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समुद्र की कई मछलियां घूप अंधेरे में भी देख सकती हैं




  • डेढ़ किलोमीटर की गहराई में नजर बिल्कुल स्पष्ट

  • घने अंधेरे में रंगों को भी पहचान लेती हैं

  • डेढ़ किलोमीटर नीचे नहीं हैं कोई रोशनी

  • इनकी आंखों में दो किस्म का इंतजाम

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः समुद्र की कई मछलियां एक नये गुण से लैश है।

यूं तो समंदर के अनेक रहस्य धीरे धीरे हमारी जानकारी में आ रहे हैं।

अब यह पता चला है कि वहां कई प्रजाति की मछलियां हैं, जो रात के अंधेरे में भी साफ साफ देख सकती हैं।

वैज्ञानिक परीक्षणों में इसकी पुष्टि होने के बाद अब इन मछलियों की जेनेटिक विशेषताओं का पता लगाया जा रहा है।

गहरे समुद्र की इन खास प्रजाति की मछलियों ने शिकार के लिए यह विशेष गुण छिपा रखे हैं।

इस विषय पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्रयोग के तौर पर

मछलियों के 101 जिनोम के नमूने एकत्रित किये गये थे।

इनका फिलहाल विश्लेषण चल रहा है।

परीक्षण में इस बात की पुष्ट हुई है कि घने अंधेरे में देखने की क्षमता रखने वाली

मछली करीब डेढ़ किलोमीटर दूर तक देख पाती है।

समुद्र की गहराई में इतनी दूरी तक घने अंधेरे में देख पाने की क्षमताओं का असली कारणों का पता लगाने की वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं।

फिलहाल इस किस्म की क्षमता रखने वाले मछलियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

परीक्षण के दौरान यह पाया गया है कि इन मछलियों की यह क्षमता उन्हें अपने शिकार

के साथ साथ किसी और तरफ घात लगाये बैठे किसी अन्य मछली के बारे में भी आगाह करता रहता है।

इस पैनी नजर की वजह से मछलियां इस बात के लिए सतर्क रहती है कि

अपना शिकार तलाशने के क्रम में वह किसी अन्य के हत्थे ना चढ़ जाए।

समुद्र की कई मछलियां रंगों को कैसे पहचानती हैं, यह भी शोध का विषय

वैज्ञानिक इस विषय के शोध को इसलिए भी आगे बढ़ा रहे हैं क्योंकि पूर्व में यह माना जाता था कि

समुद्र के अंदर अथवा कम रोशनी में इंसान के साथ साथ इस श्रेणी के पशु मछली भी

रंगों की पहचान नहीं कर पाते हैं।

अब मछलियों के घने अंधेरे में देख पाने की क्षमता में यह भी पता चला है कि

उनमें रंगों की पहचान करने का भी गुण होता है।

अब मछलियों को यह गुण कैसे प्राप्त है, इसके लिए जीन श्रृंखला की जांच की जा रही है।

प्राग के चार्ल्स विश्वविद्यालय के जीव विज्ञानी जुजाना मुसिलोवा ने बताया कि मछलियों की आंखों की संरचना ही बेहतर नजर रखने के लिए होती हैं।

अब अगर उनमें अंधेरे में भी देख पाने की क्षमता है तो यह माना जाना चाहिए कि इन आंखों के अंदर देखने के लिए दो तरफ से फोटो रिसेप्टर सेल काम करते हैं।

इनमें से एक सामान्य रोशनी में काम करता है जिसे कोन कहा जाता है।

दूसरे को रॉड कहते हैं तो कम रोशनी के दौरान सक्रिय रहता है।

इस शोध के आगे  बढ़ाते हुए वैज्ञानिकों ने पाया है कि अंधेरे में देखने के काम आने वाले फोटो रिसेप्टर में एक ही फोटो पिगमैंट होता है, जो रोशनी के खास तरंग पर प्रतिक्रिया करती है।

अब तक 13 ऐसी प्रजातियों का पता चला है जो गहरे समुद्र में रहती है।

ये अंधेरे में भी रंगों की पहचान करती है।

शोध के दौरान समुद्र में पायी जाने वाली सिल्वर स्पिनीफीन में रोडोस्पिन जीन के 38 संकेत पाये गये हैं।

इनका बारी बारी से अध्ययन किया जा रहा है।

समुद्र की गहराई में नहीं पहुंचती सूरज की रोशनी

वैज्ञानिकों ने बताया है कि समुद्र में आस पास के वातावरण और सूर्य की रोशन  करीब छह सौ मीटर तक पहुंचती है।

इसके बाद से यह धीमा पड़ने लगती है।

अधिक गहराई में तो रोशनी का कोई नामोंनिशा नहीं होता।

उसके नीचे के अंधेरे में अलग अलग प्रजाति की मछलियों की पहचान तो उसकी बनावट और रंगों से ही होती है।

ऐसे में तय है कि अपने इसी गुण की वजह से कई प्रजाति की मछलियां साफ साफ देख पाती हैं।

कुछ मछली ने इस गुण के साथ साथ अंधेरे में रोशनी पैदा कर शिकार को ललचाने का काम भी करते हैं।




एंगलफिश इसमें प्रमुख है, जो अपने शिकार को फांसने के लिए अपने सर के ऊपर रोशनी का एक केंद्र पैदा कर लेता है।

मछलियां इस रोशनी की तरफ आकृष्ट होकर उसके जाल में फंस जाती है।

वैज्ञानिकों ने समुद्र की कई मछलियां की जांच में  के इस गुण की पहचान करने के लिए

समुद्र के अंदर करीब डेढ़ किलोमीटर की गहराई में प्रयोग किये हैं।

अलग अलग किस्म के प्रतिक्रिया देने वाली मछलियों की प्रजाति को इसी वजह से घने अंधेरे में देख पाने में सक्षम तीन अलग अलग प्रजातियों में बांटा गया है।

अब उनके जीनों की गहन परीक्षण से ही पता चल पायेगा कि किस वजह से मछलियों को यह गुण प्राप्त है।

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