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लोकसभा चुनाव में भी जरीडीह बाजार को पानी का इंतजार




बेरमोः लोक सभा चुनाव की घोषणा के बाद फिर इस बार जरीडीह बाजार वासियों को प्रतियाशियों द्वारा पेयजल की समस्या का लुभावने वादों का इंतजार है।

आजादी के बाद से अबतक जितने लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हुए सभी में प्रत्याशियों  ने यहां व्याप्त पेयजल की समस्या को दूर करने का आश्वासनों दिया है।

लेकिन आज तक व्यप्त पेयजल संकट का समाधान नही हो पाया है।

गर्मी के शुरूआत होते ही जरीडीह बाजार वासीयों के बीच पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती रही है।

सुबह होते ही यहां महिला पुरूषों की टोली अपने हर काम को छोड़कर तसला बाल्टी लेकर दामोदर नदी के तरफ दौड़ लगाने को विवश रहते हैं।

लगभग 15 हजार आबादी वाला यह गांव अपने प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह दामोदर नदी के चुआँ पर मुनहस्सर है।

दुर्भाग्य की बात है कि महत्वकांक्षी मेघा जलापुर्ति योजना से भी जरीडीह बाजार को दूर रखा गया,

जिससे यहां के ग्रामीणों में काफी रोष है।

लोकसभा चुनाव में नाराज ग्रामीण नोटा के पक्ष में

हालांकि पूर्व मंत्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह के प्रयास से करोड़ो की लागत से जलमिनार का निर्माण कराया गया

लेकिन उक्त जलमिनार से ग्रामीणों को अबतक प्रयाप्त पेयजल उपलब्ध नही हो पायी

और जलमिनार शोभा की वस्तु बनकर ग्रामीणों को मूंह चिढ़ा रही है।

दानी देवी, सकीना बानो, सावित्री देवी, अनिल कुमार अग्रवाल, मो0 आकिब ने कहा कि

आजादी के लगभग 70 साल गुजर जाने के बाद भी जरीडीह बाजार में उत्पन्न जलसंकट जस की तस बनी हुई है,

उत्पन्न जल संकट के हल के प्रति किसी जनप्रतिनिधियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।

सिर्फ चुनाव के समय वोट लेने के लिए पानी की समस्या को हल कर देने का आश्वासन देते रहे

अबतक सिर्फ आश्वासनों के भरोसे यहां की जनता पानी की समस्या से जूझते आ रहे हैं।

यहां दशकों पूराना जल संकट के बाद भी मेघा जलापुर्ति योजना से जरीडीह बाजार को वंचित रखा गया है

जो हैरत की बात है।

कहा कि इस लोकसभा चुनाव में हमलोग मताधिकार का तो प्रयोग करेंगे

लेकिन प्रत्याशियों को वोट देने के बजाय नोटा में बटन दबाकर अपना मत का प्रयोग करेंगे।



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