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रोबोट अब ऊंची दीवारों पर भी आसानी से चढ़ सकेगा




  • जोंक की हरकतों पर आधारित है पद्धति

  • ऊंचाई के खतरनाक कामों में काफी मदद

  • लचीली नलियों से जुड़े है रोबोट के दोनो हिस्से

  • एक दीवार से दूसरी दीवार तक जा सकता है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः रोबोट को किसी खड़े दीवार पर चढ़ाना कोई आसान काम नहीं था।

वैज्ञानिकों ने जोंक जैसे जीवों के ऊपर चढ़ने की विशेषताओं का अध्ययन कर एक ऐसा रोबोट तैयार कर लिया है।

रोबोट कैसे दीवार पर चढ़ेगा देखिये वीडियो

परीक्षण में इस रोबोट के सफल होने के बाद उसे तकनीकी तौर पर और कुशल बनाने का काम चल रहा है।

इस रोबोट के नियमित इस्तेमाल से खास तौर पर काफी ऊंचाई वाले इलाकों में इंसानों के लिए यह कारगर मशीन साबित होगा।

सामान्य तौर पर ऊंची इमारतों पर बाहर से मरम्मत अथवा सफाई का काम करने वाले मजदूरों को

जितना खतरा होता है अथवा समय लगता है, यह रोबोट दोनों की कम कर देगा।

साथ ही कई किस्म के बचाव कार्य में भी यह रोबोट इंसान का काम आसान और अधिक सुरक्षित कर देगा।

जोंक जैसे जीव किसी भी ऊंचाई तक चढ़ जाते हैं।

इसे गौर करने के बाद वैज्ञानिकों ने दीवार पर चढ़ने की क्षमता विकसित करने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया।

रोबोट की संरचना को और बेहतर बनाने काम जारी

जोंक की हरकतों को नकल करता दीवार पर चढ़ सकता है यह रोबोट भी अपनी संरचना को

सुधारने के बाद पूरी दुनिया में इस्तेमाल किये जाने के लिए तैयार होगा।

जापान की तोयोशी विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय की टीम ने इसे तैयार किया है।

इसे जोंक का अंग्रेजी नाम लीच दिया गया है।

इस अंग्रेजी शब्द लीच में (लांगिट्यूडिनली इक्सटेंशबल कंटिनम, रोबोट इंस्पायर्ड बाई हिरूडिनिया) है।

इसे तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने नहाने के शॉवर और दो सोख सकने की क्षमता युक्त कपों का इस्तेमाल किया है।

इस काम को प्रारंभ करने के दौरान सिर्फ दीवार पर ऊंचाई तक इस रोबोट को पहुंचाने का काम बहुत आसान था।

वैज्ञानिकों की सोच में यह बात आयी कि दीवार पर चढ़ते वक्त कोई अवरोध अगर आया तो उससे यह रोबोट कैसे निपटेगा।

इसे सुनिश्चित करने के लिए नये उपाय करने पड़े। मसलन ऊपर चढ़ने के दौरान सामने

उबड़ खाबड़ स्थान आने अथवा एक दीवार के छोर से दूसरे छोर की तरफ जाने का काम

किसी रोबोट के लिए आसान नहीं होता। इसलिए इसमें नये संशोधन किये गये हैं।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक आयातो कनादा ने कहा कि इस स्थिति को सुधारने का ख्याल

मुझे अपने बाथरूम में किया।

वहां के शॉवर को देखकर इसे सुधारने की तकनीक को सोचा गया।

उन्होंने कहा कि जब बिना पकड़े शॉवर को पूरा खोल दिया गया तो वह अपने आप ही किसी सांप की तरह लहराने लगा मानों उसमें जीवन आ गया है।

बॉथरूम के शॉवर की हरकत देख दिमाग में आया आइडिया

उसे पकड़कर नियंत्रित करते ही सारा कुछ ठीक हो गया।

इसी सोच से रोबोट में भी नये उपाय किये गये।

इस मशीन के ऊपर चढ़ने की क्षमता के लिए जोंक जैसे प्राणियों के ऊपर चढ़ने की पद्धति को देखा गया।

जोंक जैसे जीव पेड़ पर ऊपर चढ़ने के लिए दो हिस्सों में काम करते हैं।

एक हिस्सा ऊपर जाकर चिपक जाता है तो दूसरा हिस्सा नीचे से ऊसे ऊपर धकेल देता  है।

ऊपर पहुंचने के बाद ऊपर का हिस्सा फिर से और ऊपर जाकर चिपकता है।

इसी तरीके से यह जीव ऊपर चढ़ते जाते हैं। इसी पद्धति पर रोबोट में भी दो सक्शन (सोख सकने वाले) कपों का इस्तेमाल किया गया है।

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि वजन में बहुत हल्के होने की वजह से ये जीव अगर काफी ऊंचाई से गिरते भी हैं तो उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं होता।

इसलिए प्रस्तावित रोबोट को भी वजन में हल्का बनाने की बात चली।

इस रोबोट में जो सामान इस्तेमाल किये गये हैं, वे आम तौर पर घरेलू उपयोग की वस्तुएं ही हैं।

रोबोट में लचीले ट्यूब लगाये गये हैं ताकि यह ऊपर नीचे आसानी से चढ़ सके।

इस ट्यूब को ही दोनों हिस्से के सोखने की क्षमता वाले कपों से जोड़ गया है।

रोबोट के ऊपर का कप जब सतह से चिपक जाता है तो नीचे का कप संकेत पाकर ऊपर की तरफ खिसकता है।

इस तरीके से इसके ऊपर जाने का क्रम चलता रहता है।

नली के लचीला होने की वजह से यह दोनों हिस्सों के बीच मुड़ भी सकता है।

इससे एक दीवार से दूसरी दीवार तक जाने में इसे कोई परेशानी नहीं होती।

अनुमान है कि शीघ्र ही इसका परिष्कृत संस्करण भी बाजार में उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।

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