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आधुनिक तकनीक से और स्पष्ट दिखा अंतरिक्ष का ब्लैक होल




  • पहले की तस्वीरों को और परिष्कृत किया गया

  • इवेंट हॉरिजन टेलीस्कोप की मदद से सफलता

  • अब अंतरिक्ष में नये सैटेलाइट छोड़ने की योजना

  • रेडियो तरंगों के त्वरित विश्लेषण से होगा लाभ

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः आधुनिक तकनीक की मदद से हम पहली बार ब्लैक होल की तस्वीर देख पाये थे।

दरअसल यह असली तस्वीर नहीं थी क्योंकि वहां की तस्वीर नहीं ली जा सकी है।

यह वहां के आस पास के चुंबकीय तरंगों को तस्वीर में बदलने का एक प्रयास था।

प्रारंभिक प्रयास में सफलता मिलने के बाद हमें सांभर बड़ा जैसा एक आकार नजर आया था।

अब वैज्ञानिक उसे और परिष्कृत करने में जुटे हैं और ब्लैक होल की और व्यवस्थित एक तस्वीर सामने आ पायी है।

इवेंट होरिजन टेलीस्कोप की मदद से अब पहली बार ब्लैक होल और उसके आस-पास के परिदृश्य की तस्वीर बनायी जा सकती है।

इस काम में सफलता मिलने के बाद वैज्ञानिकों की यह चुनौती थी कि

वे इससे और बेहतर तस्वीर तैयार करें ताकि आइनस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी

(सापेक्षता के सिद्धांत) पर आगे शोध हो सके।

यूरोपियन स्पेस एजेंसी के साथ इस काम में रैडबाउड विश्वविद्यालय का शोध दल काम कर रहा है।

इसके साथ कई अन्य वैज्ञानिक टीमें भी रेडियो टेलीस्कोप की मदद से अंतरिक्ष के

इस सबसे बड़े रहस्य को समझने की कोशिशों में जुटी हुई है।

इस दिशा में अभी पृथ्वी की धुरी के बाहर ही दो तीन और सैटेलाइट छोड़ने की योजना है।

इन सैटेलाइटों की जिम्मेदारी लगातार ब्लैक होल की गतिविधियों पर नजर बनाये रखने की होगी।

प्रस्तावित योजना को इवेंट होरिजन टेलीस्कोप की तर्ज पर इवेंट हॉरिजन इमेजर का नाम दिया गया है।

चल रहे शोध के निष्कर्ष में ही एक ब्लैक हो सैजेटेरियस ए स्टार के आंकड़ों को भी परिष्कृत किया गया है।

इस कोशिश में प्रारंभिक प्रयासों के बाद नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

आधुनिक तकनीक ही तरंगों को बदल सका है तस्वीरों में




जिसका नतीजा है कि और साफ तस्वीर मिल पायी है, जिसमें ब्लैक होल

पिछली तस्वीर से ज्यादा साफ नजर आ रहा है।

वैज्ञानिक इनके माध्यम से ब्लैक होल के अंदर के हालात को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

रैडबाउड विश्वविद्यालय के शोध छात्र और इस शोध से जुड़े फ्रीक रोयेल्फ का मानना है कि

रेडियो टेलीस्कोप के बदले सैटेलाइटों का इस्तेमाल के अनेक अधिक फायदे हैं।

पृथ्वी पर स्थापित टेलीस्कोप किसी खास बिंदू से ही किसी लक्ष्य पर नजर रख सकते हैं।

दूसरी तरफ पृथ्वी के बाहर की कक्षा में चक्कर काटते सैटेलाइट इनपर

अलग अलग कोण से नजर बनाये रखते हैं।

साथ ही वहां से मिलने वाले तरंगों के पृथ्वी तक पहुंचने में काफी मिलावट भी हो जाती है।

अंतरिक्ष में यह इससे बेहतर अवस्था में पाया जा सकता है।

इस तकनीक को आजमाने के पक्षधर यह भी मानते हैं कि

अंतरिक्ष में चक्कर काटने वाले उपग्रहों की मदद से वर्तमान तस्वीरों के मुकाबले

पांच गुणा अधिक साफ तस्वीर ली जा सकती है।

इससे विश्लेषण का काम और बेहतर हो जाएगा।

रेडियो एस्ट्रोनॉमी के प्रोफसर हेइनो फाल्के का कहना है कि

अगर ब्लैक होल की निरंतर साफ तस्वीरें मिलती जाती हैं तो शोध में निश्चित तौर पर गति आयेगी।

सैटेलाइट से प्राप्त होने वाले चित्रों के आधार पर भी आइनस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को

और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अगर इन सैटेलाइट तस्वीरों में कोई खास बात होती है तो वैज्ञानिक उसे भी देख समझ पायेंगे।

इवेंट हॉरिजन टेलीस्कोप जिस ब्लैक होल पर नजर गड़ाये हुए हैं,

उसके अलावा भी अनेक ब्लैक होल अंतरिक्ष में मौजूद हैं।

उन अन्य ब्लैक होलों पर नजर रखने से भी नई जानकारी मिलने की पूरी उम्मीद है।

अंतरिक्ष में अब सैटेलाइट स्थापित करने की योजना

वर्तमान में वैज्ञानिक इस सैजेटेरियस ए प्लस ब्लैक होल के आस पास तारों के टूटने की प्रक्रिया में

उत्पन्न प्लाज्मा गैस और उसके विकिरणों को बेहतर तरीके से पकड़ पा रहे हैं।

शोध से जुड़े रैडबाउड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता वोल्डोमीर कूद्रियासोव मानते हैं कि

सैटेलाइटों की मदद से आंकड़ों को भेज पाना भी आसान और तेज हो जाएगा।

वर्तमान में अलग अलग टेलीस्कोप के आंकड़ों को हार्ड डिस्क के माध्यम से भेजने में समय लगता है।

अंतरिक्ष में कार्यरत सैटेलाइट अपनी लेजर लिंक के माध्यम से सारी सूचनाओं को आधुनिक तकनीक

की मदद से  त्वरित गति से अनुसंधान केंद्रों तक पहुंचा सकेंगे। इससे काम और तेज भी हो जाएगा।

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