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श्रीलंका की अशांति और ऐसी हिंसा का जिम्मेदार कौन




श्रीलंका में बम विस्फोट में अनेक लोग मारे गये।

काफी लोग अब भी गंभीर अवस्था में घायल हैं।

लेकिन अब तक इस विस्फोट में किसका हाथ है यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

यह अलग बात है कि एक स्थानीय समूह को इसके लिए दोषी माना गया है।

दूसरी तरफ आइ एस ने भी इस हमले की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है।

दरअसल हमलोगों को भी इस बात की आदत पड़ गयी है कि विस्फोट के बाद

किसी संगठन द्वारा इसकी जिम्मेदारी लिये जाने के बाद हम आगे की चर्चा में जुट जाते हैं।

इस बार श्रीलंका का यह आतंकवादी हमला, हमें अपनी सोच को भी बदलने का स्पष्ट संकेत देता है।

हर बार आम आदमी और अधिकांश मौके पर जांच एजेंसियां भी

किसी संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद अपना काम उसी दिशा में बढ़ाने लगती हैं।

इस बार की स्थिति ही कुछ और है।

वैसे इस दुखद घटना के घटित होने के बाद पुलिस द्वारा दस दिन पूर्व दी गयी चेतावनी की बात अब बाहर आयी है।

श्रीलंका पुलिस ने ईस्टर से करीब दस दिन पहले ही यह चेतावनी 11 अप्रैल को पूरे देश के लिए जारी कर दिया था।

इस चेतावनी में बताया गया था कि कुछ कट्टर इस्लामी समूह ही यहां के चर्चों पर हमला कर सकते हैं।

लेकिन इस पत्र के बाहर आने के बाद भी श्रीलंका की सरकार की तरफ से न तो ऐसे किसी पत्र के होने को स्वीकार किया गया है

और न ही किसी संगठन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

उस अपुष्ट पत्र में जिस संगठन के नाम का उल्लेख किया गया था, वह वहां के थोविथ जमात नाम का संगठन है।

पहली बार इस संगठन का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस भीषण विस्फोट के बाद सामने आया है।

इस सूचना को यूं ही इसलिए नहीं नकारा जा सकता क्योंकि घटना के बाद सुरक्षाबलों के साथ किसी समूह की मुठभेड़ भी हुई है।

इस मुठभेड़ में तीन अधिकारी मारे गये हैं।

यह घटना विस्फोट के बाद एक घर पर छापामारी के दौरान हुई।

लेकिन यह भी ध्यान देना जरूरी है कि इस पत्र की चर्चा होने के बाद खुद वहां से प्रधानमंत्री ने सफाई दी है कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की कोई जानकारी नहीं है।

लिहाजा किसी भी किस्म के अफवाह को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने त्वरित कार्रवाई के तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के संचालन पर रोक लगा रखी है।

साथ ही रात का कर्फ्यू भी लगाया गया है।

चूंकि इस विस्फोट में श्रीलंका के अलावा अनेक विदेशी नागरिक भी मारे गये हैं।

ऐसे में इस घटना का वैश्विक प्रभाव पड़ना तय है।

हर देश की सरकार अपने नागरिकों के मारे जाने की जांच करेगी और इसके लिए जिम्मेदार संगठन तक पहुंचने का भरसक प्रयास भी करेगी।

वहां के रक्षा मंतरी रुवान विजेवर्धने से साफ तौर पर कहा है कि एक समूह ही इसके लिए जिम्मेदार है

लेकिन वह मीडिया से यह अपील करना चाहते हैं कि वह अपनी तरफ से

ऐसी सूचनाओं को परोसने से बाज आयें तो स्थिति को नियंत्रित करने के खिलाफ जाए।

जिस घर पर छापामारी के दौरान वहां के तीन अफसर मारे गये हैं, वह घर श्रीलंका के कस्वाई इलाके डेमाटोगोडा में स्थित है।

इस घर से पुलिस को विस्फोटक भी मिले हैं।

दूसरी तरफ विस्फोट के सिलसिले में अब तक 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

इससे समझा जा सकता है कि श्रीलंका पुलिस की जांच की गाड़ी सही दिशा में बढ़ रही है।

श्रीलंका में लिट्टे का प्रभाव खत्म होने के बाद से वहां निरंतर शांति का माहौल बना हुआ था।

इसी शांतिपूर्ण माहौल की वजह से वह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का एक पसंदीदा इलाका भी बन चुका था।

ऐसे में इस विस्फोट से और कुछ नहीं तो कमसे कम श्रीलंका के पर्यटन उद्योग को जबर्दस्त झटका लगेगा, यह तय है।

इसलिए इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि श्रीलंका के पर्यटन को

प्रभावित कर उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने से किसे ज्यादा फायदा है।

इसलिए इस किस्म की आतंकवादी कार्रवाइयों को अब अंतर्राष्ट्रीय अर्थनीति के परिपेक्ष्य में भी देखने का समय आ चुका है।

कई बार ऐसी कार्रवाइयों में शामिल होने वाले तक को हमले के विस्तृत आयाम की कोई जानकारी तक नहीं होती

क्योंकि उसे नियंत्रित करने वाला पर्दे के पीछे बैठा होता है।

ऐसे में जांच के दौरान दोषियों को पकड़ने के साथ साथ उन्हें नियंत्रित करने वाली शक्तियों का भी पता लगाया जाना चाहिए।

इन्हीं ताकतों को पकड़ने और नियंत्रित करने की जरूरत है।

यह तय है कि इस किस्म की कार्रवाइयों में पैसों की भी जरूरत पड़ती है।

यह पैसा आसमान से नहीं टपकता।

इस धन स्रोत को रोककर ही हम आतंकवाद के शतरंज को रोक सकते हैं

वरना शतरंज की बिसात पर मोहरे तो यहां नहीं तो कहीं और मिलते ही रहते हैं।



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