियों को मार गिराने का यह दावा संदेह के घेरे में है।

अनेक गैर सरकारी संगठनों ने अपनी जांच में इसे पूरे प्रकरण में पुलिस के दावे को झूठ बताते हुए

इसे साफ तौर पर ग्रामीणों की हत्या का मामला बताया है।

याद दिला दें कि पलामू के सतबरवा स्थित बकोरिया में 8 जून 2015 की रात कथित नक्सली

मुठभेड़ में मारे गए 12 लोगों के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है।

सीबीआई बकोरिया कांड के मृतकों के आश्रितों सहित 41 लोगों से पूछताछ करेगी।

इसकी सूची बना ली गई है। वहीं सीबीआई डीजीपी और एडीजी सहित एक दर्जन से ज्यादा

शीर्ष पुलिस अफसरों से भी बकोरिया कांड का सच जानेगी।

इस मामले में अब तक 20 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

जिन लोगों से पूछताछ होगी, उनमें से कुछ लोग गवाह बनने को भी तैयार हैं।

उल्लेखनीय है कि झारखंड पुलिस और राज्य सरकार इस मामले की लीपा पोती में एड़ी चोटी का

जोर लगा चुकी थी।

अदालत के निर्देश पर हो रही है सीबीआइ जांच

उच्च न्यायालय से इस मामले की सीबीआइ जांच की अनुशंसा होने की वजह से यह पूरा मामला नये सिरे से चर्चा में आ गया है।

दूसरी तरफ घटना के बाद से ही झारखंड पुलिस के एडीजी रेजी डुंगडुंग सहित कई अफसरों ने इसे

पुलिस की तरफ से गलत कार्रवाई माना था।

चर्चा है कि इसी मामले की जांच की गाड़ी आगे बढ़ाने की वजह से एमवी राव को आनन फानन में

यहां से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।

वैसे कुछ लोग मानते हैं कि एमवी राव वनाम डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी अनुराग गुप्ता के

विवाद की मूल वजह कुछ और ही थी।

चुनाव निपटा तो अफसरों को नोटिस भेजने की तैयारी

सीबीआई इन पुलिस अफसरों को नोटिस भेजेगी। इसके माध्यम से पूछताछ की तिथि,

स्थान और समय की जानकारी देगी। सीबीआई पुलिस विभाग के वरीय अफसरों से उनके

कार्यालय जाकर या अपने कार्यालय बुलाकर पूछताछ करेगी।

पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई अनुसंधान रिपोर्ट झारखंड हाईकोर्ट में सौपेगी।

मृतक के परिजनों ने सीबीआई को बताया है कि उन्हें समझौता करने के लिए 20 लाख रुपए का ऑफर मिला था।

ऑफर देने वाले रहीश अंसारी ने खुद को सतबरवा के तत्कालीन थानेदार रूस्तम अंसारी का करीबी बताया था।

उसने अपना पता पांकी के नौडीहा में बताया था।

इसकी जानकारी मुठभेड़ में मारे गए लातेहार के पारा टीचर उदय यादव के पिता जवाहर यादव

लिखित रूप में पहले भी एडीजी एमवी राव को दे चुके हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआइ की पूछताछ की सूची में

डीजीपी डीके पांडेय, एडीजी एमवी राव, एडीजी अनुराग गुप्ता, एडीजी अजय कुमार सिंह, एडीजी प्रशांत सिंह,

एसपी सुनील भास्कर, तत्कालीन आईजी ए नटराजन, तत्कालीन डीआईजी हेमंत टोप्पो, तत्कालीन

कोबरा बटालियन के कमांडेंट कमलेश कुमार, तत्कालीन एसपी मयूर पटेल कन्हैयालाल,

लातेहार के तत्कालीन एसपी अजय लिंडा, सतबरवा तत्कालीन ओपी प्रभारी रूस्तम,

पलामू के तत्कालीन सदर थानेदार हरीश पाठक शामिल हैं।

सीबीआइ ने पहले ही अफसरों का मोबाइल लोकेशन हासिल किया है

जिनसे पूछताछ होनी है, सीबीआई ने ऐसे लोगों के मोबाइल का सीडीआर निकाला है।

ताकि पता चले कि घटना के समय किसके मोबाइल का लोकेशन क्या था।

चुनाव निपटा तो बाहार आये सीबीआइ की प्रारंभिक जांंच के तथ्य भी।

क्योंकि सीबीआई को पता चला है कि खुद को मौके पर बताने वाले

कई अफसरों का मोबाइल लोकेशन अन्य स्थान पर मिला है।

पलामू के तत्कालीन डीआईजी हेमंत टोप्पो ने सीबीआई को बताया है कि

उस रात तीन बजे डीजीपी डीके पांडेय का फोन आया डीजीपी बोले कि सतबरवा कहां है, वहां कुछ हुआ है।

उन्होंने पलामू एसपी मयूर पटेल कन्हैयालाल से जानकारी मांगी तो एसपी को भी जानकारी नहीं थी।

अब तक की पूछताछ में सीबीआई को कई जानकारियां मिली हैं।

पूछताछ के दौरान अफसरों ने कई जानकारियां अलग-अलग दी हैं।

ऐसे अफसरों से सीबीआई आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ करेगी।

इन्हें भी जल्द नोटिस भेजा जाएगा।



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