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रांची में रामटहल के होने से कुरमी मतदाता असमंजस में




  • कुरमी समुदाय दो फाड़, सुबोध भैया के पौ बारह

रांची : रांची लोकसभा क्षेत्र के सांसद व कुरमी नेता रामटहल चौधरी द्वारा मंगलवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में नामांकन किये जाने के बाद जहां कुरमी मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गया है,

वहीं स्थानीय भाजपा में इस बात पर गौर किया जाने लगा है कि

भाजपा का आधार स्तंभ कुरमी समुदाय अगर भाजपा से हटा तो फिर भाजपा का बेड़ा पार लगना मुश्किल है।

गौरतलब है कि कुरमी नेता रामटहल और भाजपा के मुद्दे पर लगभग दो फाड़ हो चुके हैं।

कुरमी समुदाय का एक वर्ग जहां अपने समुदाय के रामटहल चौधरी के पक्ष में है

तो वहीं भाजपा समर्थक कुरमी समुदाय के लोग आज भी पार्टी के साथ हैं।

मंगलवार को नामांकन के दिन भाजपा और रामटहल चौधरी ने अपनी-अपनी

औकात दिखाने का भरसक प्रयास किया और उसमें चौधरी ने बाजी मारी।

रांची में पहली बाजी मार चुके हैं राम टहल चौधरी

कुरमी समुदाय के लोग काफी संख्या में उनके समर्थन में मोरहाबादी मैदान में जुटे।

इससे भाजपा के समर्थकों में निराशा की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

वैसे भाजपा नेता व ईचागढ़ के विधायक साधु चरण महतो और झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य

तथा पंचपरगना क्षेत्र के कुरमी नेता डा. राजाराम महतो सहित आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो,

ये तीनों नेता एनडीए गठबंधन के प्रत्याशियों को विजयी बनाने के लिए जी जान से लग गये हैं।

जहां तक आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की बात है तो उनकी पकड़ उनके अपने क्षेत्र सिल्ली और ईचागढ़ में काफी है।

यह अलग बात है कि वे सिल्ली से अमित महतो और उनकी पत्नी से पराजित हो चुके हैं।

बावजूद आज भी सिल्ली में लोग उन्हें काफी पसंद करते हैं।

जिला परिषद में भी आजसू सदस्यों की संख्या काफी है और यही कारण है कि जिला परिषद के अध्यक्ष भी आजसू के ही हैं।

गौर करने की बात है कि सुदेश महतो कुरमी समुदाय से आते हैं और यह समुदाय राजनीति में काफी दिलचस्पी भी लेता है।

रांची लोक सभी सीट से भाजपा के संजय सेठ को कुरमी मतदाता कितना पसंद करेंगे, सुदेश महतो ही बताएंगे।

वैसे एक बात तो है कि उन्होंने अपनी औकात पर कम से कम एक सीट गिरिडीह तो हथिया लिया है।

गठबंधन में आजसू को मिली है गिरिडीह की सीट




यहां भाजपा की भी मजबूरी थी कि एनडीए गठबंधन को बनाये रखने के लिए एक सीट तो कहीं न कहीं देना ही था।

लिहाजा भाजपा को अपनी सिटिंग सीट गिरिडीह को छोड़ कर आजसू को देना पड़ा।

लेकिन इधर लेना के देना पड़ गया।

रांची जिला लोजपा ने भाजपा पर लोजपा को उपेक्षित किये जाने का आरोप लगाते हुए एनडीए से ही नाता तोड़ने की मांग कर दी।

रांची लोजपा नेताओं का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के समय भाजपा और आजसू का झंडा तो था

लेकिन लोजपा का झंडा नहीं था। यहां तक कि लोजपा के लोगों को नामांकन के लिए आमंत्रित तक नहीं किया गया।

दूसरे कुरमी नेता ईचागढ़ के दबंग विधायक साधु करण महतो हैं,

जिन्होंने वहां के मलखान सिंह उर्फ अरविंद सिंह का पराजित किया।

वे कुरमी समुदाय में काफी पकड़ रखते हैं।

मलखान को हराने के बाद साधु चरण का मनोबल बढ़ा

ईचागढ़ में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व विधायक मलखान सिंह को हराने के बाद साधु चरण महतो का मनोबल बढ़ गया है।

उन्होंने दावा किया है कि भाजपा को वे ईचागढ़ से बढ़त दिलाएंगे।

यहां भी कुरमी समुदाय के लोग दो फाड़ हो चुके हैं।

कुरमी समुदाय अब दो हिस्सों में बंटा हुआ

एक चौधरी समर्थक हैं तो दूसरे भाजपा के।

तीसरे नेता झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य तथा पंचपरगना क्षेत्र के कुरमी नेता

मुख्यमंत्री के प्रियपात्र डा. राजाराम महतो हैं, जो एनडीए प्रत्याशी को जिताने के लिए जी-जान से लगे हुए हैं।

लेकिन जहां तक कुरमी समाज की बात है तो पिछड़ा वर्ग में कुरमी समाज राजनीतिक क्षेत्र में सबसे आगे है।

यही कारण है कि कुरमी नेताओं की नेतागिरी अलग बात है और समाज की बात अलग है।

सिल्ली, राहे, सोनाहातु, पतराहातु आदि क्षेत्रों में वैसे डा. महतो की अच्छी पकड़ है

और वे नेग-जोग, शादी-ब्याह सहित सामाजिक कार्यों में सालों भर इनके बीच रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने भी कुरमी समुदाय में इनकी पकड़ को देखते हुए ही इन्हें पिछड़ा वर्ग आयोग का

सदस्य बनाया, जबकि इनके साथ भाजपा में शामिल होने वाले आज हाशिए पर हैं।

इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि कुरमी समाज रामटहल चौधरी के नामांकन करने के साथ ही

दो फाड़ हो चुका है। अब भाजपा इस समुदाय को कैसे समेट कर रख सकती है, उसकी काबिलियत पर है।

आज भी चौधरी डंके की चोट पर कह रहे हैं कि मेरी पहचान पार्टी से नहीं है, कुरमी समाज से है,

जिन्होंने मुझे बार-बार सांसद बनाया।

कुरमी समाज को भाजपा से जोड़ा था राम टहल चौधरी ने

मुझे आज भी अपने समुदाय पर पूरा विश्वास है।

यह तो सच है कि कुरमी समुदाय वर्षों से भाजपा को वोट देते आया है।

लेकिन इस बार रामटहल चौधरी को सिटिंग सीट से हटा कर गैर झारखंडी को

टिकट दिये जाने से काफी खफा हैं और इसका खामियाजा तो भाजपा को ही भुगतना पड़ सकता है।

रामटहल चौधरी भी इसी सोच के साथ खड़े हैं कि हम जातें या न जीतें पर भाजपा को जीतने नहीं देंगे।

ऐसे में कांग्रेस के सुबोध भैया की इच्छा है कि श्री चौधरी दमखम के साथ मैदान में डटे रहें तो उनकी पौ बारह है।

अब आगे कुरमी मतदाताओं पर रांची लोक सभा सीट का परिणाम निर्भर करता है।



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