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गोरखपुर के इलाकों में दलबदलुओं से सियासी दलों को चुनौती




गोरखपुरः गोरखपुर और बस्ती के इलाके में दलबदलुओं ने यहां के सियासी दलों की परेशानी बढ़ा दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर तथा बस्ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों पर टिकट

न मिलने से नाराज प्रभावशाली नेता सियासी दलों के लिये चुनौती बने हुये है।

दलबदल के कारण इस क्षेत्र में हाशिये पर चल रही कांग्रेस का प्रभाव बढने से सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में अब लड़ाई त्रिकोणीय होने की सम्भावना बढ़ गयी है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के समाजवादी पार्टी(सपा) को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो जाने से बस्ती लोकसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओ का उत्साह बढ़ गया है।

इसी तरह संतकबीर नगर जिले के खलीलाबाद संसदीय क्षेत्र से सपा के पूर्व सांसद और स्थानीय स्तर पर मजबूत समझे जाने वाले भाल चन्द यादव द्वारा कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

कांग्रेस ने उन्हें खलीलाबाद से उम्मीदवार बनाया है।

इसी तरह बस्ती मंडल की तीसरी सीट डुमरियागंज है जहां चन्द्रेश उपाध्याय को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है।

इस तरह बस्ती मंडल की तीनों सीटों पर कांग्रेस ने अपनी मजबूत दावेदारी की है

जिससे तीनों सीटों पर लड़ायी त्रिकोणीय मानी जा रही है।

दलबदल से चुनाव में लाभ किसका है और हानि किसकी होगी वह समय बतायेगा

लेकिन कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशियों को चुनौती दी है।

कांग्रेस के उभरने से महागठबंधन और भाजपा के नेताओं चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखायी दे रही है।

अभी तक बस्ती मंडल के संतकबीर नगर सीट से बहुजन समाज पार्टी(बसपा)उम्मीदवार राम प्रसाद चौधरी और भाजपा के हरीश द्विवेदी के बीच काटे की टक्कर थी।

कांग्रेस का मजबूत प्रत्याशी खड़ा होने से मुकाबला अब त्रिकोणीय माना जा रहा है।

गोरखपुर में कई किस्म के पेंच एक साथ सभी दलों में फंसे

गोरखपुर मंडल के देवरिया जिले की सलेमपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश मिश्र की मजबूत दावेदारी बतायी जा रही है।

भाजपा प्रत्याशी सांसद रविन्द्र कुशवाहा को क्षेंत्र के कयी गांवों में प्रचार के दौरान विरोध का सामना करना पड रहा है।

इसी तरह देवरिया सीट पर भाजपा के उम्मीदवार डा. रमा पति राम त्रिपाठी उम्मीदवार बनाया हैं।

कांग्रेस के नियाज अहमद और महागठबंधन ने विनोद जयसवाल को उम्मीदवार बनाया गया है।

अभी यहां मुख्य लड़ाई भाजपा और महागठबंधन के बीच मानी जा रही थी

लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी के रोड शो के बाद दोनों को गंभीर चुनौती मिल सकती है।

रोड़ शो से कांग्रेस उम्मीदवार को नयी ताकत मिलने की उम्मीद है।

यहां अब लड़ायी त्रिकोणात्मक होने की सम्भावना हो सकती है।

कुशीनगर संसदीय क्षेत्र में पूर्व केन्द्रीय मंत्री आर पी एन सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं

और भाजपा ने इस बार राजेश पान्डेय की जगह विनोद दूवे को उम्मीदवार बनाया है।

यहां उम्मीदवार बदलने की वजह से अभी तक भाजपा का चुनाव प्रचार उठ नहीं पाया है।

क्षेत्र के बहुप्रतिष्ठित गोरखपुर संसदीय सीट पर भाजपा द्वारा भोजपुरी अभिनेता एवं गायक रवि किशन को मैदान में उतारा है।

इसी तरह गोरखपुर जिले के बांसगाव .सु. संसदीय क्षेत्र से भी भाजपा उम्मीदवार

कमलेश पासवान और गठबंधन के उम्मीदवार सदल प्रसाद के बीच सीधी टक्कर दिखायी दे रही है।

क्षेत्र के दोनों क्षेत्रों में भाजपा के सामने सभी नौ संसदीय सीटों को बचाये रखने की चुनौती है

वहीं कांग्रेस , सपा और बसपा को इस क्षेत्र में अपनी खोयी हुयी प्रतिष्ठा को प्राप्त करने का एक बडी चुनौती है।

इस सीटों के लिये मतदान 19 मई को होगा।



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