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प्लास्टिक दुनिया में प्रदूषण का खतरा लेकिन अब आगे नहीं




दुनिया को मिल जाएगा एक बहुत बड़ी समस्या से छुटकारा

  • दुनिया के पर्यावरण का सबसे बड़ा खतरा प्लास्टिक
  • इसे दोबारा इस्तेमाल के लिए नहीं बनाया गया था
  • जमीन के साथ साथ पानी को भी कर रहा प्रदूषित

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः प्लास्टिक इस दुनिया में फिलहाल सबसे बड़ा प्रदूषण का कारण है।

इसी प्लास्टिक की वजह से जमीन के साथ साथ समुद्री और जल जीवन तक प्रभावित हो रहा है।

अनेक इलाकों में प्लास्टिक का पहाड़ इलाकों को बंजर बना चुका है।

वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक की इस समस्या के निराकरण की नई तकनीक खोज ली है।

इस तकनीक के तहत प्लास्टिक को नये सिरे से इस्तेमाल में लाया जाता रहेगा।

इसके इस्तेमाल होने की वजह से उससे बने किसी भी सामान को लोग जहां तहां नहीं फेंकेगे।

इससे प्रदूषण का खतरा अपने आप ही कम हो जाएगा।

दरअसल जब प्लास्टिक का निर्माण प्रयोगशालाओं में किया गया था तो इसे दुनिया के लिए बहुत काम की चीज समझा गया।

बाद में जैसे जैसे प्लास्टिक का कचड़ा दुनिया में फैलने लगे, इसके खतरे से भी लोग वाकिफ होते चले गये।

अब तो अनेक इलाकों में सिर्फ प्लास्टिक की वजह से ही पर्यावरण तक बिगड़ रहा है।

प्लास्टिक ने अभी दुनिया में तबाही मचा रखी है

हिमालय सहित अनेक ऊंचे पर्यटन स्थलों पर अब प्लास्टिक ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

प्लास्टिक का निर्माण दरअसल उसके दोबारा इस्तेमाल के लिए किया नहीं गया था।

अब वक्त और दुनिया की मजबूरी है कि इस दिशा में नये अनुसंधान हुए हैं और उसके बेहतर नतीजे सामने आये हैं।

प्लास्टिक का पहला चरण बेकेलाइट का है। वर्ष 1909 में इसे लिओ बेकेलैंड ने तैयार किया था।

उस वक्त यह दुनिया का पहला सिंथेटिक था।

बाद में यह प्रयोग में लोगों के काम आने की वजह से प्लास्टिक में तब्दील हो गया और दुनिया भर में इसके स्थायी होने की वजह से उसे जगह मिलती चली गयी।

दूसरी तरफ अपेक्षाकृत सस्त होने की वजह से भी प्रारंभ में यह लोगों को काफी पसंद आया था।

धीरे धीरे जैसे जैसे इसका कचड़ा बढ़ा तो इसके खतरे की तरफ लोगों का ध्यान आकृष्ट हुआ।

आज भी प्लास्टिक ही दुनिया में सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है क्योंकि इसे आसानी से नष्ट नहीं किया जा सकता।

दूसरी तरफ यह जमीन अथवा पानी दोनों ही स्थानों पर होने की वजह से जीवन पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।

अब बर्कले लैब ने वैज्ञानिकों ने नये किस्म की प्लास्टिक का ईजाद किया है।

इसमें आधुनिक युग के पॉलिमर के सारे गुण हैं।

प्लास्टिक का नया आविष्कार हर बार सही रि साइकिल होता रहेगा

लेकिन सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे आसानी से रिसाइकिल कर दोबारा काम में लाया जा सकता है।

इस वजह से इसे नष्ट करने की चिंता से लोग मुक्त रह सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि इसकी आणविक संरचना कुछ ऐसी है कि इसे हर बार आणविक स्तर पर दोबारा तोड़ा जा सकता है।

इस वजह से निर्मित किसी एक चीज को नये सिरे से दूसरे सामान में तब्दील किया जा सकता है।

लगातार अलग अलग स्वरुप में आने की वजह से इसे फेंकने के बदले रिसाइकिल करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी

और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से एक ही मूल पॉलिमर का बार बार इस्तेमाल कर सकेंगे।

इससे  कचड़ा मैदान और पानी में फेंका जाना बंद हो जाएगा।

इस बारे मे प्रकाशित शोध प्रबंध के मुख्य लेखक पीटर क्रिस्टेनसन ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

वह भी इसी बार्कले लैब से जुड़े हुए हैं।

वर्तमान में ऐसा कर पाना संभव नहीं था क्योंकि प्लास्टिक को नये सिरे से इस्तेमाल के लायक बनाने में उसका आणविक स्वरुप बदल जाया करता था।

इसलिए एक बार जिस काम के लिए इस्तेमाल हो चुका है, उसी काम के लिए उसका दोबारा प्रयोग नहीं होता था।

इस वजह से अंतिम कड़ी तक पहुंचने के बाद यह प्लास्टिक कचड़ा बन जाता था।

अब नये प्लास्टिक में ऐसा नहीं होता।

रि साइकिल होते वक्त यह प्लास्टिक अपने पूर्व स्वरुप में कायम रहेगा

और एक ही प्लास्टिक को अनेकों बार एक अथवा अलग अलग काम के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।

इससे दुनिया भर में जो कचड़ा एकत्रित हो गया है, उसका भी क्रमवार तरीके से निष्पादन हो जाएगा।

इसे पर्यावरण के अनुकूल और हरेक के इस्तेमाल के लायक बनाने का काम चल रहा है।

इस काम के पूरा होते ही यह बाजार में उपलब्ध होगा

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