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अलास्का में साढ़े तीन सौ वर्ष हुए एक सामूहिक नरसंहार का राज अब खुला




  • तीर के युद्ध में मारे गये थे 28 लोग
  • दो बच्चों के खेल से प्रारंभ हुआ भयानक युद्ध
  • उस दौर की साठ हजार वस्तुए भी बरामद
  • पूरे अलास्का और यूकोन तक फैली थी लड़ाई
  • किसी संत के श्राप की कहानी भी है प्रचलित

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अलास्का के एक पुराने रहस्य पर से अब पर्दा उठा है।

पहले से ही वहां की आबादी और उनके रहन सहन की जानकारी थी।

वहां कोई बड़ी लड़ाई हुई थी, इसका भी उल्लेख स्थानीय इतिहास में दर्ज था।

अब इस लड़ाई क कारणों का खुलासा हो पाया है।

अनुसंधानकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे है कि सामान्य बच्चे के खेल की वजह से

शायद इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी।

किसी एक बच्चे की आंख में डार्ट (खेलने वाला छोटा तीर) लगने के बाद मार पीट से युद्ध का प्रारंभ हुआ था।

अब वहां की खुदाई के क्रम में एक सामूहिक नरसंहार का इलाका मिल गया है।

इसकी खुदाई में 28 शव पाये गये हैं।

साथ ही उस काल के करीब साठ हजार वस्तुएं भी वहां से पायी गयी है।

जहां पर यह युद्ध हुआ था, उसे अगालीमुइट कहा जाता था।

वर्तमान काल में इसे नूनालेक कहा जाता है।

शोध दल इस नतीजे पर पहुंचा है कि वहां जितने भी शव पाये गये हैं,

सबके चेहरे जमीन की ओर हैं तथा उन्हें घास की रस्सी से बांधकर मारा गया था।

सभी के सर के पीछे ऐसे छेद हैं, जिससे यह पता चलता है कि उन्हें तीर मारा गया था

अथवा भाला घोंपा गया था।

अलास्का के इस युद्ध के बारे में प्रचलित रही हैं कई कहानियां

इस लड़ाई के बारे में वहां के समाज में पहले से ही कहानियां प्रचलित थी।

इसमें बताया जाता था कि यह लड़ाई दरअसल प्रारंभ कैसे हुई थी।

कहानी के मुताबिक दो बच्चों के खेलने के बाद एक बच्चे की डार्ट दूसरे की आंख में जा लगी।

इससे घायल बच्चे के पिता ने दूसरे बच्चे की दोनों आंखें फोड़ दी।

इस घटना के बाद दूसरे बच्चे के घरवालों ने विरोध किया।

यहीं से इस लड़ाई की शुरुआत हुई। कहा जाता है कि इस लडाई में वहां की पूरी आबादी ही प्रभावित हो गयी थी।

इस कहानी से अवगत होने के बाद भी इसके बारे में कोई प्रामाणिक तथ्य अब तक सामने नहीं आ पाये थे।

अब अबेरडन विश्वविद्यालय (स्कॉटलैंड) के शोध दल ने उस स्थान को खोजकर उसकी खुदाई से उस काल के प्रमाण एकत्रित किये हैं।

कहानी के तौर पर पूरी घटना लोगों को पता होने के बाद अब वैज्ञानिक शोध का यह निष्कर्ष है कि यह लड़ाई 1590 से 1630 के बीच हुई थी।

वैसे इस आबादी पर वर्ष 1652 और 1677 में हमला और आग का प्रकोप भी हुआ था।

जिसके बाद वहां की पूरी आबादी ही तबाह हो गयी थी।

युद्ध इतना व्यापक फैला कि बसा बसाया इलाका तबाह हो गया

कहानियों में इस बात का उल्लेख है कि इस बच्चों के घायल होने से प्रारंभ हुई लड़ाई बाद में अलास्का और यूकोन इलाके तक फैल गयी थी।

इस दौरान वहां कई युद्ध हुए। इस युद्धों के बारे में भी कई अन्य रोचक कहानियां पहले से मौजूद हैं।

जिनमें महिलाओं द्वारा पुरुष का भेष धारण कर युद्ध करने तक की कहानी है।

वैसे यह बार बार दोहराया जाता है कि इस युद्ध के दौर के प्रारंभ होने के पूर्व

वहां से गुजरते एक संत ने किन्हीं कारणों से नाराज होकर

यहां के लोगों को मिट्टी में मिल जाने का श्राप दिया था।

इस युद्ध में अनेक लोगों के मारे जाने की सूचना तो पहले से थी।

लेकिन किसी एक स्थान पर एक साथ 28 लोगों के शव पहली बार बरामद किये जाने से

युद्ध के बारे में प्रचलित कहानियों की सत्यता प्रमाणित हुई है।

साथ में यह भी स्पष्ट हो गया है कि उस काल में भी युद्ध का मुख्य हथियार तीर धनुष ही हुआ करता था।

शोध दल का निष्कर्ष है कि वहां की आबादी सुव्यवस्थित थी।

क्योंकि कब्र के साथ साथ साठ हजार ऐसी सामग्रियां भी मिली हैं।

इससे वहां की सभ्यता और रहन सहन का पता चलता है।

अलास्का के ठंड की वजह से जमीन के अंदर दफन इन चीजों को

काफी हद तक सही अवस्था में पाया जा सका है।

इनमें से कुछ लकड़ी के नक्काशी वाले सामान बर्फ की वजह से बिल्कुल भी नष्ट नहीं हुए हैं।

वहां से मिले नृत्य के मुखौटे यह बताते हैं कि उस दौर में भी सामूहिक नृत्य का प्रचलन हुआ करता था।

जिसमें लोग किसी जानवर का भेष बनाकर नृत्य किया करते थे।



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